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दिल्ली : कानून का चाबुक चला तो दमे के मरीज-बुजुर्ग भी रौशन कर लेंगे दिवाली (आईएएनएस एक्सक्लूसिव)

October 24th, 2019 09:00 IST
 दिल्ली : कानून का चाबुक चला तो दमे के मरीज-बुजुर्ग भी रौशन कर लेंगे दिवाली (आईएएनएस एक्सक्लूसिव)

हाईलाइट

  • दिल्ली : कानून का चाबुक चला तो दमे के मरीज-बुजुर्ग भी रौशन कर लेंगे दिवाली (आईएएनएस एक्सक्लूसिव)

नई दिल्ली, 24 अक्टूबर (आईएएनएस)। कानून और पुलिस का चाबुक अगर कायदे से चल गया तो राष्ट्रीय राजधानी में रह रहे दमे के मरीज और बुजुर्ग भी अपनी यह दीवाली खुशी-खुशी रोशन कर सकेंगे। यह पहला मौका है जब देश की राजधानी दिल्ली में पुलिस ने बारूद वाले पटाखों की एक भी दुकान का लाइसेंस जारी नहीं किया है। 97 में से जो 53 पटाखा लाइसेंस जारी किए गए हैं, वे सब ग्रीन-पटाखों के लाइसेंस हैं। इन ग्रीन पटाखों से प्रदूषण की संभावना तकरीबन न के बराबर रहती है।

दिल्ली पुलिस की लाइसेंसिंग शाखा के संयुक्त आयुक्त सुभाशीष चौधरी ने बुधवार को आईएएनएस से बातचीत में कहा, इस बार दिल्ली के सभी 15 जिलों में से 97 पटाखा विक्रेताओं ने दीवाली के मौके पर पटाखे बेचने की अनुमति (लाइसेंस) मांगी थी। इनमें से फिलहाल बुधवार (23 अक्टूबर 2019) तक 53 आवेदकों को ही पटाखे बेचने के लाइसेंस जारी हो सके हैं। जारी सभी लाइसेंस ग्रीन-पटाखे बेचने की शर्त के साथ ही जारी किए गए हैं, जो अस्थाई हैं।

चौधरी ने आगे कहा, इसके अलावा दिल्ली में 14 ऐसे भी पटाखा विक्रेता हैं, जिन्हें पहले से ही स्थाई लाइसेंस मिले हुए हैं। स्थाई लाइसेंस पांच साल की अवधि के लिए जारी होते हैं, जबकि अस्थाई लाइसेंस 10-15 दिनों के लिए। लाइसेंस धारक स्थाई हो अथवा अस्थाई, सबको दिल्ली की सीमा में ग्रीन-पटाखे ही बेचने होंगे। कोई भी लाइसेंसधारक बारूदी पटाखे नहीं बेच सकता।

दिल्ली पुलिस लाइसेंस विभाग के आंकड़ों के मुताबिक, इस साल शाखा को प्राप्त 97 आवेदन में से सबसे ज्यादा लाइसेंस (21) पूर्वी दिल्ली जिला (प्रीत विहार, आनंद विहार, लक्ष्मी नगर, शकरपुर, पांडव नगर, गणेश नगर आदि) में जारी किए गए हैं। 17 पटाखा लाइसेंस लेकर दूसरे नंबर पर उत्तरी दिल्ली (सदर बाजार, सिविल लाइंस, तिमारपुर, कोतवाली, चांदनी चौक आदि इलाके) जिला रहा है। जबकि 13 लाइसेंस के साथ पश्चिमी जिला (राजा गार्डन, तिलक नगर, राजौरी गार्डन, तिलक नगर, रघुवीर नगर, कीर्ति नगर आदि) तीसरे स्थान पर है। सबसे कम पटाखा लाइसेंस (10) बाहरी-उत्तरी दिल्ली जिले को जारी किए गए हैं।

इन पटाखा लाइसेंस को जारी करने की प्रक्रिया भी बेहद जटिल है। आवेदनकर्ता इलाके के एसएचओ के जरिए आवेदन करता है। इन आवेदन पर जिला पुलिस उपायुक्त कार्यालय (डीसीपी ऑफिस) अपनी मुहर लगाता है। डीसीपी कार्यालय से रिपोर्ट ओके होने के बाद आवेदनों को दिल्ली दमकल सेवा मुख्यालय भेजा जाता है। दिल्ली दमकल सेवा की जिम्मेदारी होती है अनापत्ति प्रमाण-पत्र देने की।

दिल्ली दमकल सेवा के निदेशक विपिन कैंटल ने आईएएनएस को बताया, इस बार हमारे पास पुलिस के सभी जिलों से 97 नए और अस्थाई पटाखा लाइसेंस के आवेदन आए थे। इनमें से दिल्ली फायर सर्विस ने 79 आवेदनों को कानूनन सही पाया। इन सबको एनओसी जारी कर दिया गया है।

कैंटल ने आगे कहा, दमकल सेवा मौका मुआयना करके ही संतुष्ट होने पर अनापत्ति प्रमाण-पत्र जारी करती है। हम लोग खासकर यह देखते हैं कि दुकान का साइज नियमानुसार (नौ वर्ग मीटर) हो। आपात स्थिति में मदद के रास्ते बड़े और साफ हों। आग लगने का कोई अंदेशा न हो।

दिल्ली फायर सर्विस के अनापत्ति प्रमाण-पत्र के साथ आवेदन दोबारा वापस जिला पुलिस उपायुक्त कार्यालय भेज दिए जाते हैं। उसके बाद फायर डिपार्टमेंट और जिला पुलिस उपायुक्त मुख्यालय की अनापत्ति के उपरांत अंत में दिल्ली पुलिस की लाइसेंसिंग शाखा में आवेदनों को भेजा जाता है। लाइसेंसिंग शाखा की संस्तुति कानूनी रूप से अंतिम व मान्य समझी जाती है।

इन तमाम आंकड़ों और जानकारियों से यह उम्मीद की जा सकती है कि ग्रीन-पटाखों को लेकर दिल्ली शहर में कानून के चाबुक की सख्ती यूं ही बरकरार रह सकी, तो यहां रहने वाले दमा मरीज और बुजुर्ग भी इस दीवाली को रौशन कर सकेंगे, प्रदूषण रहित हवा में त्योहार मनाकर।

सौभाशीष चौधरी ने कहा, यह पहला मौका होगा जब दिल्ली में लाइसेंसिंग शाखा द्वारा किसी भी विक्रेता को बारूदी पटाखे बेचने की अनुमति नहीं दी गई है। सब ग्रीन-पटाखे ही बेचेंगे, जिनसे प्रदूषण की संभावना न के बराबर होती है।

उन्होंने आगे कहा, बीते साल एक भी पटाखा लाइसेंस दिल्ली में जारी नहीं किया गया था। सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों के अनुपालन में इस बार जो 53 लाइसेंस जारी किए गए हैं वे सभी ग्रीन पटाखे के हैं।

आखिर ग्रीन पटाखों का विचार कहां से कैसे आया? उन्होंने कहा, केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्रालय के अधीन कार्यरत पेट्रोलियम एंड एक्सप्लोसिव सेफ्टी ऑर्गनाइजेशन द्वारा की गई खोज का परिणाम हैं ग्रीन-पटाखे। इसी आर्गनाइजेशन द्वारा ईजाद फार्मूले पर हिंदुस्तान में ग्रीन-पटाखे बनाए जाने शुरू हुए हैं। इस समय देश में लगभग 28 निर्माता ग्रीन-पटाखों के निर्माण में जुटे हैं।

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