सीधी न्यूज: खेतों में पसरी तबाही,सर्वे का इंतजार कर रहे किसान

खेतों में पसरी तबाही,सर्वे का इंतजार कर रहे किसान
बेमौसम बारिश और अर्णव तूफान ने बिगाड़ा धान की फसल, 50 से अधिक गांवों में नुकसान,

डिजिटल डेस्क सीधी |खेतों में धान की बालियां पककर कटाई का इंतजार कर रही थीं, किसानों की निगाहें अब फसल को घर लाने पर टिकी थीं। लेकिन मौसम के अचानक बदले मिजाज ने उनकी कई महीनों की मेहनत पर पानी फेर दिया। कहीं धान की फसल जमीन पर बिछ गई है तो कहीं खेतों में भरे पानी के बीच बालियां सड़ने की लगी है। अर्णव तूफान के साथ हुई बेमौसम बारिश ने जिले के किसानों की उम्मीदों को बड़ा झटका दिया है। किसानों का दावा है कि जिले के 50 से अधिक गांवों में धान की फसल को नुकसान पहुंचा है। अब खेतों में फसल से ज्यादा किसानों की नजर प्रशासनिक सर्वे और मुआवजे पर टिकी है।

29, 30 और 31 अक्टूबर को हुई बारिश के बाद खेतों की तस्वीर बदल गई। कटाई की तैयारी कर रहे किसानों को अचानक मौसम की मार झेलनी पड़ी। कई खेतों में धान की फसल आड़ी होकर जमीन से लग गई है। जलभराव ने हालात और मुश्किल कर दिए हैं। किसानों का कहना है कि बीज, खाद, दवा और मजदूरी में लगाई गई पूंजी अब निकालना मुश्किल है ऐसे में यदि समय पर राहत नहीं मिली तो अगली फसल की तैयारी भी प्रभावित होगी।

1.20 लाख हेक्टेयर से अधिक में धान की बोवई

इस वर्ष जिले में 1 लाख 20 हजार 700 हेक्टेयर से अधिक रकबे में धान की बोवनी की गई है। जहां बेमौसम बारिश और आंधी-तूफान से कुछ फसलों को नुकसान हुआ है अभी फसल पकने की उम्मीद बनी हुई है। नुकसान का वास्तविक आकलन सर्वे के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।

खेतों तक पहुंचे राजस्व अमला

किसानों ने राजस्व विभाग से खेतों का मौके पर पहुंचकर सर्वे कराने और वास्तविक नुकसान दर्ज करने की मांग की है। उनका कहना है कि नुकसान का आकलन केवल कागजों में नहीं, बल्कि खेतों की जमीनी स्थिति देखकर होना चाहिए। प्रभावित किसानों को उचित मुआवजा मिले,

सोनवर्षा के किसान अजीत सिंह चौहान बताते हैं कि फसल काटने की तैयारी चल रही थी, लेकिन अचानक मौसम बदलने से खेतों में धान गिर गई। उनके मुताबिक, खेती में लगाई गई पूंजी डूब सकती है

मौसम की मार के बाद अब प्रशासन की परीक्षा

धान की फसल पर आई इस आफत ने एक बार फिर खेती की जोखिम भरी स्थिति उजागर कर दी है। किसान मौसम की मार तो झेल चुके हैं, अब उन्हें यह देखना है कि सरकारी तंत्र उनकी क्षति को कितनी गंभीरता से लेता है। सबसे बड़ा सवाल यही है कि 50 से अधिक गांवों में नुकसान के दावों के बीच सर्वे कब शुरू होगा और प्रभावित किसानों को राहत कब तक मिलेगी।


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