comScore

© Copyright 2019-20 : Bhaskarhindi.com. All Rights Reserved.

कोयले से सल्फर हटाने के लिए जेपी नहीं गंभीर

कोयले से सल्फर हटाने के लिए जेपी नहीं गंभीर

डिजिटल डेस्क सिंगरौली वैढऩ । केन्द्र सरकार के निर्देशों को धता बता कर कैसे अपनी मनमानी की जाती है? इसका नमूना है, जेपी निगरी सुपर थर्मल पावर प्लांट। सिंगरौली जिले की सीमा में स्थित इस पावर प्लांट को अपनी दोनों यूनिट में कोयले से सल्फर हटाने की यूनिट एफजीडी को जून 2020 तक लगा लेनी थी लेकिन अभी तक इस दिशा में काम कागजों से बाहर नहीं आ पाया है। जेपीवीएल के प्रबंध संचालक इस दिशा में सिर्फ पत्राचार ही कर रहे हैं।
 हाल ही में जेपी निगरी के सीनियर प्रेसीडेंट ऑपरेशन एंड मेंटेनेंस विनोद शर्मा ने एमपीपीसीबी डायरेक्टर को जो पत्र लिखा है, उसमें जून 2024 तक का समय दिए जाने की मांग की है। एफजीडी के प्रति जेपी निगरी की कागजी कार्रवाई खुद यह बयां कर रही है कि वो कोयले से सल्फर हटाने के लिए गंभीर नहीं है।उल्लेखनीय है कि 20 मई 2020 को जेपी निगरी सुपर थर्मल पावर प्लांट जो जयप्रकाश पावर वेंचर्स लिमिटेड का उपक्रम है, के विनोद शर्मा ने डायरेक्टर, मप्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को एक पत्र लिखा। इसमें साफ-साफ कहा गया है कि हमें अपनी पहली यूनिट में 30 जून 2020तक और दूसरी यूनिट में 30 सितंबर 2020 तक एफजीडी लगाने का आदेश था। लेकिन, यह लगाना अभी संभव नहीं है और हम इस काम को क्रमश: जून 2024 और दिसंबर 2024 तक कर पायेंगे। कोयले से सल्फर अलग करने के लिए एफजीडी को केन्द्र सरकार ने सभी पावर प्लांट के लिए अनिवार्य किया है।
इसका मुख्य कारण कोयले के जलने पर सल्फर, सल्फर डाईऑक्साइड के रूप में उत्सर्जित होता है और इसका सबसे ज्यादा दुष्प्रभाव हमारे श्वसन तंत्र पर पड़ता है। केन्द्र के नियमों के मददेनजर हिंडाल्को बरगवां ने अपनी 6 नंबर यूनिट पर एफजीडी लगाने का काम भी शुरू कर दिया है, मगर जेपी निगरी अभी तक कागजों में ही इस दिशा में काम कर रहा है।
एसओटू का दुष्परिणाम
सल्फर डाई ऑक्साइड उत्सर्जन का सबसे ज्यादा दुष्प्रभाव मनुष्य के श्वसन सिस्टम पर पड़ता है। इससे न केवल सांस लेने में दिक्कत होती है बल्कि फेफड़ों पर बुरा प्रभाव पड़ता है। अस्थमा अटैक बढ़ते हैं। हार्ट अटैक के साथ यह आपके सूंघने की क्षमता को भी बुरी तरह प्रभावित करता है।
ग्रीनपीस जारी कर चुका है रिपोर्ट-पर्यावरण संरक्षण से जुड़े एनजीओ ग्रीनपीस ने अपनी एक रिपोर्ट में कहा है कि सल्फर डाईऑक्साइड के उत्सर्जन में हमारा देश टॉप पर पहुंच गया है। उपग्रह के जरिए बनी रिपोर्ट में एसओटू उत्सर्जन के हॉटस्पॉट हमारे यहां 15 प्रतिशत बढ़े हैं। इन हॉटस्पॉट में मध्यप्रदेश का सिंगरौली, तमिलनाडू के नेवेली और चेन्नई, उड़ीसा के तालचेर और झारसुगुड़ा, छत्तीसगढ़ के कोरबा, गुजरात के कच्छ, तेलंगाना के रामागुंडम और महाराष्ट्र में चंद्रपुर और कोराडी शामिल हैं।

कमेंट करें
VTiSA
NEXT STORY

Real Estate: खरीदना चाहते हैं अपने सपनों का घर तो रखे इन बातों का ध्यान, भास्कर प्रॉपर्टी करेगा मदद

Real Estate: खरीदना चाहते हैं अपने सपनों का घर तो रखे इन बातों का ध्यान, भास्कर प्रॉपर्टी करेगा मदद

डिजिटल डेस्क, जबलपुर। किसी के लिए भी प्रॉपर्टी खरीदना जीवन के महत्वपूर्ण कामों में से एक होता है। आप सारी जमा पूंजी और कर्ज लेकर अपने सपनों के घर को खरीदते हैं। इसलिए यह जरूरी है कि इसमें इतनी ही सावधानी बरती जाय जिससे कि आपकी मेहनत की कमाई को कोई चट ना कर सके। प्रॉपर्टी की कोई भी डील करने से पहले पूरा रिसर्च वर्क होना चाहिए। हर कागजात को सावधानी से चेक करने के बाद ही डील पर आगे बढ़ना चाहिए। हालांकि कई बार हमें मालूम नहीं होता कि सही और सटीक जानकारी कहा से मिलेगी। इसमें bhaskarproperty.com आपकी मदद कर सकता  है। 

जानिए भास्कर प्रॉपर्टी के बारे में:
भास्कर प्रॉपर्टी ऑनलाइन रियल एस्टेट स्पेस में तेजी से आगे बढ़ने वाली कंपनी हैं, जो आपके सपनों के घर की तलाश को आसान बनाती है। एक बेहतर अनुभव देने और आपको फर्जी लिस्टिंग और अंतहीन साइट विजिट से मुक्त कराने के मकसद से ही इस प्लेटफॉर्म को डेवलप किया गया है। हमारी बेहतरीन टीम की रिसर्च और मेहनत से हमने कई सारे प्रॉपर्टी से जुड़े रिकॉर्ड को इकट्ठा किया है। आपकी सुविधाओं को ध्यान में रखकर बनाए गए इस प्लेटफॉर्म से आपके समय की भी बचत होगी। यहां आपको सभी रेंज की प्रॉपर्टी लिस्टिंग मिलेगी, खास तौर पर जबलपुर की प्रॉपर्टीज से जुड़ी लिस्टिंग्स। ऐसे में अगर आप जबलपुर में प्रॉपर्टी खरीदने का प्लान बना रहे हैं और सही और सटीक जानकारी चाहते हैं तो भास्कर प्रॉपर्टी की वेबसाइट पर विजिट कर सकते हैं।

ध्यान रखें की प्रॉपर्टी RERA अप्रूव्ड हो 
कोई भी प्रॉपर्टी खरीदने से पहले इस बात का ध्यान रखे कि वो भारतीय रियल एस्टेट इंडस्ट्री के रेगुलेटर RERA से अप्रूव्ड हो। रियल एस्टेट रेगुलेशन एंड डेवेलपमेंट एक्ट, 2016 (RERA) को भारतीय संसद ने पास किया था। RERA का मकसद प्रॉपर्टी खरीदारों के हितों की रक्षा करना और रियल एस्टेट सेक्टर में निवेश को बढ़ावा देना है। राज्य सभा ने RERA को 10 मार्च और लोकसभा ने 15 मार्च, 2016 को किया था। 1 मई, 2016 को यह लागू हो गया। 92 में से 59 सेक्शंस 1 मई, 2016 और बाकी 1 मई, 2017 को अस्तित्व में आए। 6 महीने के भीतर केंद्र व राज्य सरकारों को अपने नियमों को केंद्रीय कानून के तहत नोटिफाई करना था।