US-Iran War: 5 महीने के अंदर तीन बड़े हमले, आखिर क्यों बार-बार ईरान के केश्म द्वीप को निशाना बना रहा अमेरिका?

डिजिटल डेस्क, दिल्ली। मिडटर्म चुनाव के लिए वोटिंग से पहले अमेरिका ने ईरान के रणनीतिक रूप से अहम माने जाने वाले केश्म द्वीप पर एयरस्ट्राइक की। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, कम से कम पांच धमाके हुए। अमेरिकी सैन्य अधिकारियों की तरफ से भी हमले की पुष्टि की गई है। उन्होंने इसका मकसद ईरान की सैन्य क्षमताओं को कमजोर करना है, जिससे होर्मुज से गुजरने वाले जहाजों को कोई खतरा न हो। ईरानी मीडिया की तरफ से ही अमेरिकी हमले की पुष्टि की गई है।
ऐसे में सवाल उठता है कि अमेरिका ने केश्म द्वीप को ही क्यों निशाना बनाया है? यह द्वीप ईरान के लिए इतना अहम क्यों है? आइए जानते हैं..
केश्म द्वीप फारस की खाड़ी का सबसे बड़ा द्वीप है। यह करीब 1,445 वर्ग किलोमीटर एरिया फैला हुआ है। किसी जमाने में इसकी पहचान फ्री ट्रेड जोन और टूरिस्ट स्पॉट के रूप में होती थी। लेकिन कुछ ही समय पहले यह ईरान के बड़े सैन्य ठिकाने में बदल चुका है।
फोटो सोर्स - गूगल मैप
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज, जिसे दुनिया के सबसे अहम समुद्री मार्गों में से एक माना जाता है। अरब देशों का तेल इसी मार्ग से भारत और चीन समेत अन्य देशों में निर्यात होता है। इस व्यस्ततम समुद्री मार्ग के एंट्री गेट पर मौजूद यह द्वीप रणनीतिक रूप से बेहद अहम माना जाता है। कई वजहें हैं जिनकी वजह से अमेरिका इसे बड़ा सैन्य खतरा मानता है।
केश्म द्वीप पर इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के रडार प्रणालियां, ड्रोन ठिकाने, तटीय मिसाइल बैटरियां और नौसैनिक संसाधन तैनात हैं। यहां सुरंगों और नमक की गुफाओं का बड़ा नेटवर्क है, जिसे मिसाइल सिटी भी कहा जाता है। ईरान ने यहां अपने तटीय मिसाइल सिस्टम और हमला करने वाली वोट छिपा रखी हैं।
अमेरिका के केश्म द्वीप को निशाना बनाने की दूसरी बड़ी वजह यहां मौजूद ईरान के वह सैन्य ठिकाने हैं जो समुद्री रास्तों पर कंट्रोल रखते हैं। इस द्वीप से होर्मुज से गुजरने वाले जहाजों की आवाजाही को रोका जा सकता है।
अमेरिका के मुताबिक, ईरान इस द्वीप का इस्तेमाल होर्मुज स्ट्रेट से निकलने वाले तेल-गैस टैंकरों की आवाजाही को प्रभावित करने के लिए करता है।
अमेरिका ने पहले भी किए हमले
अमेरिका इससे पहले भी केश्म द्वीप पर हमले कर चुका है। उसने इसी साल 30 और 31 मई को ईरान के केश्म द्वीप पर सैन्य ठिकानों का निशाना बनाया था। इसके दो दिन बाद यानि 2 जून को अमेरिका ने द्वीप पर स्थित ईरानी सैन्य ग्राउंड कंट्रोल स्टेशन पर अटैक किया था। इस स्टेशन का इस्तेमाल ड्रोन ऑपरेशन को कंट्रोल करने के लिए होता था।
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