US Midterm Election: मिड टर्म चुनाव में हार से ट्रंप को 3 बड़े नुकसान, फिर भी बने रहेंगे अमेरिका के सर्वशक्तिमान, इस नियम से होंगे सदन के 'बाजीगर'!

मिड टर्म चुनाव में हार से ट्रंप को 3 बड़े नुकसान, फिर भी बने रहेंगे अमेरिका के सर्वशक्तिमान, इस नियम से होंगे सदन के बाजीगर!

डिजिटल डेस्क, दिल्ली। अमेरिका के मिडटर्म (मध्यावधि) चुनाव में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की रिपब्लिकन पार्टी को बड़ा झटका लगा है। कल यानी 3 नवंबर को वोटिंग हुई और आज उसकी काउंटिंग हो रही है। अभी तक आए नतीजों में रिपब्लिकन पार्टी हार रही है। सबसे पहले जानते हैं कि ये मिडटर्म इलेक्शन क्या होते हैं?

अमेरिका में राष्ट्रपति का कार्यकाल 4 साल का होता है। इसी के बीच में जो संसदीय चुनाव होते हैं वो मिडटर्म चुनाव कहलाते हैं। भारत की तरह ही अमेरिका में भी संसद के दो सदन हैं। जैसे भारतीय संसद में लोकसभा और राज्यसभा के रूप में दो सदन होते हैं, वैसे ही अमेरिका में संसद (कांग्रेस) के दो सदन हाउस ऑफ रिप्रेजेंटटेटिव्स (प्रतिनिधी सभा) और सीनेट होते हैं।

बात करें प्रतिनिधि सभा की तो इसकी सीटें राज्यों की आबादी के हिसाब से बंटी हुई हैं। 7.6 लोगों पर एक सीट होती हैं। अमेरिका में कुल 435 प्रतिनिधि सभा सीटें हैं। वहीं, देश के सभी 50 राज्यों से 2-2 सीनेटर का चुनाव होता है। सीनेट की कुल सीटें 100 हैं।

कार्यकाल की बात करें तो प्रतिनिधि सभा के सांसद दो साल के लिए चुने जाते हैं। जबकि सीनेट सांसद का कार्यकाल 6 साल का होता है। हर दो साल में एक तिहाई सांसद चुने जाते हैं। अभी 100 में से 35 सीटों पर चुनाव हुए हैं।

ट्रंप की पार्टी को मिल रही हार

प्रतिनिधी सभा (रिप्रेजेंटेटिव हाउस) में विपक्षी डेमोक्रेटिक पार्टी 203 सीटों पर आगे चल रही है। जबकि रिपब्लिकन पार्टी 108 सीटों पर बढ़त बनाए हुए है। अभी 124 सीटों के रुझान आने बाकी हैं।

वहीं सीनेट की 100 सीटों में से 35 सीटों पर चुनाव हुए हैं। इनमें से 23 के परिणाम अभी तक सामने आए हैं, जिनमें से डेमोक्रेटिक ने 15 और रिपब्लिकन ने 8 सीटें जीती हैं। सीनेट में ओवरऑल 51 सीटों के साथ डेमोक्रेट्स ने बहुमत हासिल कर लिया है।

हार से ट्रंप को क्या नुकसान होगा?

मध्यावधि चुनाव में रिपब्लिकन पार्टी की हार के बाद ट्रंप को कई बड़े नुकसान होंगे। क्योंकि, अमेरिकी कांग्रेस का काम केवल कानून बनाना ही नहीं बल्कि सरकार के कामों पर निगरानी रखना भी होता है। इस चुनाव से पहले कांग्रेस के दोनों सदनों में ट्रंप की पार्टी को बहुमत था। हर कानून, योजना और बड़े फैसले उनकी मर्जी से बनाए और लिए जाते थे।

सरकार के कामकाज पर बढ़ेगी निगरानी

चुनाव में बहुमत मिलने के बाद ओवरसाइट, ज्यूडिशियरी, इंटेलिजेंस और फाइनेंशियल सर्विसेज जैसी कमेटियों का चयन डेमोक्रेट्स करेंगे। इससे ट्रंप सरकार के कामकाज की निगरानी बढ़ेगी। ट्रंप के करीबियों और उनसे जुड़े सरकारी अफसरों के संबंधित जांच शुरू हो सकेंगी। किसी को भी समन भेजकर हाजिर होने व सबूत पेश करने के लिए कहा जा सकेगा।

पसंदीदा नियुक्तियों पर रोक

सीनेट के जरिए ही नए जजों और कैबिनेट मंत्रियों समेत अधिकारियों की भी नियुक्तियां होती हैं। सीनेट में डेमोक्रेट्स को बहुमत मिला हुआ है। ऐसे में नियुक्तियां उनकी पसंद से होंगी न कि ट्रंप की।

सरकारी खजाने पर नियंत्रण होगा कम

अमेरिकी संविधान में बजट या फिर टैक्स से जुड़े फैसले लेना या प्रस्ताव पास करने का अधिकार प्रतिनिधि सभा के पास है। अब जब प्रतिनिधि सभा में डेमोक्रेट्स को बहुमत मिला है तो फिर ट्रंप और उनके बीच सरकारी खर्चों को लेकर खींचतान बढ़ना तय है। इससे सरकारी कामकाज पर बुरा असर पड़ सकता है।

'ब्रम्हास्त्र' से बनेंगे बाजीगर!

ऐसा नहीं है कि कांग्रेस में बहुमत छिनने से राष्ट्रपति के सारी ताकत छिन जाएगी। अमेरिकी राष्ट्रपति को संविधान से कई ऐसी शक्तियां भी मिलीं हैं जो कि बहुमत छिनने के बाद भी बरकरार रहेंगी। जैसे - एग्जीक्यूटिव ऑर्डर जारी करना, कांग्रेस के किसी भी बिल पर वीटो करना, विदेश नीति और सैन्य कार्रवाइयों पर फैसले लेना।

अगर राष्ट्रपति के वीटों को पलटना भी है तो उसके लिए दोनों सदनों में दो तिहाई वोट चाहिए, जो मौजूदा हालात में मुश्किल है।

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