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Panna News: मध्य प्रदेश में टॉप 6 जिलों में शामिल हुआ पन्ना जिला

डिजिटल डेस्क,पन्ना। पन्ना जिला अपनी ऐतिहासिक और धार्मिक धरोहरों के लिए प्रसिद्ध है । भारत सरकार के महत्वाकांक्षी कार्यक्रम ज्ञान भारतम से पुनः प्रमाणित हो गया। जिले के प्राचीन मंदिरों और निजी संग्रहों से 64 हजार से अधिक हस्तलिखित पांडुलिपियां न केवल प्राप्त हुई है, बल्कि उन्हें सफलता पूर्वक ज्ञान भारतम ऐप पर सर्वे में अपलोड भी किया गया है। और इस कार्यक्रम में पन्ना जिला पूरे मध्य प्रदेश में छठवें स्थान पर आया है। और सागर संभाग के सभी छह जिलों में शीर्ष स्थान पर है ।
गौरतलब है कि भारत सरकार के ' ज्ञान भारतम ' कार्यक्रम के अंतर्गत पूरे देश में प्राचीन पांडुलिपियों को खोजने का कार्य किया जा रहा है, ताकि इन्हें विशेषज्ञों द्वारा सुरक्षित और संरक्षित किया जा सके। साथ ही इन पांडुलिपियों का डिजिटाईजेशन कर शोधार्थियों, अध्ययनकर्ताओं आदि को सहजता से उपलब्ध कराया जा सके।
इसी कार्यक्रम के अंतर्गत पन्ना कलेक्टर ऊषा परमार द्वारा एक समिति का निर्माण किया गया था, जिसका नोडल अधिकारी जिला पंचायत सीईओ उमराव सिंह मरावी को बनाया गया था।
कलेक्टर पन्ना और जिला पंचायत सीईओ के कुशल मार्गदर्शन में समिति के सदस्य आबकारी उपनिरीक्षक मुकेश पाण्डेय और धर्मार्थ शाखा प्रभारी मनोज पाण्डेय द्वारा विशेष प्रयास कर पन्ना जिले में विभिन्न मंदिरों और निजी संग्रहों से प्राचीन हस्तलिखित पांडुलिपियां खोजी गई और उन्हें ज्ञान भारतम मोबाइल एप पर स्कैन कर सर्वे पूरा किया गया ।
आबकारी उपनिरीक्षक मुकेश पाण्डेय ने बताया कि आरंभ में पन्ना में इस कार्यक्रम की रफ्तार बहुत धीमी थी । आरंभ में पन्ना राजपरिवार और अजयगढ़ राजपरिवार से संपर्क किया गया। क्योंकि उनके पास प्राचीन हस्तलिखित पांडुलिपियां मिलने की अधिक संभावना थी, परंतु दोनों राजपरिवार से कोई भी हस्तलिखित पांडुलिपि प्राप्त नहीं हो सकी।
श्री प्राणनाथ जी मंदिर पन्ना से बहुत अधिक हस्तलिखित पांडुलिपियां प्राप्त हुई। यहाँ पर धार्मिक और आध्यात्मिक पांडुलियों के अलावा तत्कालीन शासकों के पत्र, जन्मकुण्डलियां, साहित्यिक ग्रन्थ आदि की पांडुलिपियां प्राप्त हुई। प्राणनाथ जी मंदिर से न केवल हिन्दी और संस्कृत भाषा में बल्कि फारसी, गुजराती, सिंधी और पंजाबी भाषा में भी पांडुलिपियां प्राप्त हुई है ।
पन्ना में बहुत सारे प्राचीन हिंदू मंदिर है, मगर सिर्फ श्री रामजानकी मंदिर से ही प्राचीन हस्तलिखित पांडुलिपियां प्राप्त हुई है। जो कि पन्ना राजपरिवार की राजमाता दिलहर कुमारी जी द्वारा मंदिर के पुस्तकालय को दी गई थी। इन पांडुलियों में अधिकांश की स्थिति जर्जर मिली है। यहां से धार्मिक के साथ साहित्यिक पांडुलिपियां भी मिली है।
दिगम्बर जैन मंदिर अजयगढ़, बड़ा जैन मन्दिर पन्ना, जैन मंदिर बड़ा बाजार पन्ना और जैन मंदिर ककरहटी से अधिक मात्रा में प्राचीन जैन धार्मिक ग्रंथों की हस्तलिखित पांडुलिपियां प्राप्त हुई। अधिकांश पांडुलिपियां जैन धार्मिक ग्रंथों की हस्तलिखित प्रतिलिपियां है, जो संस्कृत, प्राकृत और तत्कालीन हिंदी भाषा में है।
इसके आलावा निजी संग्रहों में अजयगढ़ निवासी श्री राम पाठक, विनय द्विवेदी, बमरी (देवेन्द्र नगर) के सवाई जयंत सिंह जूदेव, पन्ना से किशोरगंज वार्ड के संदीप गुलशन श्रीवास्तव, रानीगंज से देवेंद्र अवस्थी से प्राचीन हस्तलिखित पांडुलिपियां प्राप्त हुई ।
रोचक और महत्वपूर्ण पांडुलिपियां
पन्ना जिले में पांडुलिपियों के सर्वे के दौरान कई रोचक और महत्वपूर्ण पांडुलिपियां प्रकाश में आई है । प्राणनाथ जी मंदिर में तत्कालीन शासकों द्वारा लिखे गए कई पत्र मिले है।
जैसे एक पत्र में शाहगढ़ के महाराजा बखत बली सिंह द्वारा लिखा गया पत्र जिसमें सुंदर साथ की यात्रा के दौरान उनके रुकने, खाने आदि व्यवस्था करने के निर्देश दिए गए है। प्राणनाथ जी मंदिर में ही 10 और 20 फुट से अधिक लंबाई वाले पत्र भी प्राप्त हुए है।
साहित्यिक ग्रंथों में महाकवि केशवदास कृत कवि प्रिया, रसिक प्रिया, महाकवि माघ कृत ऋतु वर्णन, जयदेव कृत गीत गोविंद, रीवा महाराज द्वारा लिखित हस्तलिखित बघेली भाषा का लिखा ग्रन्थ प्राप्त हुआ। श्रीराम पाठक अजयगढ़ के पास से आयुर्वेद के महत्वपूर्ण पांडुलिपियां प्राप्त हुई।
इस कार्य में सहयोग देने वालों में अजयगढ़ पीयूष शुक्ला, ब्रजेन्द्र तिवारी, कोमल चंद जैन, पार्श्वनाथ जैन, पन्ना में आशीष शर्मा, नीरज शर्मा, राजेश शर्मा, नीरज जैन, नरेंद्र जैन, कुंज बिहारी शर्मा, राजेश गौतम आदि शामिल रहे ।
Created On :   2 July 2026 2:22 PM IST












