अमेरिकी न्यूज: संसद से रूस- ईरान पर नए प्रतिबंध लगाने वाले विधेयक को मिली मंजूरी, भारत-चीन को लेकर क्या है विधेयक में खास?

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। अमेरिकी प्रतिनिधि सभा ने रूस-ईरान पर शिकंजा कसने के लिए एक नया विधेयक को मंजूरी दी है। 262 सांसदों ने पक्ष में और 159 ने विरोध में मतदान किया। 61 पन्नों वाले विधेयक को अब यूएस प्रेसिडेंट ट्रंप के पास हस्ताक्षर के लिए भेजा गया है। यह विधेयक पिछले महीने अमेरिकी सीनेट में भी 86-11 वोटों से पारित हो चुका है। अमेरिकी प्रतिबंधों का घोषित उद्देश्य रूस की उन आय के स्रोतों को कम करना है, जिनसे यूक्रेन के खिलाफ 2022 से जारी युद्ध को फंड किया जा रहा है।
यह भी पढ़े -अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने प्रधानमंत्री मोदी के मादक पदार्थों से निपटने के प्रयास की सराहना की
प्रतिनिधि सभा के कुछ वरिष्ठ डेमोक्रेट सांसदों ने विधेयक पर आपत्ति जताई। डेमोक्रेट सांसदों की चिंता थी कि इससे ट्रंप को बहुत व्यापक शुल्क लगाने की पॉवर मिल सकती हैं और इनका गलत इस्तेमाल हो सकता है।
आपको बता दें विधेयक का नाम दिवंगत हुए सीनेटर लिंडसे ग्राहम के सम्मान में लिंडसे ओ. ग्राहम सैंक्शनिंग रूस एंड ईरान एक्ट ऑफ 2026 है। लिंडसे ग्राहम के सम्मान में रखा गया है, जो रूस के खिलाफ प्रतिबंधों के प्रमुख समर्थक थे।
यह भी पढ़े -ईरान-अमेरिका तनाव के बीच ट्रंप का बड़ा दावा, जॉर्डन स्थित एयरबेस पर हुए हमले को लेकर किया साफ
विधेयक से सबसे अहम निशाना रूस का ऊर्जा क्षेत्र है। इस विधेयक का मकसद रूस से तेल और गैस खरीदने वाले बड़े देशों पर आर्थिक दबाव बनाकर उसकी ऊर्जा से होने वाली आमदनी को घटाना है। इस विधेयक से अमेरिकी राष्ट्रपति को रूस से बड़ी मात्रा में तेल और गैस खरीदने वाले तीसरे देशों के सामान पर टैरिफ शुल्क लगाने का अधिकार मिल सकता है। इसका सबसे अधिक असर चीन और भारत जैसे देश पर पड़ सकता हैं। क्योंकि ये दोनों ही देश रूस से ऊर्जा खरीदने वाले बड़े देशों में शामिल हैं।
Created On :   17 Sept 2026 12:00 PM IST












