comScore

© Copyright 2019-20 : Bhaskarhindi.com. All Rights Reserved.

बैलों की पूजा का दिन तान्हा पोला, महाराष्ट्र में मनेगा धूम-धाम से  

September 10th, 2018 07:22 IST

डिजिटल डेस्क, भोपाल। भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की अमावस्या और शुक्ल पक्ष की एकम को महाराष्ट्र में तान्हा पोला पर्व मनाया जाता है। इस बार ये पर्व 9 सितम्बर 2018 और 10 सितम्बर 2018 को मनाया जाएगा। इस दौरान बैलों की पूजा की जाती है। पोला का मतलब होता है बैलो का पूजन, श्रृंगार, सेवा, और उनके प्रति आभार प्रदर्शन का दिन। इस दिन को महाराष्ट्र में बड़े ही धूमधाम से मनाया जाता है।

महाराष्ट्र में पोला दो दिन तक मनाया जाता है। अमावस्या के दिन बड़ा पोला मनाया जाता है, इस दिन वास्तविक बैलों की पूजा करते हैं। अगले दिन यानी एकम के दिन तान्हा या छोटा पोला मनाया जाता है, जिसमें बच्चे लकड़ी का बैल लेकर घर घर जाते हैं और कुछ दक्षिणा मांगते हैं।

महाराष्ट्र में खेती का बहुत महत्व है, और पोला त्यौहार बड़ी ही धूमधाम से मनाया जाता है। बैलों को नहला धुलाकर सजाया जाता है और उन्हें पूरा आराम दिया जाता है। बैलों को भगवान मानने वाले किसान बैलों की हल्दी और गरम पानी से सिकाई करते हैं और उनकी इस दिन पूजा की जाती है। संध्या के समय परिवार के मुखिया द्वार बैलों से अनुरोध किया जाता है, आज आवतन घ्या, उद्या जेवायला या(आज निमंत्रण लीजिये और कल भोजन के लिए आइये) बोल कर बैलों को भोजन का निमंत्रण दिया जाता है और भोजन में पूरन पोली, कढ़ी, मूंग दाल के बड़े, और चावल बनाया जाता है।

इसके अगले दिन नगर के किसी एक व्यस्त चौराहे महाल से मारबत का जुलुस निकाला जाता है, मारबत अर्थात, एक ऊंचा पुतला, जिसे कुछ लोग कृष्ण और पूतना से भी जोड़कर देखते हैं। मारबत दो प्रकार की निकाली जाती है काली मारबत जो पूतना का प्रतीक है, और पीली मारबत जो बच्चों की हर बीमारियों से रक्षा करने वाली देवी है, इनके दर्शन करना शुभ माना जाता है। इसी के साथ निकलते है बडज्ञा। बडज्ञा विभिन्न सामाजिक बुराइयों, भ्रष्टाचार या कुरीतियों का रूप होते हैं, उनका पुतला दहन किया जाता है। कागज, पेड़ की टहनियों और अपने घरों का कचरा आदि से बच्चे बडज्ञा का निर्माण करते हैं। शहर भर में इस बडज्ञा को घुमाया जाता है। घुमाने के बाद बडज्ञा नाम के पुतले का दहन कर दिया जाता है।

बडज्ञा बुराई का प्रतीक है, लोग बड़गो के पीछे गाते चिल्लाते घूमते है उस बड़गे का नाम लेकर:-

घेऊन जाऽऽ गे मारबत 
अर्थात:- मारबत, इसको यहाँ से लेकर जाओ 

कमेंट करें
5qKnW
NEXT STORY

Real Estate: खरीदना चाहते हैं अपने सपनों का घर तो रखे इन बातों का ध्यान, भास्कर प्रॉपर्टी करेगा मदद

Real Estate: खरीदना चाहते हैं अपने सपनों का घर तो रखे इन बातों का ध्यान, भास्कर प्रॉपर्टी करेगा मदद

डिजिटल डेस्क, जबलपुर। किसी के लिए भी प्रॉपर्टी खरीदना जीवन के महत्वपूर्ण कामों में से एक होता है। आप सारी जमा पूंजी और कर्ज लेकर अपने सपनों के घर को खरीदते हैं। इसलिए यह जरूरी है कि इसमें इतनी ही सावधानी बरती जाय जिससे कि आपकी मेहनत की कमाई को कोई चट ना कर सके। प्रॉपर्टी की कोई भी डील करने से पहले पूरा रिसर्च वर्क होना चाहिए। हर कागजात को सावधानी से चेक करने के बाद ही डील पर आगे बढ़ना चाहिए। हालांकि कई बार हमें मालूम नहीं होता कि सही और सटीक जानकारी कहा से मिलेगी। इसमें bhaskarproperty.com आपकी मदद कर सकता  है। 

जानिए भास्कर प्रॉपर्टी के बारे में:
भास्कर प्रॉपर्टी ऑनलाइन रियल एस्टेट स्पेस में तेजी से आगे बढ़ने वाली कंपनी हैं, जो आपके सपनों के घर की तलाश को आसान बनाती है। एक बेहतर अनुभव देने और आपको फर्जी लिस्टिंग और अंतहीन साइट विजिट से मुक्त कराने के मकसद से ही इस प्लेटफॉर्म को डेवलप किया गया है। हमारी बेहतरीन टीम की रिसर्च और मेहनत से हमने कई सारे प्रॉपर्टी से जुड़े रिकॉर्ड को इकट्ठा किया है। आपकी सुविधाओं को ध्यान में रखकर बनाए गए इस प्लेटफॉर्म से आपके समय की भी बचत होगी। यहां आपको सभी रेंज की प्रॉपर्टी लिस्टिंग मिलेगी, खास तौर पर जबलपुर की प्रॉपर्टीज से जुड़ी लिस्टिंग्स। ऐसे में अगर आप जबलपुर में प्रॉपर्टी खरीदने का प्लान बना रहे हैं और सही और सटीक जानकारी चाहते हैं तो भास्कर प्रॉपर्टी की वेबसाइट पर विजिट कर सकते हैं।

ध्यान रखें की प्रॉपर्टी RERA अप्रूव्ड हो 
कोई भी प्रॉपर्टी खरीदने से पहले इस बात का ध्यान रखे कि वो भारतीय रियल एस्टेट इंडस्ट्री के रेगुलेटर RERA से अप्रूव्ड हो। रियल एस्टेट रेगुलेशन एंड डेवेलपमेंट एक्ट, 2016 (RERA) को भारतीय संसद ने पास किया था। RERA का मकसद प्रॉपर्टी खरीदारों के हितों की रक्षा करना और रियल एस्टेट सेक्टर में निवेश को बढ़ावा देना है। राज्य सभा ने RERA को 10 मार्च और लोकसभा ने 15 मार्च, 2016 को किया था। 1 मई, 2016 को यह लागू हो गया। 92 में से 59 सेक्शंस 1 मई, 2016 और बाकी 1 मई, 2017 को अस्तित्व में आए। 6 महीने के भीतर केंद्र व राज्य सरकारों को अपने नियमों को केंद्रीय कानून के तहत नोटिफाई करना था।