Karan Johar On Series Raakh: अली फजल-सोनाली की सीरीज 'राख' ने किया डायरेक्टर करण जौहर को बैचेन बोले-'आखिरी एपिसोड देखकर बहुत डिस्टर्ब हो गया हूं'

डिजिटल डेस्क, मुंबई। ओटीटी के दौर में क्राइम थ्रिलर और सत्य घटनाओं पर आधारित सीरीज दर्शकों की पहली पसंद बनती जा रही हैं। ऐसी कहानियां न सिर्फ मनोरंजन करती हैं, बल्कि समाज के उन कड़वे सचों को भी सामने लाती हैं, जिन्हें देखकर दर्शक लंबे समय तक सोचने पर मजबूर हो जाते हैं। हाल ही में रिलीज हुई अली फजल की सीरीज ‘राख’ भी इसी वजह से चर्चा में है। 1978 के चर्चित रंगा-बिल्ला हत्याकांड से प्रेरित इस सीरीज ने दर्शकों के साथ-साथ फिल्म निर्माता करण जौहर को भी गहराई से प्रभावित किया है।
आधी रात को साझा की प्रतिक्रिया
करण जौहर ने सोशल मीडिया पर अपनी प्रतिक्रिया साझा करते हुए बताया कि वह इन दिनों सोशल मीडिया से थोड़ी दूरी बनाने की कोशिश कर रहे हैं। इसके बावजूद ‘राख’ देखने के बाद वह अपनी भावनाएं व्यक्त किए बिना नहीं रह सके। करण ने लिखा कि रात के करीब 1:35 बजे उन्होंने सीरीज का आखिरी एपिसोड देखा और उसके बाद से वह बेहद परेशान और भावुक महसूस कर रहे हैं
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‘इंसानियत का बदसूरत चेहरा दिखाती है राख’
करण के मुताबिक ‘राख’ सिर्फ एक क्राइम ड्रामा नहीं है, बल्कि यह इंसानियत के उस अंधेरे और भयावह पहलू को सामने लाती है, जिसे देखकर कोई भी व्यक्ति भीतर तक हिल सकता है। उन्होंने कहा कि एक अभिभावक, एक इंसान और समाज के सदस्य के रूप में इस कहानी ने उन्हें गहराई से झकझोर दिया। करण ने स्वीकार किया कि सीरीज खत्म होने के बाद भी वह उसके प्रभाव से बाहर नहीं निकल पाए हैं और उन्हें नहीं पता कि इस ट्रॉमा से उबरने में कितना समय लगेगा।
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जब क्राइम सीरीज ने दर्शकों को झकझोरा
‘राख’ उन चुनिंदा सीरीज की सूची में शामिल होती दिख रही है, जिन्होंने दर्शकों पर गहरा असर छोड़ा है। इससे पहले ‘दिल्ली क्राइम’ ने निर्भया कांड की भयावहता को संवेदनशील तरीके से पेश किया था। वहीं ‘पाताल लोक’ ने समाज और अपराध की जटिल परतों को उजागर किया। ‘असुर’ ने साइकोलॉजिकल थ्रिलर को नया आयाम दिया, जबकि ‘क्रिमिनल जस्टिस’ ने न्याय व्यवस्था और अपराध के रिश्ते को प्रभावशाली ढंग से दिखाया। इन सभी सीरीज की तरह ‘राख’ भी एक ऐसी कहानी लेकर आई है, जो मनोरंजन के साथ-साथ दर्शकों को असहज सवालों से रूबरू कराती है।
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क्यों पसंद आ रही हैं ट्रू-क्राइम कहानियां?
विशेषज्ञों का मानना है कि दर्शक अब ऐसी कहानियां देखना चाहते हैं जो वास्तविकता के करीब हों। ट्रू-क्राइम सीरीज उन्हें सिर्फ रहस्य और रोमांच नहीं देतीं, बल्कि समाज, अपराध और मानव मनोविज्ञान को समझने का अवसर भी देती हैं। ‘राख’ इसी प्रवृत्ति का नया उदाहरण बनकर सामने आई है, जिसने दर्शकों के साथ-साथ बॉलीवुड के बड़े फिल्मकारों को भी प्रभावित किया है।
Created On :   15 Jun 2026 6:50 PM IST












