FIFA World Cup 2026: भारतीय फुटबॉल प्रेमियों के जेहन में सिर्फ एक सवाल इंडिया क्यों नहीं खेलता फीफा विश्व कप? क्या है मुख्य वजह जान लीजिए

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। फीफा विश्व कप 2026 का खुमार लोगों के सिर चढ़ के बोल रहा है। लेकिन इसी बीच भारत के फुटबॉल प्रेमियों के जेहन में एक सवाल कौंध रहा है। वह यह है कि फीफा वर्ल्ड कप में भारत क्यों नहीं हिस्सा लेता। इस टूर्नामेंट की शुरुआत सन 1930 में हुई थी इंडिया ने अब तक एक भी विश्व कप नहीं खेला है। सबसे ज्यादा दिल दुखाने वाली यही है कि हम फुटबॉल में कभी क्वालीफाई नहीं कर पाए क्वालीफाई करने के बाद भी हम खुद चले गए।
फीफा विश्व कप 1950 में भारत ने क्वालीफाई कर लिया था। यह उस वक्त की कहानी है जब सिर्फ 34 टीमें हुआ करती थी, तब के समय में क्वालीफिकेशन बिल्कुल अलग हुआ करता था। 34 टीमों ने 16 सीटों के लिए एंट्री कर ली थी, लेकिन दूसरे विश्व युद्ध के बाद की आर्थिक तबाही के चलते कई टीमों ने वापसी कर ली।
एशियाई क्वालीफाइंग ग्रुप में इंडिया को रखा गया था। भारत के साथ वर्मा (अब म्यांमार), इंडोनेशिया और फिलीपींस के साथ रखा गया था। लेकिन तीनों टीमें क्वालीफायर मैच शुरू होने के पहले ही हट गई थी। इसके बाद यह हुआ कि भारत एक भी मैच खेले बिना सीधे विश्व कप के फाइनल में पहुंच गया था। इसके बाद भारत को 22 मई 1950 को रियो डी जनेरियो में हुए ड्रा में भारत को ग्रुप 3 में स्वीडन, पैराग्वे और डिफेंडिंग चैंपियन इटली के साथ डाल दिया गया था।
उसके बाद इंडिया को अगले महीने 28 जून 1950 को अपना विश्व कप मैच खेलना था, लेकिन टीम कभी ब्राजील पहुंची ही नहीं। भारत ने विश्व कप से वापसी कर ली।
आइए आपको बताते हैं कि भारत ने विश्व कप क्यों नहीं खेला था क्योंकि भारत ने ही खेलने से मना कर दिया था। उस फाइनल मैच में भारत को नंगे पैर खेलने के लिए कहा गया था। इस कहानी पर सभी भारतीय फैन यकीन करते हैं लेकिन फुटबॉल इतिहासकारों के मुताबिक, यह एक मिथक से ज्यादा कुछ नहीं है। LA टाइम्स, BBC, इंडियन एक्सप्रेस और भारतीय फुटबॉल टीम के 75 साल पूरे होने पर छपी किताब 'बॉक्स टू बॉक्स' में इस मिथक को बुरी तरह खारिज किया है।
क्या थी असली वजह, भारत क्यों नहीं खेला था फाइनल?
पहली बात भारी यात्रा खर्च
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आजादी के तीन साल बाद भी भारत आर्थिक रूप से कमजोर था। इतनी दूर (ब्राजील) जाने का खर्च अखिल भारतीय फुटबॉल महासंघ (All India Football Federation) के लिए बहुत ज्यादा था।
तैयारियों में कम समय मिलना
न्योता इतना लेट मिला कि टीम को तैयार करना और सारी लॉजिस्टिक्स जुटाना नामुमकिन था।
वर्ल्ड कप की अहमियत नहीं समझी
AIFF उस वक्त ओलंपिक को फुटबॉल का सबसे बड़ा मंच मानता था, न कि वर्ल्ड कप को।
एशिया का सबसे बड़ा फुटबॉल खिलाड़ी कौन था?
भारत साल 1950 और 1960 के दशक में एशियाई फुटबॉल की सबसे बड़ी ताकतों में से एक था। सैयद अब्दुल रहीम को भारतीय फुटबॉल का जादूगर कहा जाता है। उन्होंने साल 1951 में नई दिल्ली में एशियाई खेलों में गोल्ड भी जीता। उसके बाद 1962 में एक बार फिर एशियाई खेलों में गोल्ड जीता। 1956 मेलबर्न ओलंपिक में भारत 4थे स्थान पर रहा। 1964 में एशिया कप में भारत उपविजेता रहा। 1950 से 1960 के दशक के बीच भारत ओलंपिक के लिए लगातार क्वालीफाई करता रहा। साल 1948 लंदन ओलंपिक में फ्रांस को 2-1 से हराने से बस एक कदम दूर रही टीम ने दुनिया को दिखा दिया था कि नंगे पैर भी कोई जंग जीती जा सकती है।
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1970 के बाद इंडिया ने अचानक एक कदम उठाया जिसने सब बदल दिया। फुटबॉट को छोड़कर गुमनामी की ओर वापसी की। जो कभी नहीं करना चाहिए।
एक बार फिर (2026) पुराने जख्म हुए ताजा। विश्व कप के क्वालीफायर मैच शुरू हुए तो भारत ग्रुप ए बहुत मुश्किल था। कतर, कुवैत और अफगानिस्तान। एक बार फिर उम्मीदों की ट्रेन ने पटरी छोड़ दी। कतर के खिलाफ एक मैच ऐसा आया, जिसने सच में दिल तोड़ दिया।
भारत विश्व कप 2026 की क्वालीफिकेशन की रेस से बाहर हो गया। इंडिया के बाहर होने के पहले विवाद भी हुआ रेफरी के फैसले के चलते कतर ने 2-1 से जीत दर्ज की। उस दौरान खुद कोच इगोर स्टीमैक ने खुलकर कहा कि वे निराश हैं। इस हार की वजह से भारत 2027 एशिया कप के ऑटोमैटिक क्वालीफिकेशन से बाहर कर दिया।
फुटबॉल में लगातार हार मिलने की वजह से भारत फीफा रैंकिंग में 139वें स्थान पर पहुंचा दिया है। एशियाई देशों में यह 26वां स्थान है। विश्व कप में ग्राफ गिरने का यह सिलसिसा तब और तेज हो गया जब भारत ने 2026 के यूनिटी कप में लगातार हार झेली और 3-1 से ताजिकिस्तान से शिकस्त खाई। इसके पहले भारत बांग्लादेश और सिंगापुर से भी हार चुका है। इस हार की वजह से भारत उन 26 टीमों में शामिल हो गया है जो एशिया कप के दूसरे राउंड में सीधे क्वालीफाई कर सकती हैं। अगर भारत की 1 या 2 और हार हुई तो उसकी सीट भी छिन सकती है और विश्व कप 2030 के क्वालीफाई करना और भी मुश्किल हो जाएगा।
कोच बॉब ह्यूटन उस समय आग बबूला हो गए जब ईस्ट बंगाल और मोहन बागान ने स्थानीय लीग के लिए अपने प्रमुख खिलाड़ियों को नेशनल कैंप से वापस बुला लिया।
ग्रासरूट्स जहां सबसे बड़ी खाई
दुनिया के बेहतरीन खिलाड़ी 8-10 साल की उम्र से स्ट्रक्चर्ड अकादमियों में ढलते हैं. यहां भारत में क्वालिटी कोच, स्काउटिंग और बेसिक इंफ्रास्ट्रक्चर का अकाल है. ISL पैसे तो खूब लुटाता है, लेकिन उसका एक छोटा सा हिस्सा भी ग्रासरूट्स तक नहीं पहुंचता।
AIFF प्रशासन के भीतर एक अलग ही गुटबाजी चल रही है। ISL और I-लीग के बीच झगड़ा, कानूनी मुकदमेबाजी और राइट्स एग्रीमेंट को लेकर खिंचातानी चलती रहती है। रॉबिन सिंह का तो सीधा सवाल है कि क्या यह पूरी व्यवस्था आत्मनिरीक्षण करने को तैयार है?
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क्या 2030 में भारत विश्व कप खेल पाएगा?
AIFF अब 'नेशनल फुटबॉल फिलॉस्फी' पर अपना ध्यान दे रहा है। FIFA ने भारत की मदद के लिए आर्सेन वेंगर की नियुक्ति की है। ISL अब धीरे-धीरे यूथ डेवलपमेंट पर ध्यान दे रहा है, लेकिन अभी बहुत कुछ बदलना बाकी है।
Created On :   12 Jun 2026 8:14 PM IST










