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तनाव -4 माह में 52 ने मौत को लगाया गले ,लॉक डाउन में बढ़े आत्महत्या के मामले

तनाव -4 माह में 52 ने मौत को लगाया गले ,लॉक डाउन में बढ़े आत्महत्या के मामले

डिजिटल डेस्क कटनी । कोरोना वायरस संक्रमण रोकने मार्च माह की 25 तारीख से घोषित लाकडाउन के कारण के लोग घरों में कैद रहे। 21 दिन लॉकडाउन-01 में तो काफी कुछ ठीक रहा पर जैसे-जैसे लॉकडाउन में वृद्धि होती गई बेराजगारी, आर्थिक तंगी एवं अन्य कारणों से लोगों में तनाव बढऩे लगा। पारिवारिक विवाद, आपसी विवादों में भी वृद्धि होने लगी। स्थिति ऐसी भी बनने लगीं कि लोग आत्मघाती कदम उठाने लगे। पिछले चार माह में ही जिले में आधा सैकड़ा से अधिक लोग आत्मघाती कदम उठा चुके हैं। इनमें महिलाओं, युवकों एवं अधेड़ उम्र के लोगों की संख्या अधिक है। हालांकि पुलिस की जांच में इन आत्महत्याओं का अब तक कोई ठोस कारण सामने नहीं आया है और न ही पुलिस ने गहराई से जांच करने की आवश्यकता समझी। मार्च से 20 जून तक जिले में 52 लोगों ने आत्मघाती कदम उठाया है।
कपड़ा व्यवसायी फंदे पर झूला
बाकल थाना क्षेत्र के इमलिया में आशू राय नामक 22 वर्षीय युवक पिछले दिनों फांसी के फंदे पर झूल गया। गांव में उसकी कपड़े की दुकान थी। लॉक डाउन के कारण तीन माह से व्यवसाय ठप था। पुलिस के अनुसार पिता ने बयान में पड़ोसी से विवाद की बात कही है। इसी तरह अप्रेल माह में बाकल थाना क्षेत्र के पटीकला में 17 साल का किशोर भी फंदे पर लटक गया था। इस सुसाइड केस पर थाना प्रभारी रामबोध मिश्रा का कहना था कि वह मानसिक रूप से असंतुलित था।
फांसी, जहर, अग्नि स्नान का अपनाया तरीका
पिछले चार माह में हुए सुसाइड केस में ज्यादातर मामले फांसी में झूलने के हैं। जहर खाकर एवं अग्नि स्नान करके की लोगों ने अपनी जीवन लीला समाप्त की। पुलिस की प्रारंभिक जांच में अधिकांश मामले में आत्महत्या के कारणों को अज्ञात ही बताया गया और घरेलू विवाद, बीमारी कारण बताकर ऐसे मामलों की फाइल बंद कर दी। पुलिस ने आत्मघाती कदम उठाने वालों के आस-पड़ोस के लोग भी कोई ठोस कारण नहीं बता पाए।
इनका कहना है
  क्राइम मीटिंग में घरेलू एवं आपसी विवाद के प्रकरणों की भी समीक्षा की थी। सभी थाना प्रभारियों को विवाद की सूचना मिलने पर 100 डॉयल को तत्काल रिस्पांस करने के निर्देश दिए थे ताकि ऐसी घटनाओं पर अंकुश लगाया जा सके।
-ललित शाक्यवार, एसपी

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