Siddharth P. Malhotra Interview: ‘इक्का' के पीछे 7 साल का इंतजार, आज फिल्म बन जाना ही सबसे बड़ी जीत है- सिद्धार्थ पी. मल्होत्रा

डिजिटल डेस्क, मुंबई। नेटफ्लिक्स पर 10 जुलाई से रिलीज होने जा रही कोर्टरूम ड्रामा फिल्म ‘इक्का' में हिंदी सिनेमा के दो बड़े ‘इक्के', सनी देओल और अक्षय खन्ना करीब 29 साल बाद फिर साथ नजर आएंगे। फिल्म का निर्देशन सिद्धार्थ पी. मल्होत्रा ने किया है, जिन्होंने इससे पहले हिचकी और महाराज जैसी चर्चित फिल्में बनाई हैं। सात साल तक इस कहानी को लेकर संघर्ष करने वाले सिद्धार्थ का मानना है कि आज फिल्म बन जाना ही बड़ी बात है। बढ़ते बजट, बदलते ओटीटी दौर, इंडस्ट्री के दबाव और सनी-अक्षय जैसे दिग्गज कलाकारों के साथ काम करने के अनुभव पर उन्होंने दैनिक भास्कर से खुलकर बातचीत की।
सनी और अक्षय दोनों प्रोफेशनल हैं
‘इक्का’ की कहानी को मैं कई सालों से बनाना चाह रहा था लेकिन जब यह शुरू हुई तो उसमे समय नहीं लगा। अक्षय खन्ना और सनी देओल दोनों एक साथ ‘बॉर्डर’ के बाद 29 साल बाद साथ काम कर रहे हैं लेकिन सेट पर पहले दिन उनको देखकर ऐसा नहीं लगा कि वह इतने साल बाद मिल रहे हैं। दोनों प्रोफेशनल हैं। इस कहानी को सुनते ही सनी देओल ने हां कह दी और फिल्म के दौरान मुझे अपने बेटे की तरह प्यार दिया तो वहीं अक्षय कुमार भी एक हफ्ते के भीतर फिल्म करने के लिए मान गए। दोनों ने मुझे छूट दी कि मैंने अपने तरीके से फिल्म बनाऊं किसी भी सीन या शॉट के लिए टोका नहीं।
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फिल्म की कहानी ‘दामिनी’ से अलग
‘इक्का’ की कहानी को लेकर मैं 7 सालों से घूम रहा हूं , लोग इसको सुनते तो थे लेकिन यह कभी बन नहीं पायी। मैं चाहता था यह मेरी पहली फिल्म बनें हालांकि अब यह बनकर तैयार है। इसके पहले मैं महाराज, हिचकी जैसी फिल्म बना चुका हूं। ‘दामिनी’ के बाद सनी देओल ने वकील का कोई किरदार नहीं किया था, हालांकि दामिनी में भी वह एक गेस्ट किरदार में ही थे लेकिन उनका वह अंदाज लोगों को पसंद आ गया। उनका वकील का गेटअप और संवाद सुपरहिट हो गए लोग अब इस फिल्म को भी दामिनी से जोड़कर देख रहे हैं लेकिन मैं उन्हें क्लियर करना चाहता हूं कि उस फिल्म में उनका तारीख पर तारीख वाला मुद्दा जंचता है लेकिन यह फिल्म उससे बहुत अलग है। कहानी भी अलग है हां वकील का गेटअप एक जैसा है।
हम पर अच्छी फिल्म बनाने का प्रेशर
हम निर्देशकों पर हमेशा से एक अच्छी फिल्म बनाने का प्रेशर होता है। अगर आपकी फिल्म नहीं चली तो आपको आगे काम नहीं मिलेगा। यह हमारे लिए नौकरी की तरह है। निर्माता अपना पैसा लगाते हैं तो हम निर्देशकों पर उसे अच्छी तरह से बनाने का प्रेशर ज्यादा होता है। मेरी तीनों फिल्मों की कहानी ने बनने के लिए सालों इंतजार किया है। लेकिन शुक्र है अब महाराज के बाद मुझे और फिल्में बनाने का मौका मिल रहा है। अगर आपको काम करने का मौका मिला है, तो यह कभी नहीं भूलना चाहिए कि आपसे भी ज्यादा प्रतिभाशाली कई लोग हैं, जिन्हें सिर्फ अवसर नहीं मिला। इसलिए अपने काम को हल्के में नहीं लेना चाहिए।
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आज फिल्म बन जाए वही बहुत है
आज अच्छी फिल्म बनाना आसान नहीं रहा। पहले के मुकाबले फिल्में कम बन रही हैं और कहानी के अलावा कई दूसरी चीजों का भी ध्यान रखना पड़ता है। निर्माता तभी निवेश करते हैं, जब उन्हें फिल्म के सफल होने और मुनाफा मिलने का भरोसा हो। सबसे बड़ी चुनौती बढ़ता हुआ बजट है। पहले 12 से 30 करोड़ रुपये में फिल्म बन जाती थी, लेकिन अब कलाकारों और तकनीशियनों की फीस इतनी बढ़ गई है कि उतने बजट में फिल्म बनाना मुश्किल हो गया है। ऐसे दौर में फिल्मकार के लिए सबसे जरूरी है कि वह अपनी उम्मीद से भी बेहतर काम करे। मैं खुद को खुशकिस्मत मानता हूं कि महाराज और हिचकी को अच्छा रिस्पॉन्स मिला, जिससे मुझे आगे भी अच्छे प्रोजेक्ट करने का मौका मिला।
सिर्फ अच्छा होना काफी नहीं
हम निर्देशकों के लिए यह मायने नहीं रखता कि हम बड़ा परदे, ओटीटी, टीवी या किस प्लेटफार्म के लिए प्रोजेक्ट बना रहे हैं हमें बस अच्छा काम करना होता है। लेकिन यह भी सच है कि आज ओटीटी का दौर पहले जैसा नहीं रहा। कई प्लेटफॉर्म्स के पास दर्जनों फिल्में रिलीज का इंतजार कर रही हैं और बड़े स्तर पर ओरिजिनल कंटेंट अब सिर्फ नेटफ्लिक्स और अमेजन प्राइम वीडियो ही बना रहे हैं। पहले अलग कहानियों के लिए ओटीटी सबसे अच्छा मंच माना जाता था, लेकिन अब वहां भी बिजनेस को प्राथमिकता दी जा रही है। ऐसे में इंडस्ट्री में काम के अवसर भी कम हो गए हैं। वहीं टीवी की प्रतिस्पर्धा भी काफी बढ़ गई है। पहले शो वर्षों तक चलते थे, लेकिन अब कुछ हफ्तों में ही बंद हो जाते हैं। आज के समय में सिर्फ अच्छा होना काफी नहीं, बल्कि बेहतरीन होना और किस्मत का साथ मिलना भी उतना ही जरूरी है।
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Created On :   7 July 2026 6:40 PM IST












