Sita Navami 2026: जानकी नवमी पर इस विधि से करें पूजा, जीवन में आने वाली समस्याओं से मिलेगी मुक्ति

डिजिटल डेस्क, भोपाल। हर साल वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की नवमी को माता सीता का प्राकट्य उत्सव आता है। इसे सीता नवमी (Sita Navami) के रूप में मनाया जाता है। पुराणों के अनुसार, वैशाख शुक्ल नवमी तिथि को मध्याह्न काल और पुष्य नक्षत्र में राजा जनक को हल चलाते समय भूमि से कन्या के रूप में माता सीता प्राप्त हुई थीं। इस तिथि को जानकी जयंती (Janaki Jayanti) भी कहा जाता है। इस वर्ष सीता नवमी 25 अप्रैल 2026 यानी कि आज मनाई जा रही है।
धार्मिक मान्यता के अनुसार, जो कि भी जातक इस दिन व्रत रखने के साथ ही राम-जानकी की विधि-विधान से पूजा करता है। उसे जीवन में आने वाली सभी प्रकार की समस्याओं से मुक्ति मिलती है। इस दिन सुहागिन महिलाएं अपने पति की लंबी आयु के लिए विशेष अनुष्ठान करती हैं। आइए जानते हैं इसकी पूजा विधि के बारे में...
तिथि कब से कब तक
नवमी तिथि आरंभ: 24 अप्रैल 2026, शुक्रवार की शाम 06 बजकर 14 मिनट से
नवमी तिथि समापन: 25 अप्रैल 2026, शनिवार की शाम 04 बजकर 30 मिनट तक
सीता नवमीं की पूजा विधि
- पूजन के लिए भूमि पर सुंदर मंडप बनाएं और इसे आम के पत्तों और फूल से सजाएं।
- मंडप में एक चौकी रखें और लाल अथवा पीला कपड़ा बिछाएं।
- इसके बाद गुलाबी चावल का अष्ट दल बनाएं।
- अब भगवान राम और माता सीता की प्रतिमा स्थापित करें।
- मूर्ति न होने पर चित्र द्वारा भी पूजन किया जा सकता है।
- गुलाबी आसन पर उत्तर दिशा की ओर मुख करके बैठें।
- माता सीता को लाल वस्त्र पहनाएं।
- माता को मिष्ठान और साबूदाने की खीर का भोग लगाएं।
- इसके बाद माता सीता को सिंदूर अर्पित करें।
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- शुद्ध रोली मोली, चावल, धूप, दीप, लाल फूलों की माला तथा गेंदे के पुष्प चढ़ाएं।
- तिल के तेल या गाय के घी का दीया जलाएं।
- लाल चंदन की माला से ॐ श्रीसीताये नमः मंत्र का एक माला जाप करें।
- विधि विधान से पूजा करने के बाद आरती करें।
- पूजा के अंत में सभी को प्रसाद वितरित करें।
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Created On :   25 April 2026 4:45 PM IST













