Satluj Movie Banned: फिल्म 'सतलुज' पर रिलीज के बाद लगा बैन, लाइव सेशन में जमकर बरसे दिलजीत दोसांझ, जानें क्या थी फिल्म की कहानी

डिजिटल डेस्क, मुंबई। दिलजीत दोसांझ की नई फिल्म 'सतलुज' को रिलीज के महज दो दिनों के बाद ही ओटीटी प्लेटफॉर्म जी5 से हटा दिया गया है। इस फिल्म ने पंजाब की राजनीति में हचचल मचा दी है और फिल्म को लेकर विवाद तेज हो गया है। फिल्म हटने के बाद देश के प्रमुख गुरुद्वारों का प्रबंधन करने वाली शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (SGPC) और शिरोमणि अकाली दल (SAD) ने फिल्म के समर्थन में खुलकर आवाज उठाई है। उन्होंने कहा कि पंजाब को अपने अतीत का सामना ईमानदारी से करने का अधिकार है। वहीं दिलजीत दोसांझ ने भी इस मामले पर सोशल मीडिया एक लाइव सेशन में इस पर बात की है। तो चलिए जान लेते है की आखिर इस फिल्म की कहानी क्या थी-
क्या बोले दिलजीत दोसांझ?
दिलजीत दोसांझ ने कहा 'मुझे खुशी है कि जितनी मेहनत हमने की थी कि जो नया यूथ है, वो फिल्म की बात भी कर रहा है। एक वीडियो देखा उसमें गुरुद्वारे में हमारी फिल्म दिखाई जा रही है। आज घर-घर जसवंत सिंह खालरा जी की चर्चा हो रही है। बस यही मकसद था। जो होना था हो गया। तीन दिन में कई लोगों ने यह फिल्म देख ली अब बैन कर देने से कोई फर्क नहीं होगा। मुझे बहुत तसल्ली है, हमारी चार साल की मेहनत पूरी हो गई। कई लोगों ने डाउनलोड कर ली है।' उन्होंने आगे कहा 'हमें पता ही था कि यह होगा। फिल्म हटा दी जाएगा। हमें लगा संडे को सब अपने परिवार के साथ देखेंगे उन्होंने उससे पहले ही इसे हटवा दिया। सिर्फ 2 दिन में ही फिल्म ने इतनी चर्चा पा ली। अब आपके डिलीट करने से कुछ नहीं होना।'
अभिनेता ने आगे कहा 'फिल्म की शूटिंग करते हुए भी हमें काफी तकलीफ हुई। 15 दिनों तक फिल्म की शूटिंग करवा दी जाती थी। चार साल से हम लोग इसे रिलीज कराने पर मेहनत कर रहे हैं। मैं हनी पाजी (हनी त्रेहान) को सैल्यूट करता हूं कि उन्होंने इस फिल्म पर अपनी पूरी जिंदगी लगा दी।'
राजनीति पर बोला हमला
दिलजीत दोसांझ ने कहा 'मैं पॉलिटिशियन नहीं बन सकता। मैं हर इंसान से प्यार करता हूं और राजनीति तो तभी हो सकती है, जब लोगों को डराकर रखोगे। उनकी लड़ाईयां करवाकर रखोगे। वर्ना तो राजनीति हो ही नहीं सकती।'
कौन थे जसवंत सिंह खालरा जिन पर बनी फिल्म
फिल्म मानवाधिकार कार्यकर्ता जसवंत सिंह खालरा के जीवन पर आधारित है, जिन्होंने पंजाब में कथित फर्जी मुठभेड़ों और गुप्त अंतिम संस्कारों के मामलों को उजागर किया था। 1952 में अमृतसर जिले के खालरा गांव में जन्मे खालड़ा पहले बैंक कर्मचारी थे, लेकिन बाद में पूर्णकालिक सामाजिक और मानवाधिकार कार्यकर्ता बन गए।
फिल्म पर 127 कट लगाने की मांग की गई थी
फिल्म का नाम पहले 'पंजाब 95' था। इसे 2022 में केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (CBFC) के पास प्रमाणन के लिए भेजा गया था, लेकिन यह करीब तीन सालों तक प्रक्रिया में अटका रहा। निर्माताओं का आरोप था कि CBFC ने फिल्म में 127 कट लगाने की मांग की थी। अंततः फिल्म 3 जुलाई को 'सतलुज' नाम से ZEE5 पर रिलीज हुई और इसे लोगों ने काफी पसंद भी किया।
Created On :   6 July 2026 11:00 AM IST












