BRICS Summit 2026: पहलगाम हमले की ब्रिक्स में निंदा से भारत को कूटनीतिक बढ़त, गौरव वल्लभ ने कहा - दुनिया में बढ़ रहा सम्मान

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। भाजपा नेता गौरव वल्लभ ने ब्रिक्स शिखर सम्मेलन को भारत के लिए बड़ी कूटनीतिक उपलब्धि बताया है। उन्होंने कहा कि ब्रिक्स के संयुक्त घोषणा-पत्र में जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले की निंदा होना भारत के लिए महत्वपूर्ण सफलता है। उनके मुताबिक, इससे आतंकवाद के खिलाफ भारत के रुख को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर समर्थन मिला है।
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कांग्रेस की आलोचना पर गौरव वल्लभ का पलटवार
गौरव वल्लभ ने ब्रिक्स सम्मेलन को लेकर कांग्रेस की ओर से की जा रही आलोचना पर भी जवाब दिया। उन्होंने कहा कि कुछ विपक्षी नेता सम्मेलन को लेकर गलत तथ्यों के आधार पर सवाल उठा रहे हैं। उन्होंने अप्रैल 1955 में हुए बांडुंग सम्मेलन का उदाहरण देते हुए कहा कि उस समय पांच देशों ने इसमें हिस्सा लिया था।
उन्होंने कहा कि आज भारत का दुनिया में प्रभाव और सम्मान लगातार बढ़ रहा है। ऐसे समय में देश की उपलब्धियों पर सवाल उठाना समझ से परे है। उन्होंने कहा कि यह किसी एक नेता की सफलता नहीं है, बल्कि भारत की बढ़ती वैश्विक भूमिका और सम्मान से जुड़ा विषय है।
भाजपा नेता ने कहा कि ब्रिक्स में दुनिया की बड़ी आबादी वाले देशों के प्रतिनिधि एक मंच पर जुटे। सम्मेलन में कई अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर चर्चा हुई और अलग-अलग देशों के बीच सहमति बनाने की कोशिश की गई। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 'बैरियर तोड़ने और ब्रिज बनाने' के संदेश का भी जिक्र किया। उनके अनुसार, इसका मतलब देशों के बीच व्यापार, सोच और सामाजिक स्तर पर मौजूद दूरियों को कम करना और सहयोग बढ़ाना है।
गौरव वल्लभ ने कांग्रेस नेता जयराम रमेश और अन्य विपक्षी नेताओं पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि जब भारत को अंतरराष्ट्रीय मंच पर सम्मान मिलता है, तब भी कुछ लोग उस पर सवाल उठाने लगते हैं। उन्होंने ब्रिक्स के संयुक्त घोषणा-पत्र को भारत की सक्रिय कूटनीति का उदाहरण बताया।
पहलगाम हमले की निंदा को बताया बड़ी उपलब्धि
गौरव वल्लभ ने कहा कि ब्रिक्स के संयुक्त घोषणा-पत्र में पहलगाम आतंकी हमले की निंदा होना भारत के लिए बड़ी कूटनीतिक सफलता है। उन्होंने कहा कि दुनिया की बड़ी आबादी का प्रतिनिधित्व करने वाले देशों के साझा मंच से आतंकवादी घटना की निंदा किया जाना महत्वपूर्ण है। उनके अनुसार, इससे पाकिस्तान पर अंतरराष्ट्रीय दबाव बढ़ा है और आतंकवाद के खिलाफ भारत के रुख को मजबूती मिली है।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत ने आतंकवाद के खिलाफ सख्त नीति अपनाई है। भारत-पाकिस्तान संबंधों का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि आतंकवाद और सामान्य रिश्ते एक साथ नहीं चल सकते। उन्होंने 'पानी और खून साथ नहीं चल सकते' वाली नीति का उल्लेख करते हुए कहा कि पाकिस्तान से जुड़े आतंकवाद के मामलों में भारत अपना रुख पहले ही स्पष्ट कर चुका है।
वल्लभ के मुताबिक, आतंकवाद के खिलाफ भारत की नीति और कूटनीतिक प्रयासों का असर अब अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भी दिखाई दे रहा है। ब्रिक्स घोषणा-पत्र में पहलगाम हमले की निंदा को उन्होंने इसी का एक उदाहरण बताया।
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पश्चिम एशिया के संघर्ष पर भी रखी बात
पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष को लेकर चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग की टिप्पणी पर भी गौरव वल्लभ ने प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि ब्रिक्स के संयुक्त घोषणा-पत्र में भी विवादों को शांतिपूर्ण तरीके से सुलझाने की जरूरत पर जोर दिया गया है।
उन्होंने कहा कि किसी भी विवाद का स्थायी समाधान युद्ध नहीं हो सकता। देशों को बातचीत और कूटनीति के जरिए रास्ता निकालना चाहिए। पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष का असर केवल वहां के देशों पर नहीं पड़ता, बल्कि पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था और स्थिरता भी प्रभावित होती है।
उन्होंने कहा कि कुछ देश सीधे तौर पर ऐसे संघर्षों का असर झेलते हैं, जबकि दूसरे देशों पर इसका अप्रत्यक्ष प्रभाव पड़ता है। इसलिए बातचीत के जरिए विवादों का समाधान निकालना जरूरी है। उनके अनुसार, शी जिनपिंग की टिप्पणी और ब्रिक्स घोषणा-पत्र का संदेश भी वैश्विक शांति और स्थिरता की दिशा में बातचीत को बढ़ावा देने का है।
Created On :   13 Sept 2026 1:34 AM IST












