- Home
- /
- राज्य
- /
- मध्य प्रदेश
- /
- रीवा
- /
- रीवा से भोपाल के स्वर्ग धाम आश्रम...
Rewa news: रीवा से भोपाल के स्वर्ग धाम आश्रम तक पीठाधीश्वर राधेश्याम महाराज का आध्यात्मिक सफर

डिजिटल न्यूज़ रीवा
विंध्य की धरा हमेशा से संतों और मनीषियों की तपोभूमि रही है। इसी पावन माटी के रीवा जिले के अजगरहा ग्राम में जन्मे राधेश्याम महाराज आज देश के आध्यात्मिक पटल पर एक मार्गदर्शक के रूप में स्थापित हैं। रीवा से शुरू हुआ उनका सफर आज राजधानी भोपाल के प्रसिद्ध स्वर्ग धाम आश्रम के पीठाधीश्वर के रूप में निरंतर मानवता को सन्मार्ग दिखा रहा है।राधेश्याम महाराज का जन्म सन 1942 में पौष मास कृष्ण पक्ष की सप्तमी तिथि को मध्याह्न 12 बजे अजगरहा में हुआ था। उनके जन्म की कथा भी बेहद अलौकिक है। उनके माता-पिता, मनवती देवी और भैयालाल पांडेय ने पुत्र प्राप्ति की अभिलाषा से सुदूर दक्षिण स्थित रामेश्वरम धाम की यात्रा कर कठिन अनुष्ठान किया था। इसी शिव कृपा के फलस्वरूप महाराज जी का प्राकट्य हुआ। उनके जन्म के समय ही कुलगुरु ने उनका ललाट देखकर यह भविष्यवाणी कर दी थी कि यह बालक सांसारिक बंधनों से परे रहकर सदैव प्रभु भक्ति में लीन रहेगा।
ऐसे शुरू हुई आध्यात्मिक यात्रा
बताया जाता है कि बचपन से ही महाराज जी के भीतर की आध्यात्मिक ज्योति उन्हें संसार से दूर खींचती रही। मां के स्नेह के कारण उन्होंने दो बार चित्रकूट जाने का विचार बदला, लेकिन तीसरी बार वे मोह-माया के समस्त बंधनों को तोड़कर अपनी अंतिम यात्रा पर निकल पड़े। वे सीधी जिले के विख्यात संत गोपालदास महाराज के आश्रम पहुंचे। वहां वे वाद्य यंत्रों की थाप पर हरि कीर्तन और भजनों के माध्यम से भक्तों को मंत्रमुग्ध करने लगे। देखते ही देखते उनकी ख्याति चारों ओर फैल गई और हर धार्मिक आयोजन में उन्हें प्रवचन के लिए आमंत्रित किया जाने लगा।
'राधा नाम' के प्रचार से मिला 'राधेश्याम महाराज' का नाम
बताया गया कि करीब 50 वर्ष पहले, जब वे गोपालदास आश्रम में आयोजित होने वाले मानस सम्मेलनों के मुख्य प्रवचनकर्ता हुआ करते थे, तब उन्होंने 'राधा नाम' की महिमा का व्यापक प्रचार-प्रसार किया। राधा नाम के प्रति उनके इसी अनन्य अनुराग के कारण भक्तगण उन्हें राधेश्याम महाराज' के नाम से संबोधित करने लगे। महाराज जी ने केवल विंध्य ही नहीं, बल्कि देश के बड़े महानगरों और सांस्कृतिक केंद्रों जैसे दिल्ली, मुंबई, भोपाल, जबलपुर, प्रयागराज, चित्रकूट, बनारस, अयोध्या धाम और रतलाम में विशाल रामायण मेलों और मानस प्रवचनों का आयोजन किया। उनकी इसी आध्यात्मिक प्रखरता का परिणाम था कि जब वे राजधानी भोपाल में रामायण प्रवचन के लिए आमंत्रित किए गए, तो उनके वचनों से प्रभावित होकर स्वर्ग धाम आश्रम के संचालक मंडल ने सर्वसम्मति से उन्हें आश्रम का पीठाधीश्वर नियुक्त कर दिया।
Created On :   9 Oct 2026 3:13 PM IST












