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Health: पैक्ड फ्रूट जूस के ज्यादा सेवन से डिप्रेशन का खतरा

Health: पैक्ड फ्रूट जूस के ज्यादा सेवन से डिप्रेशन का खतरा

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। भागदौड़ भरी जिंदगी और काम के दबाव के चलते आजकल लोग तेजी से डिप्रेशन का शिकार हो रहे हैं। डिप्रेशन को ट्रिगर करने में हमारी डाइट बहुत बड़ी भूमिका निभाती है। एंग्जाइटी या डिप्रेशन इसलिए सबसे खतरनाक होता है, क्योंकि इसके ​लक्षण शुरुआत में पता नहीं चलते हैं। व्यक्ति तब अपने अंदर बदलाव देखता है, जब डिप्रेशन का लेवल काफी बढ़ जाता है। कुछ फूड ऐसे हैं जो डिप्रेशन के लेवल को और भी ज्यादा बढ़ाते हैं। 

पैक्ड फ्रूट जूस में फलों के असली रस की जगह कई कैमिकलयुक्त पदार्थों और अन्य चीजों का उपयोग किया जाता है। शोधकर्ताओं की एक बड़ी टीम कहती है कि इससे सिर में दर्द, एंग्जाइटी और डिप्रेशन की शिकायत होती है। इसलिए पैक्ड फ्रूट जूस की जगह आपको फलों का सेवन करना चाहिए। भास्कर हिंदी आज आपको कुछ ऐसे फूड्स के बारे में बता रहा है, जो डिप्रेशन के मरीजों को नहीं लेने चाहिए।

डाइट सोडा:
क्या आप यह समझते हैं कि डाइट सोडा में चीनी नहीं होती है, इसलिए यह नुकसानदायक नहीं होता है? अगर हां तो आप गलत हैं। भले ही इसमें मीठा नहीं है, लेकिन ज्यादा डाइट सोडा के सेवन से डिप्रेशन का खतरा बढ जाता है। इससे कमजोरी भी महसूस हो सकती है। कैफीन की बहुत अधिक मात्रा के चलते एंग्जाइटी के साथ थकान भी महसूस होती है।

is drinking diet soda a health risk rs | Diet Soda: डाइट ...

अल्कोहल:
यह चर्चित है कि तनाव में अल्कोहल का सेवन करने से सब ठीक हो जाता है, लेकिन यह पूरी तरह से गलत है। शराब का सेवन न सिर्फ शरीर के महत्तवपूर्ण अंगों को नुकसान पहुंचाते हैं, बल्कि यह डिप्रेशन में हैं तो शराब का सेवन कतई न करें। यह आपके लिए घातक साबित हो सकता है। 

Does alcohol misuse cause depression and mental health problems ...

वाइट टोस्ट:
ज्यादातर लोग नाश्ते में वाइट टोस्ट का सेवन करते हैं, लेकिन आपको यह पता होना चाहिए कि वाइट टोस्ट शरीर में ब्लड शुगर लेवल को बढ़ाता है जो आगे चलकर एंग्जाइटी का कारण बनता है। डॉक्टर्स कहते हैं कि वाइट टोस्ट के अधिक सेवन से डिप्रेशन का भी खतरा बढ़ता है, इसलिए अगर टोस्ट का सेवन करना ही है तो आटे की ब्रेड का सेवन करें।

Is Toast Less Nutritious Than Fresh Bread? | Nutrition Diva

कैचअप:
कैचअप में भारी मात्रा में चीनी होती है। एक चम्मच कैचअप में करीब 4 ग्राम चीनी होती है। मीठा पेट के लिए तो खराब होता ही है। यह डिप्रेशन और एंग्जाइटी का भी कारण बनती है। डॉक्टर सलाह देते हैं कि बाजार का कैचअप खाने से बे​हतर है कि घर पर कैचअप बनाएं और उसमें थोड़ी सी काली मिर्च एंड करें। 

Foods to Avoid If You Have Anxiety or Depression

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छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद का खात्मा ठोस रणनीति से संभव - अभय तिवारी

छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद का खात्मा ठोस रणनीति से संभव - अभय तिवारी

डिजिटल डेस्क, भोपाल। 21वीं सदी में भारत की राजनीति में तेजी से बदल रही हैं। देश की राजनीति में युवाओं की बढ़ती रूचि और अपनी मौलिक प्रतिभा से कई आमूलचूल परिवर्तन देखने को मिल रहे हैं। बदलते और सशक्त होते भारत के लिए यह राजनीतिक बदलाव बेहद महत्वपूर्ण साबित होगा ऐसी उम्मीद हैं।

अलबत्ता हमारी खबरों की दुनिया लगातार कई चहरों से निरंतर संवाद करती हैं। जो सियासत में तरह तरह से काम करते हैं। उनको सार्वजनिक जीवन में हमेशा कसौटी पर कसने की कोशिश में मीडिया रहती हैं।

आज हम बात करने वाले हैं मध्यप्रदेश युवा कांग्रेस (सोशल मीडिया) प्रभारी व राष्ट्रीय समन्वयक, भारतीय युवा कांग्रेस अभय तिवारी से जो अपने गृह राज्य छत्तीसगढ़ से जुड़े मुद्दों पर बेबाकी से अपनी राय रखते हैं और छत्तीसगढ़ को बेहतर बनाने के प्रयास के लिए लामबंद हैं।

जैसे क्रिकेट की दुनिया में जो खिलाड़ी बॉलिंग फील्डिंग और बल्लेबाजी में बेहतर होता हैं। उसे ऑलराउंडर कहते हैं अभय तिवारी भी युवा तुर्क होने के साथ साथ अपने संगठन व राजनीती  के ऑल राउंडर हैं। अब आप यूं समझिए कि अभय तिवारी देश और प्रदेश के हर उस मुद्दे प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से लगातार अपना योगदान देते हैं। जिससे प्रदेश और देश में सकारात्मक बदलाव और विकास हो सके।

छत्तीसगढ़ में नक्सल समस्या बहुत पुरानी है. लाल आतंक को खत्म करने के लिए लगातार कोशिशें की जा रही है. बावजूद इसके नक्सल समस्या बरकरार है।  यह भी देखने आया की पूर्व की सरकार की कोशिशों से नक्सलवाद नहीं ख़त्म हुआ परन्तु कांग्रेस पार्टी की भूपेश सरकार के कदम का समर्थन करते हुए भारतीय युवा कांग्रेस के राष्ट्रीय कोऑर्डिनेटर अभय तिवारी ने विश्वास जताया है कि कांग्रेस पार्टी की सरकार एक संवेदनशील सरकार है जो लड़ाई में नहीं विश्वास जीतने में भरोसा करती है।  श्री तिवारी ने आगे कहा कि जितने हमारे फोर्स हैं, उसके 10 प्रतिशत से भी कम नक्सली हैं. उनसे लड़ लेना कोई बड़ी बात नहीं है, लेकिन विश्वास जीतना बहुत कठिन है. हम लोगों ने 2 साल में बहुत विश्वास जीता है और मुख्यमंत्री के दावों पर विश्वास जताया है कि नक्सलवाद को यही सरकार खत्म कर सकती है।  

बरहाल अभय तिवारी छत्तीसगढ़ मुख्यमंत्री बघेल के नक्सलवाद के खात्मे और छत्तीसगढ़ के विकास के संबंध में चलाई जा रही योजनाओं को जन-जन तक पहुंचाने के लिए निरंतर काम कर रहे हैं. ज्ञात हो कि छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री ने यह कई बार कहा है कि अगर हथियार छोड़ते हैं नक्सली तो किसी भी मंच पर बातचीत के लिए तैयार है सरकार। वहीं अभय तिवारी  सर्कार के समर्थन में कहा कि नक्सली भारत के संविधान पर विश्वास करें और हथियार छोड़कर संवैधानिक तरीके से बात करें।  कांग्रेस सरकार संवेदनशीलता का परिचय देते हुए हर संभव नक्सलियों को सामाजिक  देने का प्रयास करेगी।  

बीते 6 महीने से ज्यादा लंबे चल रहे किसान आंदोलन में भी प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से अभय तिवारी की खासी महत्वपूर्ण भूमिका हैं। युवा कांग्रेस के बैनर तले वे लगातार किसानों की मदद के लिए लगे हुए हैं। वहीं मौजूदा वक्त में कोरोना की दूसरी लहर के बाद बिगड़ी स्थितियों में मरीजों को ऑक्सीजन और जरूरी दवाऐं निशुल्क उपलब्ध करवाने से लेकर जरूरतमंद लोगों को राशन की व्यवस्था करना। राजनीति से इतर बेहद जरूरी और मानव जीवन की रक्षा के लिए प्रयासरत हैं।

बहरहाल उम्मीद है कि देश जल्दी करोना से मुक्त होगा और छत्तीसगढ़ जैसा राज्य नक्सलवाद को जड़ से उखाड़ देगा। देश के बाकी संपन्न और विकासशील राज्यों की सूची में जल्द शामिल होगा। लेकिन ऐसा तभी संभव होगा जब अभय तिवारी जैसे युवा और विजनरी नेता निरंतर रणनीति के साथ काम करेंगे तो जल्द ही छत्तीसगढ़ भी देश के संपन्न राज्यों की सूची में शामिल होगा।