Jabalpur News: हजारों नहीं शिक्षकों के लाखों रुपए डूब रहे एनपीएस अकाउंट से

एक-एक माह में 40 से 50 हजार रुपए डूब रहे, शेयर बाजार में उलथ-पुथल का असर शिक्षकों की जेब पर पड़ रहा, भविष्य को लेकर उनमें चिंता

डिजिटल डेस्क,जबलपुर। राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली एनपीएस में न केवल शिक्षक बल्कि अन्य सरकारी कर्मचारियों के वेतन से कटने वाली राशि को सरकार अपने बजट में उपयोेग नहीं करती है बल्कि इस राशि को पेंशन फंड नियामक द्वारा रजिस्टर्ड पेंशन फंड मैनेजरों के जरिए वित्तीय बाजारों यानी शेयर, सरकारी बॉन्ड और कर्ज बाजार में निवेश करती है। पिछले कई महिनों से शेयर मार्केट में जो उथल पुथल मची है उसके कारण बहुत से शेयर मुंह के बल गिर पड़े हैं और यही कारण है कि शिक्षकों को हर माह 40 से 50 हजार रुपयों का नुकसान हो रहा है। उनके खातों में आने वाली राशि का कुलजोड़ हर माह कम हो रहा है।

एक शिकायत में शिक्षकों ने बताया कि उनके एनपीएस का पैसा लगातार कम हो रहा है। पिछले कुछ माह से यह गति बढ़ गई है। हर माह जब उनके मोबाइल पर मैसेज आता है और पता चलता है कि उन्हें जो राशि बढ़कर मिलनी चाहिए थी वह घट गई है तो शिक्षक मानसिक रूप से परेशान हो जाते हैं। किसी को मकान बनवाना है और किसी को अपने बेटियों का विवाह करवाना है। उनकी कुल बचत यही राशि होती है और इस पर ग्रहण लगता देख वे परेशान हैं।

प्रकरण एक

एक शिक्षक ने बताया कि उनके खाते से सितम्बर माह में 20 हजार 818 रुपए काटे गए और उनके खाते में कुल रकम 25 लाख 65 हजार 587 रुपए थी। वहीं अक्टूबर माह में भी उनके खाते से 20 हजार 818 रुपए काटे गए जिससे यह राशि बिना किसी ब्याज के भी 25 लाख 86 हजार 405 रुपए होनी थी लेकिन उन्हें तब झटका लगा जब मैसेज में बताया गया कि उनकी कुल राशि 25 लाख 37 हजार 576 रुपए हो गई है।

प्रकरण दो

एक अन्य शिक्षक ने बताया कि उनके खाते से सितम्बर माह में 20 हजार 211 रुपए काटे गए और उनका कुल जोड़ 25 लाख 90 हजार 951 रुपए था। अक्टूबर माह में भी उनके खाते से 20 हजार 211 रुपए काटे गए जिससे यह राशि 26 लाख के पार हो जानी थी लेकिन जब मैसेज आया तो उनकी राशि 25 लाख 44 हजार 822 रुपए हो गई। इस प्रकार उन्हें लम्बा नुकसान उठाना पड़ा।

हमारे पैसे काटे ही न जाएं

शिक्षकों ने मांग की है कि यह मामला बेहद संवेदनशील है क्योंकि इसके उनके खून-पसीने की कमाई लगी हुई है। बेहतर होगा कि उन्हें यह विकल्प दिया जाए कि उनकी राशि काटी जाए या न काटी जाए यह निर्णय वे खुद लें। इसके बाद शिक्षक अपनी पसंद की जगह पर रुपए इनवेस्ट कर सकते हैं। फिलहाल तो उन्हें बड़ा नुकसान हो रहा है और अधिकारी कहते हैं यह उच्च स्तरीय मामला है वे कुछ नहीं कर सकते हैं।

Created On :   17 Oct 2026 8:40 PM IST

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