Pandhurna new: ‘मराठी लोकधारा’ के समापन पर महाराष्ट्र की लोक संस्कृति की रंगारंग छटा

‘मराठी लोकधारा’ के समापन पर महाराष्ट्र की लोक संस्कृति की रंगारंग छटा
‘मराठी पाऊल पडते पुढे’ में लावणी, गोंधळ, कोळी, पोवाड़ा और तमाशा ने बांधा समां

डिजिटल न्यूज़ पांढुर्णा

मराठी साहित्य अकादमी, मप्र संस्कृति परिषद एवं संस्कृति विभाग द्वारा आयोजित दो दिवसीय ‘मराठी लोकधारा’ कार्यक्रम का रविवार को एमपीएल ग्राउंड पांढुर्णा में रंगारंग प्रस्तुतियों के साथ समापन हुआ। दूसरे दिन ‘मराठी पाऊल पडते पुढे’ कार्यक्रम में महाराष्ट्र की समृद्ध लोक संस्कृति, लोक नृत्य और लोक गायन की प्रस्तुतियों ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। मुंबई से आए वरिष्ठ कला दल ने निर्देशक एवं निर्माता उदय साटम के निर्देशन में महाराष्ट्र की लोक परंपराओं को गीत, संगीत और नृत्य के माध्यम से मंच पर जीवंत किया।

कार्यक्रम में बीजेपी प्रदेश किसान मोर्चा कोषाध्यक्ष संदीप रघुवंशी सहित पत्रकार संघ से वरिष्ठ पत्रकार उमेश पाल, राम ठाकरे, राधेश्याम बेलखड़े, गुड्डू कावले, देवेंद्र खुरसंगे, प्रमोद कोल्हे, सुनील कवड़े और गौरव बावनकर प्रमुख रूप से मौजूद रहे। अतिथियों का स्वागत मराठी साहित्य अकादमी के निदेशक संतोष गोडबोले, दीपक गुप्ता, तेली समाज अध्यक्ष भूषण केवटे एवं महिला अध्यक्ष देविका भांगे ने पुष्पगुच्छ देकर किया।

लावणी से तमाशा तक दिखीं लोक विधाएं

‘मराठी पाऊल पडते पुढे’ में लावणी, गोंधळ, धनगरी गजा, कोळी, पोवाड़ा, वासुदेव, वाघ्या-मुरली, गौळण, बतावणी, तमाशा, दशावतार, अभंग और जोगवा सहित महाराष्ट्र की विभिन्न पारंपरिक लोक विधाओं की प्रस्तुतियां हुईं। कलाकारों की पारंपरिक वेशभूषा, लोक वाद्य और संगीत ने पूरे परिसर को महाराष्ट्र की लोक संस्कृति के रंग में रंग दिया। कलाकारों के साथ युवाओं और मातृशक्ति ने भी नृत्य एवं गायन में सहभागिता कर माहौल को उत्सवमय बना दिया।

नई पीढ़ी को संस्कृति से जोड़ने का प्रयास

मराठी साहित्य अकादमी के निदेशक संतोष गोडबोले ने कहा कि लोक संस्कृति किसी भी समाज की जीवंत पहचान होती है। ‘मराठी लोकधारा’ जैसे आयोजनों के माध्यम से महाराष्ट्र की पारंपरिक लोक कलाओं को मध्यप्रदेश के जनमानस तक पहुंचाने और नई पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक विरासत से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने कार्यक्रम की सफलता के लिए कलाकारों, सहयोगी संस्थाओं, जनप्रतिनिधियों, अतिथियों और पांढुर्णा के नागरिकों का आभार व्यक्त किया।

तेली समाज संगठन के अध्यक्ष भूषण केवटे ने अकादमी द्वारा पांढुर्णा में किए गए आयोजन की सराहना करते हुए भविष्य में भी ऐसे सांस्कृतिक कार्यक्रम निरंतर आयोजित करने का आग्रह किया। दो दिवसीय आयोजन में दर्शकों को महाराष्ट्र की विविध लोक परंपराओं और लोक कलाओं को करीब से देखने-समझने का अवसर मिला।

Created On :   5 Oct 2026 5:14 PM IST

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