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फर्जी प्रमाणपत्र से व्यापारी ने बैंक को लगाया 3 करोड़ का चूना, मामला दर्ज

फर्जी प्रमाणपत्र से व्यापारी ने बैंक को लगाया 3 करोड़ का चूना, मामला दर्ज

डिजिटल डेस्क, नागपुर। गिट्टीखदान थानांतर्गत जरीपटका क्षेत्र के एक कारोबारी ने मित्रों व बैंक अधिकारियों की मदद से कृषि जमीन को गैर-कृषि जमीन का अनापत्ति प्रमाण-पत्र जोड़कर बैंक ऑफ बड़ौदा को 3 करोड़ का चूना लगा दिया। गिट्टीखदान थाने में आठ आराेपियों के खिलाफ धोखाधड़ी का मामला दर्ज किया गया है। आरोपियों में बैंक के 6 अधिकारी भी शामिल हैं। प्रकरण की जांच आर्थिक अपराध शाखा पुलिस सेल के एपीआई राजेंद्र पाटील कर रहे हैं। पता चला है कि संजय कुकरेजा नागपुर में मोबाइल शॉपी, होटल व अन्य कारोबार से जुड़ा हुआ है।  

ये हैं आरोपी 

पुलिस सूत्रों के अनुसार, 4 जुलाई 2013 से 31 मार्च 2016 के दरमियान बैंक ऑफ बड़ौदा से 3 करोड़ रुपए की धोखाधड़ी की गई। धोखाधड़ी आरोपी संजय कुकरेजा ने की। कुकरेजा के करीबी मित्र महेश भटेजा की भी इस प्रकरण में उल्लेखनीय भूमिका है। प्रकरण में आरोपी संजय कुकरेजा के अलावा बैंक अधिकारियों में आरोपी महेश उदरनमल भटेजा  (लक्ष्मी पैलेस, कुशी नगर),  अजय गंगाधर सुटे (प्लाॅट नं. 165, धाडीवाल ले आउट),  वामन हेडाऊ (प्लाॅट नं. 3, इंद्रप्रस्थ ले आउट, वाड़ी), ध्रितेश सुनील मन्ना (फ्लैट नं. 22, दिशा नवागंज सिडको नं. 2, औरंगाबाद),  रमेश चंद्रभान लांबाहाते (प्लाॅट नं. 20, अयोध्या नगर), राजेश महावीर प्रसाद खरे (अभ्यंकर नगर), विजय रामचंद्र पेटकर (दयालु सोसायटी, सीएमपीटीआई मेन रोड, जुना जरीपटका) निवासी भी शामिल हैं। 

मिलीभगत का खेल

प्रकरण की जांच कर रहे आर्थिक अपराध शाखा पुलिस सेल के एपीआई राजेंद्र पाटील ने बताया कि आरोपी अजय सुटे ब्रांच में एक्सक्यूटिव  अधिकारी हैं। राजेश खरे चीफ मैनेजर, विजय पेटकर लीगल एडवाइजर हैं। उक्त आरोपियों की मिलीभगत से बैंक ऑफ बड़ौदा को तीन करोड़ रुपए का चूना लगा दिया गया है। 

और दस्तावेज तैयार किया

आरोपी संजय कुकरेजा की मौजा नारा परिसर में करीब एक एकड़ खेती है। यह जमीन खाली पड़ी है, लेकिन शासकीय रिकार्ड में यह  जमीन कृषि योग्य जमीन है। आरोपी संजय कुकरेजा ने इस जमीन पर कर्ज लेेने के लिए बैंक ऑफ बड़ौदा की अनंतनगर शाखा में आवेदन किया और इसी दौरान संजय ने इस कृषि जमीन को गैर-कृषि जमीन होने का दस्तावेज तैयार किया। यह दस्तावेज संजय ने जिस व्यक्ति से बनवाया था, उसकी अब मौत हो चुकी है। इसी दस्तावेज की वजह से ढाई करोड़ की जमीन की कीमत करीब साढ़े 5 करोड़ रुपए हो गई।

आरोपी महेश भटेजा ने कर्ज वापस करने के लिए गारंटर पत्र पेश किया। अन्य आरोपियों को यह बात पता थी कि संजय कुकरेजा ने जिस जमीन काे एनए बता रहा है, दरअसल वह जमीन कृषि जमीन थी। उसके बाद भी बैंक के विधि अधिकारी विजय पेटकर ने जमीन की जांच के फर्जी रिपोर्ट बनाकर बैंक में पेश की। उक्त सभी आरोपियों ने एक दूसरे की मिलीभगत से वर्ष 2013 में संजय कुकरेजा के नाम पर 3 करोड़ रुपए का कर्ज मंजूर कर दिया। कुछ दिनों तक आरोपियों ने कर्ज की रकम बैंक में जमा किया। बाद में उन्होंने बैंक में कर्ज की रकम जमा करना बंद कर दिया। 

नए मैनेजर को शंका हुई

बैंक के नए प्रबंधक राजू पुरुषोत्तम अमरू (50)  सेमिनरी हिल्स निवासी को वार्षिक अंकेक्षण के दरम्यान इस कर्ज की फाइल पर शंका हुई। उन्होंने संजय कुकरेजा के कर्ज की फाइल की नए सिर से जांच की तो पता चला कि आरोपियों ने कृषि जमीन को गैर-कृषि जमीन होने का फर्जी दस्तावेज तैयार कर बैंक में जमा किया है। इसमें बैंक के उक्त  तत्कालीन अधिकारियों ने सहयोग किया। तब राजू अमरु ने अपराध शाखा पुलिस विभाग के आर्थिक अपराध शाखा सेल के पास शिकायत की। बैंक ने अपने स्तर पर सारे दस्तावेजों की छानबीन करने के बाद पुलिस के पास शिकायत की। एपीआई निरीक्षक राजेंद्र पाटील ने इस मामले में आरोपियों के खिलाफ गिट्टीखदान थाने में शिकायत की है। 

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