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फैसले के अधीन होंगी एजी ऑफिस में लॉ आफीसरों की नियुक्तियाँ

फैसले के अधीन होंगी एजी ऑफिस में लॉ आफीसरों की नियुक्तियाँ

 सरकार को जवाब पेश करने के निर्देश देकर हाईकोर्ट ने दी अंतरिम व्यवस्था
डिजिटल डेस्क जबलपुर ।
हाईकोर्ट ने मंगलवार को कहा है कि महाधिवक्ता कार्यालय में लॉ ऑफीसरों की होने वाली नियुक्तियाँ, इस विचाराधीन याचिका पर होने वाले फैसले के अधीन होंगी। जस्टिस संजय द्विवेदी की एकलपीठ ने सरकार को जवाब पेश करने के निर्देश देते हुए अगली सुनवाई 29 जून 2020 को निर्धारित की है।
अधिवक्ता अभिनव दुबे व अन्य की ओर से दायर याचिका में कहा गया है कि वर्ष 2019 में उनकी नियुक्तियाँ महाधिवक्ता कार्यालय में एक साल के लिए लॉ ऑफीसरों के पदों पर हुई थी। कार्यकाल पूरा होने के बाद उनको एक साल का एक्टेंशन भी दिया गया। इस बीच प्रदेश में सरकार बदलने के बाद बीते 9 अप्रैल को कुछ को छोड़कर अन्य सभी लॉ ऑफीसरों को बिना कोई कारण बताए बर्खास्त कर दिया गया। याचिका में आरोप है कि न्यायिक प्रक्रिया को बिगाडऩे की नीयत से यह आदेश जारी किया गया, जो अवैधानिक है।
मामले पर मंगलवार को आगे हुई सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अजय मिश्रा व अधिवक्ता हिमान्शु मिश्रा और राज्य सरकार की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता आरके वर्मा व उप महाधिवक्ता स्वप्निल गांगुली ने पक्ष रखा। याचिकाकर्ताओं की ओर से कहा गया कि इस याचिका में चाही गई अंतरिम राहत पर विचार किया जाए, क्योंकि यदि सरकार ने नए शासकीय अधिवक्ताओं की नियुक्तियाँ कीं तो यह याचिका सुनवाई योग्य ही नहीं रह जाएगी। दलीलों पर गौर करने के बाद अदालत ने सरकार को जवाब पेश करने के निर्देश देकर अंतरिम आदेश पारित किए।
पेश न हुई केस डायरी तो विवेचक पर होगी कार्रवाई
गढ़ा थाना पुलिस द्वारा एनडीपीएस के तहत गिरफ्तार किए गए अरुण सक्सेना की जमानत अर्जी पर जस्टिस विजय कुमार शुक्ला की एकलपीठ ने कड़ा रुख अपनाया है। मामले की सुनवाई 18 जून को निर्धारित करते हुए अदालत ने कहा है कि अगली पेशी पर यदि केस डायरी पेश न की गई, तो संबंधित विवेचना अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। आरोपी की ओर से अधिवक्ता एसके जैन पैरवी कर रहे हैं।
 

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