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जबलपुर न्यूज: श्रीराम के अग्निबाण से धू-धू कर जले रावण-कुंभकर्ण
डिजिटल डेस्क जबलपुर।
जहां आसमान पर रंग-बिरंगी आतिशबाजी की रोशनी बिखरी, वहीं भगवान श्रीराम के अग्निबाण ने रावण-कुंभकर्ण के विशालकाय पुतलों को भेदा। जैसे ही बाण पुतलों को लगे, वैसे ही पूरा मैदान जय श्रीराम के जयघोष से गूंज उठा। देखते ही देखते 75 फीट ऊंचे पुतले धू-धू कर जल उठे। कुछ ऐसा ही नजारा पंजाबी हिंदू एसोसिएशन के तत्वावधान में आयोजित 74वें पंजाबी दशहरा महोत्सव में देखने मिला, जिसका आयोजन गौरीघाट स्थित शासकीय आयुर्वेद कॉलेज मैदान में किया गया। आकर्षक आतिशबाजी, श्रीराम की शोभायात्रा, भक्ति संगीत और पंजाबी भांगड़े की प्रस्तुतियों ने आयोजन को यादगार बना दिया।
श्रीराम के रथ संग निकली शोभायात्रा
भगवान श्रीराम, अनुज लक्ष्मण और भक्त हनुमान की पुष्पों से सजे रथ के साथ शोभायात्रा निकाली गई। रथ के आगे गदा लेकर नृत्य करते हनुमानजी, दुलदुल घोड़ी, घोड़े और श्याम बैंड दल आकर्षण का केंद्र रहे। रंग-बिरंगी रोशनी और भक्ति संगीत के बीच शोभायात्रा ने मैदान की परिक्रमा की। हनुमानजी की अशोक वाटिका लीला ने भी दर्शकों का ध्यान खींचा। इसके बाद श्रीराम के अग्निबाण से रावण और कुंभकर्ण के पुतलों का दहन हुआ।
सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने मोहा मन
- कार्यक्रम की शुरुआत भगवान राम के पूजन और गणेश वंदना से हुई। आदि देव कला संस्थान के कलाकारों ने राजस्थानी दुर्गा भजन और हनुमान भजन प्रस्तुत किए।
- रथ पर श्रीराम के रूप में शिवाय मेहता, लक्ष्मण के रूप में सात्विक मलिक, माता सीता की वेशभूषा में किया भाटिया सवार रहीं।
- नवरंग कथक कला केंद्र की प्रस्तुतियां आकर्षण का केन्द्र रहीं।
- अंतरराष्ट्रीय श्याम बैंड की धार्मिक धुनों, सूफी कथक और दिव्य रामायण की प्रस्तुति ने वातावरण को भक्तिमय बना दिया।
- सामूहिक पंजाबी भांगड़े ने दर्शकों में जोश भर दिया। तालियों की गड़गड़ाहट से मैदान गूंज उठा।
कैमरे में कैद हुए दृश्य
श्रीराम जी का फूलों से सजा सुंदर रथ हो या फिर एक के बाद एक आतिशबाजी। समारोह के हर एक सुंदर दृश्य को दर्शकों ने कैमरे में कैद किया। रावण दहन से पहले और आयोजन के दौरान हुई शानदार आतिशबाजी मुख्य आकर्षण का केंद्र रही। शिवाकाशी और स्थानीय आतिशबाजों ने एक से बढ़कर एक आतिशबाजी की झलक दिखाई। आसमान पर बिखरती रंगीन रोशनी का बच्चे और बड़ों ने उत्साह से आनंद लिया।
दिया बुराइयां छोड़ने का संदेश...
बदलते समय में व्यक्ति के भीतर प्रवेश कर रही बुराइयों को दूर करने की जरूरत है। दशहरा पर्व पर रावण दहन करते हैं, ऐसे ही व्यक्ति को अपने जीवन से ईर्ष्या और द्वेश को भी त्यागना चाहिए। उक्त विचार जगद््गुरु डॉ. स्वामी नृसिंहदेवाचार्य महाराज ने व्यक्त किए। इस मौके पर साध्वी ज्ञानेश्वरी दीदी उपस्थित रहीं। समारोह के मुख्य अतिथि लोक निर्माण मंत्री राकेश सिंह ने कहा कि यह पर्व हमें संदेश देता है कि जीत हमेशा सत्य की होती है। इसलिए हमें सदैव सत्य के मार्ग पर चलना चाहिए। अगले वर्ष पंजाबी दशहरा महोत्सव का 75वां वर्ष होगा। इस ऐतिहासिक आयोजन को और भव्य बनाने के लिए उन्होंने अगले वर्ष के आयोजन के लिए 5 लाख रुपए देने की घोषणा की। उन्होंने शहर में हो रहे विकास कार्यों का उल्लेख करते हुए कहा कि हम निरंतर विकास के रास्ते पर आगे बढ़ेंगे और मिल-जुलकर सभी पर्वों को उत्साह व उल्लास के साथ मनाएंगे।
पंजाबी दशहरा एक अलग पहचान रखता है
समारोह में महापौर जगत बहादुर सिंह अन्नू ने कहा कि पंजाबी दशहरा मध्यप्रदेश में अपनी अलग पहचान रखता है और संस्कारधानी के गौरवशाली आयोजनों में शामिल है। समारोह में विशिष्ट अतिथि के रूप में सांसद सुमित्रा बाल्मीक, नगर निगम अध्यक्ष रिकुंज विज, पूर्व विधायक विनय सक्सेना उपस्थित रहे। कार्यक्रम संयोजक एवं पूर्व वित्त मंत्री तरुण भनोत के मार्गदर्शन में हुआ
Created On :   19 Oct 2026 9:44 PM IST










