Ramandeep Yadav Interview: ‘रज्जो’ बनकर छा गए रमनदीप यादव, किरदार से बाहर आने के लिए लेनी पड़ी थेरेपी

‘रज्जो’ बनकर छा गए रमनदीप यादव, किरदार से बाहर आने के लिए लेनी पड़ी थेरेपी
वेब सीरीज ‘राख’ में ‘रज्जो’ का किरदार निभाकर अभिनेता रमनदीप यादव अचानक चर्चा के केंद्र में आ गए हैं।

डिजिटल डेस्क, मुंबई। वेब सीरीज ‘राख’ में ‘रज्जो’ का किरदार निभाकर अभिनेता रमनदीप यादव अचानक चर्चा के केंद्र में आ गए हैं। कभी मुंबई में ऑडिशन और रिजेक्शन के बीच संघर्ष करने वाले रमनदीप आज दर्शकों की तारीफों से घिरे हैं। चंडीगढ़ के क्रिकेट मैदानों से लेकर थिएटर और फिर अभिनय की दुनिया तक का उनका सफर आसान नहीं रहा। परिवार की नाराजगी, करियर को लेकर असमंजस और लगातार असफलताओं के बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी। दैनिक भास्कर से खास बातचीत में रमनदीप आज बढ़ते फॉलोवर्स और दर्शकों के प्यार के बीच रामनदीप अपने संघर्ष को ही सबसे बड़ी ताकत मानते हैं। उनकी कहानी उनकी जुबानी

सीरीज के बाद बढ़े फॉलोवर्स

रमनदीप यादव ने कहा, इस किरदार ‘रज्जो’ के बाद से मेरी जिंदगी बदल गयी है। मेरा सोशल मीडिया हैंडल संदेशों से भरा पड़ा है। पहले सिर्फ 1500 फॉलोवर्स थे अब इस सीरीज के बाद 7 हजार से अधिक फॉलोवर्स बढ़ गए और बढ़ते ही जा रहे हैं। एक समय था जब मैं मुंबई में संघर्ष कर रहा था तो जिन कलाकारों का काम मुझे पसंद आता था मैं सबको टेक्स्ट करके उनके काम की तारीफ जरूर करता था। आज मुझे लोग मैसेज कर रहे हैं और तारीफ कर रहे हैं। मुझे नफरत से भरे संदेश भी आ रहे हैं जो कि मैं चाहता भी था कि लोगों को ‘रज्जो’ से नफरत हो जाए।

स्क्रिप्ट पढ़कर रो दिया

मुझे जब इस वेब सीरीज का ऑफर आया तो पहले यह यकीन नहीं हुआ कि मैं लगभग लीड में हूं और दूसरे रज्जो के किरदार की चुनौती यह थी कि वह कॉकरोच, बदमाश और अच्छा सब कुछ था। वह सर्वाइवल और खुद के लाइमलाइट के लिए अपराध करता है जबकि बाबू शुरुआत से ही दर्दनाक हत्यारा है। रज्जो धीरे-धीरे अपराधी बनता है। पहले तो लगा इतना मुश्किल रोल कैसे करुंगा ? स्क्रिप्ट पढ़कर मैं रोने लगा था। फिर सोचा कि रज्जो तो बनना ही है , बड़ा मौका है।

हरियाणवी सीखी, खुद का शब्दकोष तैयार किया

इसलिए मैंने पहले हरियाणवी गानों की प्ले लिस्ट बनाई, उसे सुनता रहता था। हरियाणवी भाषा सीखी, उसके लिए हरियाणवी के शब्दों का अपना कलेक्शन बनाया क्योंकि रज्जो जब बोले तो लोगों को यह नहीं लगना चाहिए कि वह हरियाणा का है उसकी भाषा पर ध्यान ना जाए बल्कि लोग यह सोचने लगे कि असली रज्जो ऐसा ही दिखता होगा। मैंने हरियाणवी भाषा में एक बार भी हिंदी के शब्द नहीं बोले हैं।

रज्जो से बाहर निकलने के लिए ली थेरेपी

रज्जो और बाबू ऐसे किरदार है जो नार्मल नहीं हैं। इसकी तैयारी मुश्किल थी और जब हम 6 महीने तक शूट कर रहे थे तो वह किरदार हमारे साथ रह रहा था। मैंने खुद वो भारीपन महसूस किया है। मेरे दोस्त मुझे टोकने लगे थे कि मैं बदल गया हूं, लेकिन मैंने तब खुद को बदलने की कोशिश नहीं की क्योंकि शूट के लिए वह मिजाज जरुरी था। सेट पर तो शूट के दौरान हमारे लिए कई थेरेपिस्ट भी आ चुके थे। मैंने शूट के बाद कई दिनों तक थेरेपी ली हालांकि अब मैं ठीक हूं।

स्पोर्ट्स में करियर पर थी शंका

मैं चंडीगढ़ का रहने वाला हूं। मेरा पूरा परिवार स्पोर्ट्स में सक्रिय है। बड़े भाई और दीदी स्पोर्ट्स में हैं और पापा सरकारी नौकरी में हैं। मैंने खुद हरियाणा क्रिकेट एसोसिएशन द्वारा आयोजित कई जिला स्तरीय टूर्नामेंटों में चंडीगढ़ जिला टीम का प्रतिनिधित्व किया था। मैं क्रिकेटर तो था लेकिन इसमें मुझे कोई भविष्य नजर नहीं आया क्योंकि यह एक सीमित क्षेत्र है। एक उम्र के बाद आपको रिटायर होना ही पड़ेगा और तब तक आप सफल नहीं हो पाए तो भविष्य आपका अंधकार में है। मैंने कई ऐसे खिलाड़ियों को देखा था जो संघर्ष में खो गए।

परिवार हुआ नाराज

मैंने मास कम्युनिकेशन की पढ़ाई की और चंडीगढ़ के थिएटर ग्रुप से जुड़ा , यहीं से अभिनय करियर की शुरुआत हुई। लेकिन मेरा परिवार इससे संतुष्ट नहीं था। वह चाहते थे कि मैं स्पोर्ट्स कोटा से कोई सरकारी नौकरी ले लूं। मैं जब थिएटर जाता था तो पिताजी अक्सर कहते थे क्यों अपने करियर से खिलवाड़ कर रहा है ? थिएटर में कोई भविष्य नहीं है। दरअसल हमारे परिवार में कोई अभिनय में नहीं है। मैं पहला हूं इसलिए वह ज्यादा चिंतित थे। लेकिन मैंने ठान लिया था कि एक्टिंग की करना है।

मुंबई में मिले कई रिजेक्शन

जब मैं मुंबई आया तो मुझे कई रिजेक्शन मिले। काम मिलते-मिलते नहीं मिलता था। ऑडिशन दे देकर थक जाता था। कभी सोचता था कि यह इंतजार खत्म होगा या नहीं। जब आप मुंबई आते है तो आपसे आपके परिवार को भी बड़ी उम्मीदें होती हैं कि यह हमारा नाम आगे ले जाएगा। उस उम्मीद पर भी खरा उतरना था। मैंने तो ऑडिशन और रिजेक्शन की गिनती ही बंद कर दी थी। लेकिन थिएटर से जुड़ा रहा और मेहनत आखिरकार रंग लायी। मनमर्जियां,कैम्पस डायरीज और अब राख में काम की काफी चर्चा हुई।

Created On :   18 Jun 2026 9:36 PM IST

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