बांग्लादेश: 6 साल की उम्र में जेल, निर्वासन अब पीएम ,जानिए तारिक जिया की संघर्ष भरी सियासी कहानी

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। बीएनपी प्रमुख तारिक रहमान आज पीएम पद की शपथ लेंगे। उनके शपथ लेते ही बांग्लादेश की राजनीति में आज से एक नया अध्याय शुरु हो जाएगा। आपको बता दें तारिक रहमान का जीवन कठिन राजनीतिक चुनौतियों से भरा पड़ा है। राजनीतिक परिवार से जुड़े होने के कारण उन्हें 6 साल की उम्र में जेल जाना पड़ा था। कई साल के निर्वासन और राजनीतिक चुनौतियों के बावजूद तारिक रहमान ने बीएनपी को एकजुट किया और युवा वोटर्स में नई लहर पैदा की। 2026 के आम चुनाव में पार्टी की ऐतिहासिक जीत ने उनकी रणनीतिक क्षमता और करिश्माई नेतृत्व को साबित किया। आज वह बांग्लादेश के प्रधानमंत्री के रूप में शपथ लेंगे, जो देश में नए राजनीतिक दौर का प्रतीक बनकर उभरा है।
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पारिवारिक पहचान के नाम तारिक जिया जो आगे चलकर डार्क प्रिंस के नाम से भी मशहूर हुए थे। तारिक रहमान समर्थकों के लिए जियाउर रहमान की विरासत और प्रतिस्पर्धी लोकतंत्र की बहाली का प्रतीक हैं। आपक बता दें जब बीएनपी के नेतृत्व वाला गठबंधन जमात-ए-इस्लामी के साथ - सत्ता में था, तब तारिक रहमान को डार्क प्रिंस कहा गया ।
नए राजनीतिक दौर में प्रवेश करने जा रहा है बांग्लादेश का नेतृत्व
बांग्लादेश को 35 साल बाद एक नया प्रधानमंत्री तारिक रहमान के रूप में मिलने जा रहा है। तारिक रहमान बांग्लादेश के प्रधानमंत्री के रूप में आज शपथ लेने जा रहे हैं। आपको बता दें बांग्लादेश की राजनीति दशकों से दो मुख्य पारिवारिक‑राजनीतिक विचारधाराओं के इर्द-गिर्द घूमती रही है। छात्र आंदोलन के हिंसक विरोध प्रदर्शन से अपदस्थ प्रधानमंत्री शेख हसीना और पूर्व पीएम दिवंगत खालिदा जिया की विरासत के बीच। तारिक रहमान के नेतृत्व में 2026 के आम चुनाव में बीएनपी की जीत के साथ ही बांग्लादेश का नेतृत्व एक नए राजनीतिक दौर में प्रवेश करने जा रहा है।
20 नवंबर 1965 को जन्मे तारिक रहमान बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी के चीफ हैं। उनकी शुरुआती पढ़ाई ढाका के बीएएफ शाहीन कॉलेज में हुई, उसके बाद उन्होंने ढाका रेजिडेंशियल मॉडल कॉलेज से आगे की पढ़ाई की। उच्च शिक्षा ढाका विश्वविद्यालय से ली। यहीं से उन्होंने राजनीति में सक्रिय भूमिका निभाना शुरू किया।
आपको बता दें साल 2001 में 35 वर्ष की उम्र में तारिक रहमान सक्रिय राजनीति में आए, तारिक रहमान बांग्लादेश के इतिहास में एक राजनीतिक परिवार से नाता रखते हैं। उनके पिता जिया उर रहमान बांग्लादेश के राष्ट्रपति और स्वतंत्रता सेनानी थे, 1981 में उनकी हत्या हो गई थी। उनकी मां बेगम खालिदा जिया 1991 से 1996 व 2001 से 2006 तक बांग्लादेश की पहली महिला पीएम रहीं और बीएनपी की अध्यक्ष थीं।
पार्टी में कोई औपचारिक पद नहीं होने के बावजूद तारिक रहमा ने बीएनपी पर मजबूत पकड़ बनाएं रखी थी। राजनीति में विपक्ष ने उनके तेज उभार को भाई-भतीजावाद और परिवारवाद का नतीजा बताया। 30 दिसंबर को खालिदा के निधन के बाद तारिक बीएनपी अध्यक्ष बनें।
चार साल की उम्र में जेल
आपको बता दें 1971 के मुक्ति संग्राम के समय में केवल 6 साल की उम्र में वे जेल गए थे। बीएनपी पार्टी और उनके समर्थक उन्हें युद्ध का सबसे कम उम्र के बंदियों में शामिल बताकर सम्मान देती है। आगे चलकर छोटी उम्र में संघर्ष और परिवार की विरासत ने उन्हें बांग्लादेश की राजनीति का एक प्रमुख चेहरा बना दिया। अपने राजनीतिक जीवन के शुरुआती दिनों से ही तारिक अपने परिवार की राजनीति में शामिल रहे हैं और बीएनपी के भीतर स्थायी भूमिका निभाई है।
17 महीना जेल ,17 साल का निर्वासन
अवामी लीग के शासनकाल में रहमान पर भ्रष्टाचार, धन शोधन, अवैध संपत्ति और तत्कालीन प्रधानमंत्री शेख हसीना की कथित हत्या की साजिश के आरोप लगे, इनमें उन्हें 17 महीनों तक जेल में रहना पड़ा। उन्होंने इन आरोपों को राजनीति से प्रेरित बताया। रहमान ने जेल में मानसिक और शारीरिक उत्पीड़न का आरोप लगाया। 2008 में अवामी लीग की भारी जीत के बाद वे इलाज के लिए लंदन गए, जहां वह करीब 17 साल रहे। हालांकि उन्होंने पार्टी की रणनीति और संगठन पर नियंत्रण कायम रखा, तारिक रहमान कभी भी राष्ट्रीय संसद के सदस्य नहीं रहे। संगठनात्मक नियंत्रण, पारिवारिक विरासत और पार्टी नेतृत्व से उनका प्रभाव उभरकर सामने आया है।
Created On :   17 Feb 2026 11:04 AM IST












