Saif Ali Khan Exclusive: बच्चे जब खुश होते हैं तो लगता है कर्तव्य पूरा किया-सैफ अली खान

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। एक दौर था जब सैफ अली खान को सिर्फ नवाबों वाली शख्सियत और रोमांटिक किरदारों के लिए जाना जाता था। लेकिन वक्त के साथ उन्होंने खुद को हर बार नए अंदाज में साबित किया। 30 साल के अभिनय के सफर में अपने अभिनय से लोगों की प्रशंसा हासिल की है। अब वे अपनी आगामी फिल्म कर्त्तव्य के जरिए एक बार फिर दमदार किरदार में लौट रहे हैं। 15 मई को नेटफ्लिक्स पर रिलीज होने वाली इस फिल्म में सैफ का अंदाज पहले से कहीं ज्यादा गंभीर, गहरा और प्रभावशाली नजर आने वाला है। फिल्म, किरदार और अपनी लंबी सिनेमाई यात्रा को लेकर सैफ अली खान ने दैनिक भास्कर से खुलकर बातचीत की। पेश हैं उनसे हुई खास बातचीत के प्रमुख अंश।
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सवाल- 30 सालों में वर्दी पहली बार पहनी हैं आपने ?
जवाब-ऐसा कह सकते हैं लेकिन पहली बार नहीं है जब मैंने वर्दी पहनी है। दरअसल मेरी एक पुरानी फिल्म ‘मैं खिलाड़ी तू अनाड़ी’ में जब मैंने वर्दी पहनी थी तो मेरे डायरेक्टर ने मुझे कह दिया था कि आगे से फिल्मों में तुम वर्दी मत पहनना। फनी लगते हो,तुममे वो वजन नहीं है। उसके बाद से मैंने पुलिस अफसर वाली फिल्में की लेकिन उसमे वर्दी नहीं पहनी। ‘सेक्रेड गेम्स’ में मैं पुलिस अफसर था जो नेटफ्लिक्स की सबसे लोकप्रिय सीरीज है, ‘विक्रम वेधा’ में भी मैं एक अंडर कवर एजेंट था। ‘एजेंट विनोद’ में एक रॉ ऑफिसर की भूमिका निभाई थी।
सवाल-पवन के किरदार में तो वर्दी पहनी आपने, कैसा लगा ?
जवाब- हां, इस बार मैंने बिलकुल यूनिफॉर्म में पुलिस वाले की भूमिका निभाई है। किरदार को और रोबदार बनाने के लिए ठंडे इलाकों में जो पुलिस अफसर डबल जैकेट पहनते हैं उसका लुक दिया गया है। मुझे वर्दी पहनकर बड़ी जिम्मेदारी का सा अनुभव हुआ। सोचिए, यूनिफॉर्म में आप हैं और आपके पास गन है,कितना स्ट्रांग फील होता होगा। वर्दी में बात तो है, लेकिन उसके साथ मैंने पवन के किरदार पर काफी काम किया। वह एक पुलिस अफसर होने के साथ एक इंसान भी है जो अपने कर्तव्य अच्छी तरह निभाता है। मैंने उस भूमिका में उतरने की कोशिश की।
सवाल; 30 सालों की जर्नी रही है एक्टिंग की? कभी लगा कि किरदार हावी हो रहे हैं ?
जवाब- बिलकुल नहीं, बल्कि अभिनय मेरे लिए एक थेरेपी की तरह है। मैं एक बात आपको अपने बारे में बताता हूं , मेरे बचपन में या जब मैं अपने अर्ली 20 में था तो मेरा मन बहुत अस्थिर था। काफी ड्रामे थे मेरी जिंदगी में। दिमाग हमेशा ऊपर नीचे होता रहता था। कई चीजों में मैं भटकता रहता था। मेरे उस स्वभाव को कंट्रोल किया अभिनय ने। एक्टिंग में आपको सब कुछ बंद करके अपने काम पर फोकस करना पड़ता है। जितने भी ड्रामे चल रहे हो सब साइड और आपका काम एक तरफ। इससे बहुत मदद मिली है मुझे।
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सवाल- क्या आज आप में ठहराव का बदलाव है ?
जवाब-हां एक्टिंग ने मुझे शांत कर दिया है। मेरा दिमाग अब ठंडा रहता है। इसका श्रेय मैं अपनी फिल्मों और एक्टिंग को दूंगा और आजकल तो सच में मेरी जिंदगी में शांति है। मुझे बिलकुल ड्रामे पसंद नहीं आते यही सबसे बड़ा बदलाव आया है क्योंकि मेरे पास एक स्टेबल और खूबसूरत घर है। जहां से मुझे ताकत और स्ट्रेंथ मिलती है। व्यक्ति के पास एक खुश और शांत परिवार होना बहुत जरुरी है। मुझे रोज उसी स्टेबिलिटी के साथ घर से जाना, काम करना और घर आना बेहद पसंद है।
सवाल- बतौर एक्टर लगा कि स्टेबिलिटी, कभी बोरियत भी लाती है ?
जवाब-लोगों को एक ही रूटीन से बोरियत होती होगी लेकिन मुझे तो सुकून लगता है। मुझे एक ही तरह के रोल करने में कोई आपत्ति नहीं है। पुलिस अफसर का रोल आपको भले एक जैसा लगे लेकिन इंसान तो अलग हैं ना। मैंने सुना है, लोग कहते हैं कि को अपनी एक्टिंग का दम दिखाने के लिए आधा पागल होना पड़ता है,मुझे यह लॉजिक समझा नहीं आता। आप कितने कुशल कलाकार हैं यह तो आपकी प्रतिभा पर निर्भर करता है पागलपन पर नहीं।
सवाल-बात कर्तव्य की हो रही है तो ऐसा कोई कर्तव्य है जो आपने अच्छी तरह निभाया है ?
जवाब-(कुछ कहते कहते रुकते हुए)...फिर सोचकर एक दिन क्रिकेट खेल रहा था.. (फिर रुककर) पता नहीं कुछ कहूंगा तो नजर लग जाएगी। डर लगता है, मुझे घर से थप्पड़ पड़ेंगे लेकिन इतना जरूर कहूंगा कि जब मेरे बच्चे मेरे किसी काम से खुश होते हैं और आकर मुझसे इसका इजहार करते हैं, तो बड़ा गर्व का क्षण होता है और लगता है कि मैंने पिता का कर्तव्य अच्छी तरह से निभाया। मेरी मां जब मुझे शाबाशी देती हैं तो लगता है कि अच्छा बेटा हूं। यही दोनों भूमिकाएं मेरी जिंदगी के सबसे महत्वपूर्ण पल हैं जब लगता है कि मैंने अपना कर्तव्य पूरा किया।
Created On :   15 May 2026 11:40 PM IST












