सतना: हिन्दी को राष्ट्र भाषा बनाने सतना में जुटेंगे देशभर के हिन्दीसेवी

May 31st, 2022

डिजिटल डेस्क, सतना। देष के प्रतिनिधि साहित्यकारों की प्रतिष्ठित संस्था राष्ट्रीय साहित्य प्रभा मंच के तत्वावधान में 3 जून को यहां देशभर के हिन्दीसेवी एकसाथ हिन्दी को राष्ट्र भाषा बनाने की मांग को लेकर उद्घोष करेंगे। जगतगुरू स्वामी रामभद्राचार्य कार्यक्रम के मुख्य अतिथि होंगे। अध्यक्षता संत सनकादिक ब्रह्मचारी महराज करेंगे। इस अभूतपूर्व साहित्यिक अनुष्ठान में तकरीबन 20 राज्यों से साहित्यकार और हिन्दी सेवी भाग लेंगे। 

नागरिक अभिनंदन की भी तैयारी-

मंच के राष्ट्रीय अध्यक्ष सुदामा शरद एवं महासचिव प्राची मिश्रा ने साझा वक्तव्य में बताया कि कार्यक्रम का आयोजन सुबह 10 से टाउन हाल में किया जाएगा। इस अवसर पर हिन्दी के अप्रतिम ललित निबन्धों के सर्जक नर्मदा प्रसाद मिश्र नरम (रायपुर) एवं हिन्दी प्रेम गीतों की अनन्य साधिका मीरा शलभ जैसे ऐसे कई विद्वतजन सम्मानित किए जाएंगे, जिन्होंने साहित्य सृजन और पत्रकारिता के माध्यम से हिंदी की स्तुत्य सेवा की है। राष्ट्रीय साहित्य प्रभा मंच वरिष्ठ हिन्दी सेवियों का नागरिक अभिनंदन भी करेगा। हिन्दी सेवियों के अभिनंदन में शहर की कई प्रतिष्ठित संस्थाएं भी अपनी भागीदारी निभाएंगी।  

समापन कवि सम्मेलन के साथ-

राष्ट्रीय अध्यक्ष सुदामा शरद एवं महासचिव प्राची मिश्रा ने बताया कि आयोजन के दौरान मंच पर मौजूद सांसद गणेश सिंह, सांसद जनार्दन मिश्र, सांसद रीति पाठक, पूर्व मंत्री राजेन्द्र शुक्ल और विधायक सिद्धार्थ कुशवाहा को मंच के माध्यम से मांग पत्र सौंप कर हिन्दी को राष्ट्र भाषा बनाने का मामला लोकसभा और विधानसभा में उठाने का आग्रह किया जाएगा। तीन सत्रों में आयोजित महा अधिवेशन के समापन सत्र में रात 8 बजे से अखिल भारतीय कवि सम्मेलन का आयोजन किया जाएगा। जिसमें देश के कई नामवर रचनाकार काव्य पाठ करेंगे। 

संगीतकार राज आशू भी आएंगे-

राष्ट्रीय साहित्य प्रभा मंच के महाअधिवेशन में फिल्मी दुनिया के ख्यात संगीतकार एवं निर्देशक राज आशू भी शिरकत करेंगे। इस मौके पर जिन बड़े रचनाकारो की पुस्तकों का लोकार्पण किया जाना है उनमें राज आशू के स्व.पिता एवं कालजयी रचनाकर अशोक पांडेय की काव्यकृति 'कहना बहुत जरूरी है भी शामिल है। उल्लेखनीय है, राज आशू (अंकित पांडेय) किसी परिचय के मोहताज नहीं हैं।  
वह बहुत ही कम उम्र में फिल्मी दुनिया में अपनी प्रतिभा का डंका बजा चुके हैं। उन्होंने माई फ्रेंड गणेशा,तूतक-तूतक तूतिया, हम चार,वाईपास रोड,काशी,लखनवी इश्क,पाताल पानी, तेरा इंतजार और कुतुब मीनार जैसी दो दर्जन फिल्मों को संगीत दे चुके हैं।