Movie Review: ‘द नर्मदा स्टोरी’ दमदार मर्डर मिस्ट्री, शानदार क्लाइमैक्स और समाज को आईना दिखाती एक सशक्त थ्रिलर

फ़िल्म समीक्षा: ‘द नर्मदा स्टोरी’
कलाकार: रघुबीर यादव, मुकेश तिवारी, अश्विनी कालसेकर, सिमाला प्रसाद, अंजलि पाटिल, ज़रीना वहाब, इश्तियाक़ ख़ान, आलोक चटर्जी, सदानंद पाटिल, शरद सिंह, हसन पीरजादा
निर्देशक: ज़ैग़म इमाम
निर्माता: एबी इन्फोसॉफ्ट क्रिएशन, गोल्डेन रेशियो फिल्म्स
जॉनर: क्राइम / थ्रिलर
अवधि: 2 घंटे 01 मिनट
भाषा: हिंदी
सेंसर: U/A
रिलीज़ की तारीख: 12 जून 2026
रेटिंग: ★★★★☆ (4/5)
इस हफ्ते सिनेमाघरों में रिलीज़ हुई ‘द नर्मदा स्टोरी’ सिर्फ एक क्राइम-थ्रिलर नहीं, बल्कि निर्देशक ज़ैग़म इमाम का ऐसा सिनेमाई प्रस्तुति है जो एंटरटेनमेंट के साथ-साथ कई जरूरी सवाल भी छोड़ जाता है। रियल लाइफ़ घटनाओं से प्रेरित यह फिल्म शुरुआत से ही अपने रहस्य का ऐसा जाल बुनती है कि दर्शक आख़िरी रील तक उससे बाहर नहीं निकल पाता। सस्पेंस, इमोशन के साथ जरूरी सामाजिक संदेश
कहानी मध्य प्रदेश के नर्मदापुरम से शुरू होती है, जहां गुमशुदा लड़कियों की जांच कर रहे पुलिस इंस्पेक्टर पुरुषोत्तम भदौरिया अचानक रहस्यमय परिस्थितियों में गायब हो जाते हैं। उनका आख़िरी फोन कॉल शहर के पावर हाउस से आया था। इसके बाद पुलिस और बिजली विभाग के बीच तनाव की चिंगारी भड़क उठती है।
केस की जिम्मेदारी मिलती है नई सब-इंस्पेक्टर नर्मदा रैकवार (सिमाला प्रसाद) को। लेकिन यह सिर्फ एक केस नहीं, उसके अपने जीवन की लड़ाई भी है। एक तरफ कर्तव्य है, दूसरी तरफ पिता नंदकिशोर रैकवार (रघुबीर यादव) का दर्द और गुस्सा, जो वर्षों पहले अपनी पत्नी को खो चुके हैं।
जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ती है, कहानी में नए-नए किरदार और नए रहस्य जुड़ते जाते हैं। हेड कांस्टेबल रामरतन शुक्ला (मुकेश तिवारी), गुलाब सिंह (अंजलि पाटिल), गुरु माँ (सदानंद पाटिल) और रहस्यमयी निशा (इश्तियाक़ ख़ान) कहानी को कई परतें देते हैं। हर नई जानकारी दर्शकों को एक नई दिशा में ले जाती है, लेकिन असली खेल क्या है, इसका अंदाज़ा लगाना आसान नहीं।
परफॉर्मेंस
फ़िल्म की सबसे बड़ी यूएसपी इसकी शानदार स्टारकास्ट है। एनएसडी से जुड़े कई कलाकारों ने मिलकर फिल्म को एक अलग ही विश्वसनीयता दी है। रघुबीर यादव अपने अनुभव से हर दृश्य को मजबूत बना देते हैं। उनके चेहरे की खामोशी भी संवादों जितना असर छोड़ती है।
सिमाला प्रसाद इस फिल्म की सबसे सुखद सरप्राइज़ हैं। एक आईपीएस अधिकारी होने का अनुभव उनके अभिनय में साफ दिखाई देता है। वह कहीं भी नई कलाकार नहीं लगतीं और पूरे आत्मविश्वास के साथ फिल्म को अपने कंधों पर लेकर चलती हैं। मुकेश तिवारी अपने ट्रेडमार्क अंदाज़ में प्रभाव छोड़ते हैं, जबकि अंजलि पाटिल का काम भी बेहद सधा हुआ है।
इश्तियाक़ ख़ान ने किन्नर निशा के किरदार में ऐसा ट्रांसफॉर्मेशन किया है कि कई बार पहचानना मुश्किल हो जाता है वहीं सदानंद पाटिल ने गुरु माँ के रूप में दमदार मौजूदगी दर्ज कराई है।
निर्देशन
‘द नर्मदा स्टोरी’ असल मायनों में ज़ैग़म इमाम की फिल्म है। उन्होंने सिर्फ एक क्राइम मिस्ट्री नहीं बनाई, बल्कि एक ऐसी दुनिया रची है जहां हर किरदार कुछ छिपा रहा है और हर घटना के पीछे कोई न कोई परत मौजूद है। ज़ैग़म की सबसे बड़ी जीत यह है कि वे फिल्म को पूरी तरह रियल रखते हैं। कहीं भी ओवर-द-टॉप ड्रामा या बेवजह के ट्विस्ट नहीं दिखते। कहानी धीरे-धीरे खुलती है और हर खुलासा दर्शकों की दिलचस्पी को और बढ़ा देता है।
मिसिंग गर्ल्स, पुलिस-पब्लिक रिलेशन, घरेलू हिंसा, किन्नर समाज और नर्मदा संरक्षण जैसे विषयों को उन्होंने बिना भाषण दिए कहानी का हिस्सा बनाया है। यही वजह है कि फिल्म मैसेज भी देती है और एंटरटेन भी करती है।
सबसे बड़ी बात, ज़ैग़म इमाम अपने कलाकारों से कुछ नया निकलवाने में माहिर साबित होते हैं। खासकर सिमाला प्रसाद और इश्तियाक़ ख़ान के करियर के यादगार परफॉर्मेंस इस फिल्म की बड़ी उपलब्धि हैं। क्लाइमैक्स तक निर्देशक दर्शकों को लगातार गेसिंग मोड में रखते हैं और जब अंतिम राज़ खुलता है तो उसका असर देर तक बना रहता है।
‘द नर्मदा स्टोरी’ उन फिल्मों में से है जो सिर्फ़ एक केस सुलझाने की कहानी नहीं सुनाती, बल्कि समाज के कई अनदेखे पहलुओं को भी सामने लाती है। अगर आपको Drishyam, Talvar या रियलिस्टिक इन्वेस्टिगेशन थ्रिलर्स पसंद हैं, तो यह फिल्म आपके लिए है। ज़ैग़म इमाम ने साबित कर दिया है कि मजबूत कहानी, दमदार कलाकार और सधा हुआ निर्देशन मिल जाए तो बिना शोर-शराबे के भी एक थ्रिलर दर्शकों को आख़िरी सीन तक बांधे रख सकती है।
Created On :   13 Jun 2026 3:26 PM IST












