Papankusha Ekadashi 2025: पंचक और भद्रा के बीच पापांकुशा एकादशी, जानिए शुभ मुहूर्त और पूजा की आसान विधि

पंचक और भद्रा के बीच पापांकुशा एकादशी, जानिए शुभ मुहूर्त और पूजा की आसान विधि
हिंदू धर्म में इस एकादशी को पापों से मुक्ति, सुख-समृद्धि और भगवान विष्णु की कृपा पाने के लिए विशेष फलदायी माना जाता है।

डिजिटल डेस्क, भोपाल। हिन्दू धर्म में एकादशी तिथि का विशेष महत्व बताया गया है। वहीं आश्विन महीने के शुक्ल पक्ष में आने वाली एकादशी को पापांकुशा एकादशी के नाम से जाना जाता है। इस दिन भगवान विष्णु की पूजा और व्रत करने की परंपरा है। हिंदू धर्म में इस एकादशी को पापों से मुक्ति, सुख-समृद्धि और भगवान विष्णु की कृपा पाने के लिए विशेष फलदायी माना जाता है। लेकिन, इस साल पांपाकुशा एकादशी पर भद्रा और पंचक का साया रहने वाला है। ऐसे में आइए जानते हैं पूजा का शुभ मुहूर्त और आसान विधि के बारे में...

पापांकुशा एकादशी की तिथि कब से कब तक

पंचांग के अनुसार, साल 2026 में पापांकुशा एकादशी का व्रत 22 अक्टूबर, गुरुवार को रखा जाएगा। एकादशी तिथि 21 अक्टूबर को दोपहर 2 बजकर 11 मिनट पर शुरू हो चुकी है और 22 अक्टूबर को दोपहर 2 बजकर 47 मिनट तक रहेगी। उदया तिथि के नियम के अनुसार 22 अक्टूबर को व्रत रखना उचित माना गया है।

पंचक के साथ भद्रा का साया

इस साल पापांकुशा एकादशी पर भद्रा और पंचक का साया रहने वाला है। ज्योतिषाचार्य के अनुसार, 21 अक्टूबर 2026 से पंचक आरंभ हो चुके हैं, जो 25 अक्टूबर 2026 को समाप्त होंगे। वहीं 22 अक्टूबर को भद्रा सुबह में 06 बजकर 26 मिनट से दोपहर में 02 बजकर 47 मिनट तक रहेगी। इस दौरान भद्रा पृथ्वी पर वास करेगी।

पूजा का शुभ मुहूर्त

शुभ-उत्तम मुहूर्त: सुबह 06 बजकर 26 मिनट से 07 बजकर 51 मिनट तक

लाभ-उन्नति मुहूर्त: दोपहर में 12 बजकर 05 मिनट से दोपहर 01 बजकर 30 मिनट तक

अभिजीत मुहूर्त: सुबह 11 बजकर 43 मिनट से दोपहर 12 बजकर 28 मिनट तक

पापांकुशा एकादशी की पूजा विधि

  • एकादशी के दिन सुबह जल्दी उठें और स्नान करने के बाद साफ कपड़े पहनें।
  • इसके बाद पूजा स्थल को स्वच्छ करें।
  • भगवान विष्णु के सामने हाथ जोड़कर व्रत का संकल्प लें।
  • पूजा स्थल पर भगवान विष्णु की तस्वीर या प्रतिमा रखें।
  • उनके सामने दीपक जलाएं और प्रभु को पीले फूल, फल, अक्षत, चंदन और धूप-दीप अर्पित करें।
  • पूजा के दौरान भगवान को तुलसी दल अर्पित करें।
  • ॐ नमो भगवते वासुदेवाय मंत्र का जाप और विष्णु सहस्रनाम का पाठ करें
  • भगवान विष्णु की कथा सुनें।
  • पूजा के अंत में श्रीहरि की आरती करें।

पारण विधि

अगले दिन 23 अक्टूबर को भगवान विष्णु की पूजा करें और उन्हें पीले फूल, तुलसी दल और पीली मिठाई अर्पित करें। धूप, दीप जलाकर आरती करें। इसके बाद विष्णु सहस्त्रनाम का पाठ करें। ध्यान रखें किसी ब्राह्मण या गरीब व्यक्ति को अपनी श्रद्धा अनुसार अन्न, वस्त्र या दक्षिणा दान अवश्य करें और हो सके तो उन्हें भोजन कराएं। इसके बाद सात्विक भोजन से ही व्रत का समापन करें।

डिसक्लेमरः इस आलेख में दी गई जानकारी अलग- अलग किताब और अध्ययन के आधार पर दी गई है। bhaskarhindi.com यह दावा नहीं करता कि ये जानकारी पूरी तरह सही है। पूरी और सही जानकारी के लिए संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञ (ज्योतिष /वास्तुशास्त्री/अन्य) की सलाह जरूर लें।

Created On :   21 Oct 2026 6:41 PM IST

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