Strait of Hormuz News: खाड़ी तक पहुंचने के लिए भारत को मिला वैकल्पिक रास्ता! होर्मुज स्ट्रेट में तनाव के बाद अब इस पोर्ट से बढ़ रहा कारोबार

खाड़ी तक पहुंचने के लिए भारत को मिला वैकल्पिक रास्ता! होर्मुज स्ट्रेट में तनाव के बाद अब इस पोर्ट से बढ़ रहा कारोबार
मिडिल ईस्ट जंग का असर समुद्री मार्ग स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में देखने को मिला है। इसके बाद भारत समेत अन्य देशों के कारोबार और ऊर्जा सप्लाई को लेकर चिंता बढ़ी हुई है। इस बीच भारत ने एक ऐसे पोर्ट को खोज लिया है।

डिजिटल डेस्क, मस्कट। मिडिल ईस्ट जंग का असर समुद्री मार्ग स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में देखने को मिला है। इसके बाद भारत समेत अन्य देशों के कारोबार और ऊर्जा सप्लाई को लेकर चिंता बढ़ी हुई है। इस बीच भारत ने एक ऐसे पोर्ट को खोज लिया है, जिसकी चर्चा हो रही है। जिसका नाम ओमान का सोहर पोर्ट बताया जा रहा है। यह बंदरगाह होर्मुज स्ट्रेट के बाहर मौजूद है, जहां से भारत आसानी से खाड़ी तक पहुंच सकता है। जो भारत के लिए एक वैकल्पिक मार्ग बन सकता है।

रिपोर्ट्स में बताया जा रहा है कि अगर लंबे समय तक होर्मुज स्ट्रेट के आसपास आवाजाही प्रभावित रहती है, तो ऐसे में भारत सोहर पोर्ट के जरिए अपना कारोबार और सप्लाई चेन को आगे बढ़ाने पर विचार कर सकता है। यानी उसके लिए एक दूसरा रास्ता खुला रहेगा।

सोहर पोर्ट की खासियत

ओमान के गल्फ ऑफ ओमान तट पर सोहर बंदरगाह स्थित है। इसकी खास बात यह है कि यह होर्मुज स्ट्रेट की सबसे संकरी पट्टी के बाहर मौजूद है। यहां पर जब माल पहुंच जाता है, तो इसे समुद्र के साथ सड़क के रास्ते से भी आगे ले जाया जा सकता है। इसके अलावा ओमान और यूएई के बीच रेल कनेक्शन बन रहा है, जो भविष्य में सोहर पोर्ट को खाड़ी के बड़े बाजारों तक पहुंचने में सहायता कर सकता है।

भारत और सोहर के बीच 4 गुना बढ़ा व्यापार?

मीडिया रिपोर्टों की मानें तो पश्चिम एशिया में संकट गहराने के बाद भारत और सोहर के बीच फीडर वेसल सर्विसेज में लगभग 4 गुना बढ़ोतरी की खबर मिली है। युद्ध से पहले तक माल बड़े जहाजों से सीधे गल्फ कोऑपरेशन काउंसिल यानी जीसीसी देशों तक पहुंचता था, लेकिन अब उसका एक हिस्सा पहले ओमान पहुंचता है। इसके बाद यहां से इसे सड़क के रास्ते आगे तक पहुंचाया जा रहा है।

मिली जानकारी के मुताबिक, सोहर पोर्ट और फ्रीजोन में अभी तक 30 अरब डॉलर से ज्यादा का निवेश हो चुका है। इस बंदरगाह की सालाना कार्गो हैंडलिंग क्षमता 7.2 करोड़ टन से ज्यादा की होती है। इसी साल के शुरुआती 6 महीनों में यहां कंटेनर आवाजाही 40 प्रतिशत से बढ़कर 5.45 लाख टीईयू पर पहुंच गई।

Created On :   22 Sept 2026 5:33 PM IST

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