US-Israel Iran War: पीएम मोदी और ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान की फोन पर बातचीत, मिडिल ईस्ट संघर्ष समेत इन मुद्दों पर की चर्चा

पीएम मोदी और ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान की फोन पर बातचीत, मिडिल ईस्ट संघर्ष समेत इन मुद्दों पर की चर्चा
अमेरिका-इजरायल और ईरान की जंग की वजह से मिडिल ईस्ट में तनाव काफी बढ़ा हुआ है। इस बीच, भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान के फोन पर बातचीत की है।

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। अमेरिका-इजरायल और ईरान की जंग की वजह से मिडिल ईस्ट में तनाव काफी बढ़ा हुआ है। इस बीच, भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान के फोन पर बातचीत की है। इसके बाद पीएम मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर बताया कि उनकी ईरान के राष्ट्रपति पेजेशकियान से क्षेत्रीय गंभीर स्थिति को लेकर चर्चा हुई। इस दौरान उन्होंने तनाव बढ़ने, नागरिकों की मौत समेत बुनियादी ढांचों को हुए नुकसान को लेकर गहरी चिंता व्यक्त की है।

डिप्लोमेसी की अपील

प्रधानमंत्री ने आगे अपनी पोस्ट में बताया, "भारतीय नागरिकों की सुरक्षा और ऊर्जा के निर्बाध परिवहन की आवश्यकता भारत की सर्वोच्च प्राथमिकता बनी हुई है। मैंने शांति और स्थिरता के प्रति भारत की प्रतिबद्धता को दोहराया और संवाद, कूटनीति का आग्रह किया।"

बता दें कि मिडिल ईस्ट में जारी जंग के असर अब ग्लोबल तेल मार्केट पर देखने को मिल रहा है। भारत में संभावित एलपीजी गैस की कमी को लेकर केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने संसद में एक बयान दिया है। इस दौरान उन्होंने कहा, "स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से 20 फीसदी आवाजाही प्रभावित है। देश में अभी पर्याप्त गैस है। गैस सिलेंडर को लेकर पैनिक होने की जरूरत नहीं है।"

संकट काल को लेकर क्या बोले?

देश के कई राज्यों में लोग एलपीजी सिलेंडर के लिए लंबी-लंबी कतारों में खड़े हुए नजर आ रहे हैं। इस पर पीएम मोदी का कहना है कि उन्हें 140 करोड़ भारतीयों पर पूरा भरोसा है कि कोविड-19 की तरह इस संकट से भी उबर जाएंगे। उन्होंने यह भी कहा, "कुछ लोग एलपीजी को लेकर पैनिक क्रिएट करने की कोशिश कर रहे हैं। बिना कोई राजनीतिक मुद्दा उठाए मैं कहूंगा कि वे खुद को बेनकाब कर रहे हैं। पश्चिम एशिया में संघर्ष से उत्पन्न मौजूदा संकट से निपटने में हर किसी की महत्वपूर्ण भूमिका है- चाहे वह राजनीतिक दल हों, मीडिया हो, युवा हों, शहर हों या गांव हों।"

ईरान से नहीं मिली अनुमति

समाचार एजेंसी पीटीआई ने अपनी रिपोर्ट में बताया कि भारत स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के रणनीतिक शिपिंग से भारतीय ध्वज वाले लगभग 28 व्यापारिक जहाजों को भारत लाने के लिए मार्ग सुनिश्चित कर रहे हैं। इसके लिए वह ईरान के साथ लगातार संपर्क बनाए हुए हैं। हालांकि, ईरान ने पिछले 4-5 दिनों में किसी भी भारतीय ध्यज वाले कमर्शियल टैंकर को होर्मुज वाले रास्ते से निकलने की अनुमति नहीं दी है।

शिपिंग मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि मौजूदा समय में स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के पश्चिम में भारतीय ध्वज वाले कुल 24 जहाजों पर 677 नाविक मौजूद है, जो सभी भारतीय बताए गए हैं। वहीं, रणनीति जलमार्ग के पूर्व में 101 भारतीय नाविकों के चार जहाज तैनात बनाए गए हैं। भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल का कहना है, "हाल के दिनों में विदेश मंत्री एस जयशंकर और ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची के बीच तीन बार बातचीत हुई है। आखिरी वार्ता में शिपिंग सिक्योरिटी और भारत की ऊर्जा सुरक्षा से संबंधित मुद्दों पर चर्चा हुई। इससे आगे कुछ भी कहना जल्दबाजी होगी।"

Created On :   13 March 2026 12:38 AM IST

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