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Rewa news: राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग नई दिल्ली का रीवा कलेक्टर को कड़ा नोटिस

डिजिटल न्यूज़ रीवा
विगत वर्ष 28 सितंबर 2025 को रीवा जिले के सिरमौर नगर से मानवता को शर्मसार कर देने वाला और प्रशासनिक संवेदनहीनता का एक अत्यंत हैरान कर देने वाला मामला सामने आया था। सड़क हादसे में अपनी जान गंवाने वाले नगर परिषद सिरमौर के एक कर्मचारी गौरव पाण्डेय के शव को एम्बुलेंस या शव वाहन देने के बजाय कचरा ढोने वाले ट्रैक्टर/गाड़ी में भरकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया। इस अमानवीय घटना और मानवाधिकारों के खुले उल्लंघन पर राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग नई दिल्ली ने कड़ा संज्ञान लेते हुए रीवा कलेक्टर एवं जिला दंडाधिकारी को नोटिस थमा दिया है। बताया गया है कि सिरमौर निवासी और नगर परिषद सिरमौर के कर्मचारी गौरव पांडे अपनी बाइक से जा रहे थे। सामने से आ रही दूसरी बाइक से टक्कर होने के बाद गौरव पांडे सड़क पर गिर पड़े तभी पीछे से आ रहे एक तेज रफ्तार ट्रक ने उनके सिर को कुचल दिया जिससे उनकी मौके पर ही दर्दनाक मौत हो गई। इस हादसे में दूसरी बाइक पर सवार सिरमौर के पटवारी गंभीर रूप से घायल हो गए, जिन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया। दुर्घटना के बाद क्षत-विक्षत अवस्था में पड़े कर्मचारी के शव को सम्मानपूर्वक ले जाने के लिए शव वाहन या मुक्ति वाहन की व्यवस्था करने के बजाय, नगर पालिका की कचरा ढोने वाली गाड़ी/ट्रैक्टर में रखकर पोस्टमार्टम के लिए अस्पताल भिजवाया गया। सरकारी पैसों और बजट के बावजूद एक मृत कर्मचारी को अंतिम क्षणों में भी न्यूनतम सम्मान न मिलना स्थानीय निवासियों, परिजनों और आम जनता में भारी आक्रोश का कारण बना।
एक्टिविस्ट सर्वेश कुमार सोनी ने राष्ट्रीय स्तर पर उठाई आवाज
सिरमौर निवासी सर्वेश कुमार सोनी ने इस पूरी घटना की तस्वीरें, समाचार पत्र में प्रकाशित कतरनें और सोशल मीडिया ट्वीट्स/स्क्रीनशॉट्स एकत्र किए। इसके बाद 29 सितंबर 2025 को सर्वेश सोनी ने राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग के अध्यक्ष, मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री, मुख्य सचिव तथा अन्य उच्च अधिकारियों को ईमेल भेजकर दोषियों पर कठोर कार्रवाई और सिरमौर में स्थायी शव वाहन उपलब्ध कराने की मांग की। यह मामला प्रकरण क्रमांक 510/12/36/2026 आयोग के समक्ष पेश हुआ। शिकायत को आयोग के समक्ष प्रस्तुत किया गया। राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग नई दिल्ली की खंडपीठ, जिसकी अध्यक्षता सदस्य प्रियंक कानूनगो ने की। उन्होंने मामले को प्रथम दृष्टया मृतक के मानवाधिकारों एवं मानवीय गरिमा का गंभीर उल्लंघन माना। मानवाधिकार संरक्षण अधिनियम, 1993 की धारा 12 के तहत संज्ञान लेते हुए आयोग के सहायक रजिस्ट्रार (विधि) बृजवीर सिंह द्वारा जिलाधिकारी (कलेक्टर), रीवा को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया। रीवा कलेक्टर को निर्देश दिया गया है कि वे मामले की निष्पक्ष जांच कराएं और पत्र प्राप्ति के 4 सप्ताह के भीतर कृत कार्रवाई प्रतिवेदन अर्थात एटीआर रिपोर्ट आयोग के समक्ष प्रस्तुत करें। आयोग ने स्पष्ट किया है कि कोई भी पत्राचार केवल राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग पोर्टल के माध्यम से अधिकृत आईडी से ही भेजा जाए। ईमेल से भेजे गए जवाब स्वीकार नहीं किए जाएंगे।
Created On :   2 Oct 2026 4:55 PM IST












