Mahavir Jayanti 2026: क्यों मनाई जाती है महावीर जयंती? जानिए इस दिन का महत्व

क्यों मनाई जाती है महावीर जयंती? जानिए इस दिन का महत्व
इस पर्व को 24वें और अंतिम तीर्थंकर भगवान महावीर के जन्म उत्सव के रूप में मनाया जाता है।

डिजिटल डेस्क, भोपाल। महावीर जयंती (Mahavir Jayanti) जैन समुदाय का सबसे प्रमुख पर्व है। जैन धर्म के जानकारों के अनुसार, इस पर्व को 24वें और अंतिम तीर्थंकर भगवान महावीर के जन्म उत्सव के रूप में मनाया जाता है। भगवान महावीर को वीर, वर्धमान, अतिवीर और सन्मति के नाम से भी जाना जाता है। इस दिन जैन मंदिरों में सुबह से ही श्रद्धालुओं के पहुंचने का सिलसिला शुरू हो जाता है। इस दिन भव्य जुलूस, शोभायात्राएं निकाली जाती हैं। अनुष्ठान और शोभा यात्रा का आयोजन किए जाते हैं।

महावीर भगवान ने समाज और लोगों के कल्याण के लिए संदेश दिए थे। भगवान महावीर सत्य, अहिंसा, के उपदेश एक खुली किताब की भांति है। उन्होंने मनुष्य के लिए मोक्ष प्राप्ति के लिए पांच नियम भी स्थापित किए थे, जिनको पंच सिद्धांत कहा जाता है। इस वर्ष महावीर जयंती 31 मार्च 2026, मंगलवार को है। आइए जानते हैं इस दिन का महत्व...

कौन हैं भगवान महावीर?

पैराणिक कथाओं के अनुसार, महावीर स्वामी को जैन धर्म के 24वें तीर्थंकर के रूप में माना जाता है। वे उन 24 लोगों में से हैं जिन्होंने कठिन तपस्या कर आत्मज्ञान प्राप्त किया था। उनका जन्म लगभग 599 ईसा पूर्व वैशाली के प्राचीन साम्राज्य में हुआ था। स्वामी महावीर का जन्म नाम वर्धमान था और उनके माता-पिता राजा सिद्धार्थ और रानी त्रिशला थे। पौराणिक कथाओं के अनुसार, उनके अंदर बहुत कम उम्र से ही आध्यात्मिक झुकाव था और उन्होंने 30 साल की उम्र में ही संसार की मोह- माया, सुख-ऐश्वर्य और राज्य को छोड़ दिया था।

महावीर को 12 साल 6 महीने के गहरे ध्यान से इन्हें ज्ञान प्राप्त करने में सफलता हासिल हुई थी। भगवान महावीर ने अपने जीवन में तप और साधना से नए प्रतिमान स्थापति किए। उन्होंने जैन धर्म की खोज के साथ ही इसके प्रमुख सिद्धांतों को स्थापित किया। इन्होंने पूरे भारत वर्ष में यात्रा करना शुरू कर दिया और लोगों को सत्य, असत्य, अहिंसा, ब्रह्मचर्य और अपरिग्रह की शिक्षा दी। 42 साल की उम्र में तीर्थंकर की उपाधि प्राप्त की।

कैसे की जाती है पूजा?

जैन धर्म की मान्यता के अनुसार, इस खास दिन जैन धर्म के लोग प्रभातफेरी, अनुष्ठान, शोभायात्रा निकलाते हैं। जैन समुदाय के लोग भगवान महावीर जी की मूर्ति का सोने और चांदी के कलश से जलाभिषेक करते हैं। इस दौरान जैन संप्रदाय के गुरु भगवान महावीर के उपदेश बताते हैं और उन पर चलने की सीख देते हैं।

डिसक्लेमरः इस आलेख में दी गई जानकारी अलग- अलग किताब और अध्ययन के आधार पर दी गई है। bhaskarhindi.com यह दावा नहीं करता कि ये जानकारी पूरी तरह सही है। पूरी और सही जानकारी के लिए संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञ (ज्योतिष/वास्तुशास्त्री/ अन्य एक्सपर्ट) की सलाह जरूर लें।

Created On :   31 March 2026 2:24 PM IST

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