Middle East Tension: यमन और सऊदी पर हूती का बड़ा हमला, 58 सैनिकों की मौत, मिडिल ईस्ट में फिर बढ़ा युद्ध का खतरा

यमन और सऊदी पर हूती का बड़ा हमला, 58 सैनिकों की मौत, मिडिल ईस्ट में फिर बढ़ा युद्ध का खतरा
यमन और सऊदी अरब में हूती हमलों के बाद तनाव बढ़ गया है। कई लोगों की मौत और घायल होने की खबर है।

डिजिल डेस्क, नई दिल्ली।। यमन और सऊदी अरब में गुरुवार को बड़े हमले हुए। इन हमलों की जिम्मेदारी ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों पर लगाई जा रही है। यमन में सेना के ठिकानों को मिसाइल और ड्रोन से निशाना बनाया गया। इस हमले में 58 सैनिकों की मौत हो गई और कई अन्य घायल हो गए। वहीं, सऊदी अरब के नजरान शहर में भी हमला हुआ, जिसमें कई आम लोग जख्मी हुए। हमले के बाद कुछ जगहों पर आग लग गई। बचाव दल तुरंत मौके पर पहुंचा और राहत का काम शुरू किया। इन घटनाओं के बाद पूरे इलाके में तनाव और बढ़ गया है।

यमन और सऊदी में क्या हुआ?

यमन के रक्षा मंत्रालय के अनुसार, सेना के ठिकानों पर बैलिस्टिक मिसाइल और ड्रोन से हमला किया गया। इसमें 58 सैनिकों की जान चली गई। कई अन्य घायल हुए हैं। मंत्रालय ने कहा कि इस हमले का जवाब सही समय पर दिया जाएगा। दूसरी तरफ सऊदी अरब के नजरान शहर में भी हमला हुआ। इसमें 11 लोग घायल हुए, जिनमें सऊदी, यमन, मिस्र और पाकिस्तान के नागरिक शामिल हैं। एक चार साल का बच्चा भी घायल हुआ। कई जगह आग लगी, जिसे बाद में काबू में किया गया।

पिछले 24 घंटे में क्या-क्या बदला?

अमेरिका और ईरान के बीच होर्मुज स्ट्रेट को लेकर समझौते की चर्चा तेज हो गई है। अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने कहा कि दोनों देशों के बीच बातचीत आगे बढ़ रही है। दूसरी ओर, होर्मुज और बाब-अल-मंदेब समुद्री रास्तों से गुजरने वाले जहाजों की संख्या काफी कम हो गई है। बड़े शिपिंग संगठनों ने चेतावनी दी है कि अगर यहां नया शुल्क लगाया गया तो दुनिया भर में सामान महंगा हो सकता है। इसी बीच लेबनान में हुए धमाके में दो इजराइली सैनिकों की भी मौत हुई है।

हूती विद्रोही हमले क्यों बढ़ा रहे हैं?

हूती यमन का एक शिया विद्रोही संगठन है। यह कई सालों से यमन की सरकार और सऊदी समर्थित गठबंधन के खिलाफ लड़ रहा है। अमेरिका और उसके सहयोगी देशों का कहना है कि ईरान हूतियों को हथियार और दूसरी सैन्य मदद देता है। जब ईरान पर दबाव बढ़ता है, तब हूती भी अपने हमले तेज कर देते हैं। माना जाता है कि ऐसा करने से विरोधी देशों का ध्यान कई जगह बंट जाता है और ईरान पर सीधा दबाव कुछ कम हो जाता है।

Created On :   7 Aug 2026 12:08 PM IST

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