दैनिक भास्कर हिंदी: फर्जी मतदान की शिकायत पर जिला न्यायालय जबलपुर में फिर से होगी पोलिंग

January 18th, 2020

स्टेट बार काउंसिल के चुनाव में 80 फीसदी मतदान
डिजिटल डेस्क जबलपुर ।
मप्र में वकीलों की शीर्ष संस्था स्टेट बार काउंसिल की नई कार्यकारिणी के 25 नए सदस्यों के चुनाव के लिए शुक्रवार को पूरे प्रदेश में करीब 80 फीसदी मतदान हुआ। सिर्फ जबलपुर के जिला अदालत परिसर में फर्जी मतदान की शिकायत पर विशेष समिति के अध्यक्ष व महाधिवक्ता शशांक शेखर ने वहां जाकर खुद सत्यापन में गड़बडिय़ां देखीं। इस पर उन्होंने फिर से चुनाव कराने के निर्देश दिए। सिर्फ एक स्थान को छोड़कर अन्य स्थानों पर मतदान शांतिपूर्ण रहा। अब जबलपुर की जिला अदालत में रीपोलिंग कब होगी, इसका फैसला अगले कुछ दिनों में होगा।
बार काउंसिल के सचिव और निर्वाचन अधिकारी प्रशांत दुबे ने बताया कि पूरे प्रदेश में शुक्रवार को हुए मतदान में 145 उम्मीदवार खड़े थे, जिनमें से
25 सदस्यों की नई कार्यकारिणी का चुनाव प्रदेश के 56 हजार 758 अधिवक्ताओं को करना था। उन्होंने बताया कि निष्पक्ष मतदान के दौरान विशेष समिति के अध्यक्ष व महाधिवक्ता शशांक शेखर और पर्यवेक्षक जस्टिस केके त्रिवेदी व जस्टिस एचपी सिंह द्वारा लगातार मॉनीटरिंग की गई। सुबह दस बजे शुरु हुई वोटिंग: जबलपुर के 5710 मतदाता अधिवक्ताओं के लिए हाईकोर्ट बार के सिल्वर जुबली हॉल और जिला न्यायालय में बने बहुउद्देशीय भवन में सुबह दस बजे से वोटिंग शुरु हो गई। प्रथम दो हजार के सीरियल नंबर वाले अधिवक्ताओं को सिल्वर जुबली हॉल में और शेष 3710 सीरियल वाले अधिवक्ताओं को जिला न्यायालय परिसर में वोटिंग करना थी।
चाक चौबन्द थे इंतजाम: हाईकोर्ट और जिला न्यायालय परिसर में सुरक्षा के चाक चौबन्द इंतजाम किए गए थे। मुख्य मार्ग से ही वाहनों का आना जाना सुबह से ही प्रतिबंधित कर दिया गया था। दोनों मतदान केन्द्रों के बाहर उम्मीदवारों व उनके समर्थक वोट देने आए वकीलों को अपने समर्थन में लेने प्रयासरत रहे। झड़प के बाद रुकी वोटिंग: दोनों ही मतदान केन्द्रों में जाने और आने के लिए अलग-अलग रास्ते बनाए गए थे। दोपहर करीब साढ़े 12 बजे जिला न्यायालय परिसर में अंदर जाने वाले रास्ते से ही बाहर आ रहे एक अधिवक्ता को वहां खड़े पुलिस कर्मियों ने रोका। इसी बात को लेकर वकीलों और पुलिस के बीच झड़प और मारपीट भी हुई, जिसमें एक पुलिस कर्मी घायल हो गया। इस विवाद के चलते करीब आधे घंटे तक जिला न्यायालय में पोलिंग बंद रहीं। गुस्साए वकील ओमती थाने में शिकायत करने पहुंचे और इसी बीच पर्यवेक्षेक जस्टिस एचपी सिंह और बार काउंसिल के सचिव प्रशान्त दुबे ने जिला न्यायालय पहुंचकर स्थिति को सामान्य कराकर फिर से वोटिंग शुरु कराई गई।
महाधिवक्ता ने खुद देखी सत्यापन की गड़बड़ी
 जिला न्यायालय परिसर में वोटिंग के दौरान हो रहीं गड़बडिय़ों की शिकायतें मिलने पर शाम करीब चार बजे महाधिवक्ता शशांक शेखर वहां पहुंचे। करीब 15 मिनिट तक उन्होंने वहां खड़े होकर हकीकत का पता लगाया और जैसे ही उन्होंने सत्यापन की गड़बडिय़ां पकड़ीं, उन्होंने फौरन मतदान को रुकवाया। उसी दौरान एक अफवाह यह भी फैली की मतपत्र कम होने के कारण रीपोलिंग का फैसला लिया गया। हालांकि खुद महाधिवक्ता ने स्पष्ट किया कि मतपत्र में कोई कमी नहीं थी, बल्कि वहां पर सत्यापन की गड़बडिय़ों के कारण ऐसा फैसला लिया गया है।