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कटनी नदी पुल हादसा - ब्लैक लिस्टेड ठेकेदार को ही सौंप दिया काम ,चीफ इंजीनियर बोले मै नया हूं

कटनी नदी पुल हादसा - ब्लैक लिस्टेड ठेकेदार को ही सौंप दिया काम ,चीफ इंजीनियर बोले मै नया हूं

डिजिटल डेस्क, कटनी। कटनी नदी पुल हादसा शुक्रवार को नये मोड़ पर पहुंच गया। लोक निर्माण विभाग सेतु के चीफ इंजीनियर ए.आर.सिंह के नेतृत्व में भोपाल से आई पांच सदस्यीय टीम ने हादसे की वजह गुणवत्ताहीन कार्य होना बताया। साथ ही यह खुशखबरी भी सुनाई की पुल का काम रोका नहीं जाएगा। दोबारा नया स्लैब डाला जाएगा और काम को तेज गति के साथ आगे बढ़ाया जाएगा। बड़े साहब का चौंकाने वाला फैसला यह रहा कि इस क्षतिग्रस्त पुल के सुधार व आगे का निर्माण कार्य वही ठेकेदार करेगा जिसे 18 घंटे पहले उन्होंने ही ब्लैक लिस्टेड किया था। बड़े साहब से जब इसकी वजह पूछी तो उन्होंने कहा कि ऐसा इसलिए किया जा रहा है ताकि पुल का काम तेजी से हो सके।

एक-एक प्वाइंट पर पहुंचा जांच दल

पुल के  स्लैब का एक हिस्सा भरभराकर गिर जाने और दो जगह चौड़ी दरारें आने के मामले की जांच करने भोपाल व जबलपुर से पांच सदस्यीय टीम कटनी पहुंची। इस दौरान पुल बना रहे ठेकेदार राम सज्जन शुक्ला से भी अफसरों ने चर्चा की।  जांच दल सीधे पुराने पुल पर पहुंचा और स्लैब का वह हिस्सा देखा, जिसमें दरार पड़ी हुई थी। इसके बाद नीचे नदी से एक घंटे तक पुल का निरीक्षण किया। ठेकेदार और विभाग के निलंबित इंजीनियरों से ड्राइंग मंगाई और फिर निर्माणाधीन पुल के ऊपर टीम पहुंची। यहां भी करीब एक घंटे तक अधिकारी रहे और इंची-टेप लेकर निर्माण की नपाई कराई गई तथा रिपोर्ट तैयार की। बाद मेंं चीफ इंजीनियर सिंह और अधीक्षण यंत्री एस.के. बघेल फिर से पुल के उन जगहों पर गए, जहां पर दरारें पड़ी थीं।

अब बंगलूरू से तकनीकी विशेषज्ञों की टीम जांच करने आएगी

सरकारी जांच दल की रवानगी के बाद अब उस तकनीकी विषेषज्ञों की जांच टीम का इंतजार किया जा रहा है जो बंगलूरू से आनी है।  विशेषाज्ञों की यह टीम पुल बना रहे ठेकेदार राम सज्जन शुक्ला की पिछले 60 घंटे की लंबी कवायद के बाद आ रही है। श्री शुक्ला ने दैनिक भास्कर से चर्चा में कहा कि उन्होंने विभागीय अफसरों के सामने यही मुद्दा रखा कि हादसे की वजह जानने के लिए मामले की जांच किसी तकीनकी विशेषज्ञ दल से कराई जानी चाहिए।

सीधी बात / ए.आर. सिंह(चीफ इंजीनियर , लानिवि सेतु)

नया हूं इसलिए पुरानी बातें ज्यादा नहीं मालूम, पर यह साफ है कि गुणवत्ता का पालन नहीं हुआ
सवाल : क्या कमियां पाई गईं?
जवाब : प्रारंभिक रुप से यही कहा जा सकता है कि गुणवत्ता का पालन नहीं हुआ।  
सवाल : ड्राइंग-डिजाइन विभाग को बनानी थी, लेकिन यह काम ठेकेदार से करया गया?
जवाब : ऐसा नहीं है ड्राइंग-डिजाइन का काम ठेकेदार कर सकता है, विभाग इसे अनुमति देता है।  
सवाल : ड्राइंग-डिजाइन बार-बार बदलने की क्या वजह रही?
जवाब : स्पॉन अरेजमेंट में विवाद होने के कारण यह स्थिति बनी।
सवाल : स्लैब में दरार पड़ने का आप किसे जिम्मेदार किसे मानते हैं?
जवाब : प्रारंभिक रुप से यह ठेकेदार की लापरवाही है। विभाग के इंजीनियरों ने भी लापरवाही बरती है। लापरवाही पर ठेकेदार को ब्लैक लिस्टेड और इंजीनियरों को निलंबित कर दिया गया है।

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छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद का खात्मा ठोस रणनीति से संभव - अभय तिवारी

छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद का खात्मा ठोस रणनीति से संभव - अभय तिवारी

डिजिटल डेस्क, भोपाल। 21वीं सदी में भारत की राजनीति में तेजी से बदल रही हैं। देश की राजनीति में युवाओं की बढ़ती रूचि और अपनी मौलिक प्रतिभा से कई आमूलचूल परिवर्तन देखने को मिल रहे हैं। बदलते और सशक्त होते भारत के लिए यह राजनीतिक बदलाव बेहद महत्वपूर्ण साबित होगा ऐसी उम्मीद हैं।

अलबत्ता हमारी खबरों की दुनिया लगातार कई चहरों से निरंतर संवाद करती हैं। जो सियासत में तरह तरह से काम करते हैं। उनको सार्वजनिक जीवन में हमेशा कसौटी पर कसने की कोशिश में मीडिया रहती हैं।

आज हम बात करने वाले हैं मध्यप्रदेश युवा कांग्रेस (सोशल मीडिया) प्रभारी व राष्ट्रीय समन्वयक, भारतीय युवा कांग्रेस अभय तिवारी से जो अपने गृह राज्य छत्तीसगढ़ से जुड़े मुद्दों पर बेबाकी से अपनी राय रखते हैं और छत्तीसगढ़ को बेहतर बनाने के प्रयास के लिए लामबंद हैं।

जैसे क्रिकेट की दुनिया में जो खिलाड़ी बॉलिंग फील्डिंग और बल्लेबाजी में बेहतर होता हैं। उसे ऑलराउंडर कहते हैं अभय तिवारी भी युवा तुर्क होने के साथ साथ अपने संगठन व राजनीती  के ऑल राउंडर हैं। अब आप यूं समझिए कि अभय तिवारी देश और प्रदेश के हर उस मुद्दे प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से लगातार अपना योगदान देते हैं। जिससे प्रदेश और देश में सकारात्मक बदलाव और विकास हो सके।

छत्तीसगढ़ में नक्सल समस्या बहुत पुरानी है. लाल आतंक को खत्म करने के लिए लगातार कोशिशें की जा रही है. बावजूद इसके नक्सल समस्या बरकरार है।  यह भी देखने आया की पूर्व की सरकार की कोशिशों से नक्सलवाद नहीं ख़त्म हुआ परन्तु कांग्रेस पार्टी की भूपेश सरकार के कदम का समर्थन करते हुए भारतीय युवा कांग्रेस के राष्ट्रीय कोऑर्डिनेटर अभय तिवारी ने विश्वास जताया है कि कांग्रेस पार्टी की सरकार एक संवेदनशील सरकार है जो लड़ाई में नहीं विश्वास जीतने में भरोसा करती है।  श्री तिवारी ने आगे कहा कि जितने हमारे फोर्स हैं, उसके 10 प्रतिशत से भी कम नक्सली हैं. उनसे लड़ लेना कोई बड़ी बात नहीं है, लेकिन विश्वास जीतना बहुत कठिन है. हम लोगों ने 2 साल में बहुत विश्वास जीता है और मुख्यमंत्री के दावों पर विश्वास जताया है कि नक्सलवाद को यही सरकार खत्म कर सकती है।  

बरहाल अभय तिवारी छत्तीसगढ़ मुख्यमंत्री बघेल के नक्सलवाद के खात्मे और छत्तीसगढ़ के विकास के संबंध में चलाई जा रही योजनाओं को जन-जन तक पहुंचाने के लिए निरंतर काम कर रहे हैं. ज्ञात हो कि छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री ने यह कई बार कहा है कि अगर हथियार छोड़ते हैं नक्सली तो किसी भी मंच पर बातचीत के लिए तैयार है सरकार। वहीं अभय तिवारी  सर्कार के समर्थन में कहा कि नक्सली भारत के संविधान पर विश्वास करें और हथियार छोड़कर संवैधानिक तरीके से बात करें।  कांग्रेस सरकार संवेदनशीलता का परिचय देते हुए हर संभव नक्सलियों को सामाजिक  देने का प्रयास करेगी।  

बीते 6 महीने से ज्यादा लंबे चल रहे किसान आंदोलन में भी प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से अभय तिवारी की खासी महत्वपूर्ण भूमिका हैं। युवा कांग्रेस के बैनर तले वे लगातार किसानों की मदद के लिए लगे हुए हैं। वहीं मौजूदा वक्त में कोरोना की दूसरी लहर के बाद बिगड़ी स्थितियों में मरीजों को ऑक्सीजन और जरूरी दवाऐं निशुल्क उपलब्ध करवाने से लेकर जरूरतमंद लोगों को राशन की व्यवस्था करना। राजनीति से इतर बेहद जरूरी और मानव जीवन की रक्षा के लिए प्रयासरत हैं।

बहरहाल उम्मीद है कि देश जल्दी करोना से मुक्त होगा और छत्तीसगढ़ जैसा राज्य नक्सलवाद को जड़ से उखाड़ देगा। देश के बाकी संपन्न और विकासशील राज्यों की सूची में जल्द शामिल होगा। लेकिन ऐसा तभी संभव होगा जब अभय तिवारी जैसे युवा और विजनरी नेता निरंतर रणनीति के साथ काम करेंगे तो जल्द ही छत्तीसगढ़ भी देश के संपन्न राज्यों की सूची में शामिल होगा।