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विद्युतीकरण की जाँच में मिली गड़बड़ी-  विभाग ने की साढ़े दस करोड़ की कटौती

विद्युतीकरण की जाँच में मिली गड़बड़ी-  विभाग ने की साढ़े दस करोड़ की कटौती

डिजिटल डेस्क जबलपुर । पूर्व क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी के तहत सीधी में सौभाग्य योजना के तहत विद्युतीकरण के कार्य में अनियमितता पाए जाने पर ठेकेदारों के बिल की राशि में कटौती किए जाने का मामला प्रकाश में आया है। यह कटौती पूरे प्रकरण में जाँच के बाद की गई है। खास बात यह है कि जाँच जहाँ जबलपुर स्थित कॉर्पोरेट कार्यालय स्तर पर कराई जा रही है, वहीं स्थानीय स्तर पर भी कराई जा रही है, जिससे कार्यों में गड़बडिय़ाँ मिलने पर विभाग के कार्यपालन अभियंता द्वारा संबंधित ठेकेदारों की राशि में करीब 10 करोड़ की कटौती का प्रस्ताव तैयार कर कंपनी को भेजा गया है।
 गौरतलब है कि इस योजना के तहत कराए गए कार्यों में अधिकारियों द्वारा लापरवाही बरते जाने और गलत तरीके से बिल पास किए जाने की शिकायत पर जबलपुर की टीम द्वारा जाँच किये जाने के बाद विभाग के कार्यपालन अभियंता आरसी सिंह पटेल द्वारा भी विभागीय स्तर पर जाँच कराई गई। जाँच के दौरान गड़बडिय़ाँ पाये जाने पर संबंधित ठेकेदारों के भुगतान में कटौती का प्रस्ताव जारी कर दिया गया।
एसटीसी से जारी हुआ 80 करोड़ से अधिक का देयक
सूत्र बताते हैं कि शिकायत की जाँच के दौरान विद्युतीकरण कार्य में कमी पाए जाने पर कुल राशि 74.44 करोड़ में 10.46 करोड़ रुपए की कटौती की गई है। इतना ही नहीं आगामी दो वर्ष में यदि किसी प्रकार की टूट-फूट एवं क्षति पाई जाती है तो 10 प्रतिशत की दर से 6.46 करोड़ रुपए की रिटेंशन राशि कंपनी में जमा करा दी गई है। बताया जाता है कि एसटीसी संभाग द्वारा 80.51 करोड़ रुपए के देयक पारित किए गए थे, जिसमें से क्षेत्रीय लेखा कार्यालय द्वारा 59.93 रुपए  का भुगतान किया जा चुका है शेष राशि 20.98 करोड़ का भुगतान किया जाना लम्बित है। वर्तमान में सीधी जिले के सौभाग्य योजना द्वारा किए गए कार्यों की जाँच चल रही है जब तक जाँच पूरी नहीं हो जाती तब तक लम्बित राशि का भुगतान होना संभव भी नहीं दिख रहा है। ऐसी स्थिति निर्मित होने पर ठेकेदार खासे नाराज हो गए हैं। 
ठेकेदारों के लिए मुसीबत बना लंबित भुगतान
सूत्र बताते हैं कि इस मामले में विभाग के ही अधिकारियों द्वारा शिकायत करने की बात सामने आई है। जिनके द्वारा मप्र शासन के ऊर्जा मंत्री एवं विद्युत विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों से शिकायत की गई कि सीधी जिले में सौभाग्य योजना के माध्यम से कराए गए कार्यों में तकरीबन दो सौ करोड़ का घोटाला अनुमानित है जिसके कारण जाँच कमेटी गठित हुई और विधानसभा में भी प्रश्न उठाए गए, जिसका जवाब विभाग द्वारा दिया गया।
 

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Real Estate: खरीदना चाहते हैं अपने सपनों का घर तो रखे इन बातों का ध्यान, भास्कर प्रॉपर्टी करेगा मदद

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कोई भी प्रॉपर्टी खरीदने से पहले इस बात का ध्यान रखे कि वो भारतीय रियल एस्टेट इंडस्ट्री के रेगुलेटर RERA से अप्रूव्ड हो। रियल एस्टेट रेगुलेशन एंड डेवेलपमेंट एक्ट, 2016 (RERA) को भारतीय संसद ने पास किया था। RERA का मकसद प्रॉपर्टी खरीदारों के हितों की रक्षा करना और रियल एस्टेट सेक्टर में निवेश को बढ़ावा देना है। राज्य सभा ने RERA को 10 मार्च और लोकसभा ने 15 मार्च, 2016 को किया था। 1 मई, 2016 को यह लागू हो गया। 92 में से 59 सेक्शंस 1 मई, 2016 और बाकी 1 मई, 2017 को अस्तित्व में आए। 6 महीने के भीतर केंद्र व राज्य सरकारों को अपने नियमों को केंद्रीय कानून के तहत नोटिफाई करना था।