Pausha Dwadashi 2025: पौष द्वादशी पर बन रहा है अद्भुत संयोग, हनुमान जी की पूजा से दूर होंगी सभी बाधाएं

पौष द्वादशी पर बन रहा है अद्भुत संयोग, हनुमान जी की पूजा से दूर होंगी सभी बाधाएं
ज्योतिषियों के अनुसार, आज कई शुभ योग एक साथ बन रहे हैं। आज त्रिपुष्कर योग का निर्माण भी हो रहा है, जिसे ज्योतिष शास्त्र में अत्यंत शुभ और फलदायक माना जाता है।

डिजिटल डेस्क, भोपाल। हिन्दू पंचांग का दसवां महीना चल रहा है और आज कृष्ण पक्ष की द्वादशी तिथि है। मंगलवार के दिन यह तिथि होने के कारण बेहद खास हो गई है। ज्योतिषियों के अनुसार, इस दिन इस दिन सूर्य धनु राशि में और चंद्रमा तुला राशि में रहेंगे। इस दिन कई शुभ योग एक साथ बन रहे हैं। जिसमें आप शुभ और मांगलिक कार्य कर सकेंगे। इसके बाद से खरमास में पूरे एक माह तक आप इन कार्यों को नहीं कर सकेंगे। आइए जानते हैं द्वादशी और मंगलवार के एक खास योग के बारे में...

मंगलवार के दिन मुहूर्त

अभिजीत मुहूर्त: सुबह 11 बजकर 56 मिनट से शुरू होकर दोपहर 12 बजकर 37 मिनट तक रहेगा

राहुकाल का समय: दोपहर 2 बजकर 52 मिनट से शुरू होकर शाम 4 बजकर 9 मिनट तक रहेगा

त्रिपुष्कर योग का निर्माण

आज त्रिपुष्कर योग का निर्माण भी हो रहा है, जिसे ज्योतिष शास्त्र में अत्यंत शुभ और फलदायक माना जाता है। बता दें कि, यह योग तब बनता है जब रविवार, मंगलवार, या शनिवार के दिन द्वितीया, सप्तमी, या द्वादशी में से कोई एक तिथि हो। धार्मिक मान्यता है कि, इस योग में किए गए कार्य तीन गुना ज्यादा सफल होते हैं। यह योग विशेष रूप से व्यापार, संपत्ति क्रय, विवाह, शिक्षा, वाहन खरीद या नए कार्यों की शुरुआत के लिए अत्यंत उत्तम होता है। इस दिन कोई भी शुभ कार्य आरंभ करने से उसका प्रभाव स्थायी, त्रिगुणित और दीर्घकालिक होता है।

मंगलवार का शुभ योग

द्वादशी ​तिथि मंगलवार के दिन है और ऐसे में यह दिन और भी मंगलमय फल प्रदान करने वाला है। यदि किसी जातक के जीवन में मंगल ग्रह से संबंधित समस्याएं हैं तो वह इस दिन व्रत रखने के साथ ही राम भक्त हनुमान की पूजा करें। ऐसा कहा जाता है कि, हनुमान जी की विधि-विधान से पूजा करने से जीवन के कष्ट, भय और चिंताएं दूर हो जाती हैं।

संभव हो तो इस दिन ब्रह्म मुहूर्त में उठें और नित्य कर्म-स्नान आदि करने के बाद पूजा स्थल को साफ करें। फिर एक चौकी पर लाल कपड़ा बिछाएं और पूजा की सामग्री रखें और उस पर अंजनी पुत्र की प्रतिमा स्थापित करें। इसके बाद सिंदूर, चमेली का तेल, लाल फूल और प्रसाद चढ़ाएं। हनुमान चालीसा या सुंदरकांड का पाठ कर बजरंगबली की आरती करें। इसके बाद आरती का आचमन कर आसन को प्रणाम करके प्रसाद ग्रहण करें। शाम को भी हनुमान चालीसा या सुंदरकांड का पाठ करें।

डिसक्लेमरः इस आलेख में दी गई जानकारी अलग अलग किताब और अध्ययन के आधार पर दी गई है। bhaskarhindi.com यह दावा नहीं करता कि ये जानकारी पूरी तरह सही है। पूरी और सही जानकारी के लिए संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञ (ज्योतिष/वास्तुशास्त्री/ अन्य एक्सपर्ट) की सलाह जरूर लें।

Created On :   15 Dec 2025 6:38 PM IST

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