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 किसके आदेश से अतीक और नफीस को दिए गए अति गरीबी के लाभ 

September 18th, 2020 18:43 IST
 किसके आदेश से अतीक और नफीस को दिए गए अति गरीबी के लाभ 

 जांच शुरु - एसडीएम ने निगम प्रशासन के साथ खाद्य विभाग को लिखे पत्र 
डिजिटल डेस्क  सतना।
नाबालिग छात्रा के यौन शोषण के आरोप में पुलिस के हत्थे चढ़े करोड़ों के आसामी अतीक मसंूरी उर्फ सिकंदर उर्फ समीर  और उसके भाई नफीस मंसूरी को पहले गरीबी (बीपीएल) और फिर अति गरीबी (एएवाई) का लाभ आखिर किसके आदेश पर दिया गया था? वो कौन था जिसने अतीक और नफीस के नाम बीपीएल की सर्वेक्षण सूची में दर्जा कराने की अनुशंसा की थी? ऐसे तमाम संगीन सवालों की तलाश के लिए मामले की जांच शुरु कर दी गई है। इस सिलसिले में एसडीएम पीएस त्रिपाठी ने नगर निगम के कमिश्नर और जिला खाद्य एवं आपूर्ति अधिकारी को अलग-अलग पत्र लिख कर जानकारी मांगी है। एसडीएम श्री त्रिपाठी ने बताया कि आरोप प्रमाणित पाए जाने दोषियों के खिलाफ एफआईआर कराई जाएगी। 
वर्ष 2007 में बने थे बीपीएल के कार्ड :
एसडीएम ने बताया कि वार्ड नंबर 23 निवासी अतीक पिता निजामुद्दीन मंसूरी और नफीस मंसूरी के बीपीएल कार्ड वित्तीय वर्ष 2007-2008 में बनाए गए थे। अतीक के बीपीएल कार्ड (नंबर-1417) का बीपीएल सर्वे नंबर 12404 और उसके भाई नफीस के बीपीएल कार्ड (नंबर-1418) का सर्वे नंबर 12405 है। 
आरोप हैं कि अतीक और नफीस के यही बीपीएल कार्ड वर्ष 2014 में अति गरीबी रेखा के एएवाई कार्ड में बदल दिए गए। अतीक के नाम पर जारी कार्ड में सदस्य संख्या सिर्फ एक है,जबकि नफीस के कार्ड में सदस्यों की संख्या-3 है। दोनों ने अपात्र होते हुए भी अगस्त माह तक रियायती दर के राशन का उपयोग किया। उल्लेखनीय है, बीपीएल का यह फर्जीवाड़ा पकड़ में आने के बाद एसडीएम पीएस त्रिपाठी ने दोनों कार्ड रद्द कराते हुए निगम प्रशासन से अतीक और नफीस के नाम गरीबी और अति गरीबी रेखा से विलोपित करने का आग्रह किया है। उन्होंने जिला खाद्य आपूर्ति अधिकारी को पत्र लिख कर दोनों के नाम पर पात्रता पर्ची नहीं जारी करने के भी निर्देश दिए हैं। 
ये हैं जांच के बिंदु :------
कलेक्टर अजय कटेसरिया के निर्देश पर एसडीएम इन तथ्यों की जांच करेंगे कि करोड़ों के आसामी अतीक और उसके भाई नफीस के अपात्र होने के बाद भी आखिर इन दोनों के नाम किस आदेश और किसकी अनुशंसा पर सर्वेक्षण सूची में शामिल किए गए थे। आदेश और अनुशंसाओं के साथ बीपीएल की सर्वे सूची 
भी मांगी गई है। एसडीएम ने निगम से यह जानकारी भी चाही है कि अपात्रों को गरीबी रेखा की सूची में शामिल करने के लिए किन-किन दस्तावेजों को उपयोग किया गया? 
 इनका कहना है :-----
फर्जीवाड़े को गंभीरता से लिया गया है। मामले की बारीकी से जांच कराई जा रही है। आरोप प्रमाणित पाए जाने पर दोषियों के खिलाफ मामला पुलिस को सौंपते हुए एफआईआर भी कराई जाएगी। 
पीएस त्रिपाठी, एसडीएम
 

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