US-Iran Deal: अमेरिका से पीस डील के बाद ईरान की आई पहली प्रतिक्रिया, ग्राउंड लेवल पर लागू होने की जताई उम्मीद

अमेरिका से पीस डील के बाद ईरान की आई पहली प्रतिक्रिया, ग्राउंड लेवल पर लागू होने की जताई उम्मीद
मिडिल ईस्ट में 108 दिनों से चल रही अमेरिका-ईरान के बीच जंग आखिरकार समाप्त हो गई। दोनों देशों के बीच में पीस डील पर अंतिम बातचीत बन गई।

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। मिडिल ईस्ट में 108 दिनों से चल रही अमेरिका-ईरान के बीच जंग आखिरकार समाप्त हो गई। दोनों देशों के बीच में पीस डील पर अंतिम बातचीत बन गई। ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन ने डिजिटल प्लेटफॉर्म से ईरान-अमेरिका समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए हैं। ऐसे में अब ईरान की ओर से पहली प्रतिक्रिया सामने आई है।

ट्रंप ने फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों की मौजूदगी में किए थे हस्ताक्षर

इस संबंध में ईरान की सरकारी न्यूज एजेंसी आईआरएनए के मुताबिक, ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने बयान जारी किया। उन्होंने कहा, 'दोनों देशों के राष्ट्रपतियों के साइन के साथ इस्लामाबाद समझौते के मसौदे को अंतिम रूप दे दिया गया है। अब यह देखने का समय है कि इस समझौते को जमीन पर कैसे लागू किया जाता है।'

बता दें, अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने फ्रांस में इमैनुएल मैक्रों की मौजूदगी में इस एमओयू पर हस्ताक्षर किए हैं। ट्रंप ने बुधवार को ईरान के साथ पीस डील को एक ऐतिहासिक बताया। उन्होंने कहा कि पीस डील के जरिए मौजूदा संघर्ष समाप्त हो गया है। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज फिर से खुल गया है और यह तय हो गया है कि ईरान कभी परमाणु हथियार हासिल नहीं कर पाएगा।

समझौते में ईरान ने परमाणु हथियार न बनाने का किया दावा

अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा, "रविवार (14 जून) को हमने ईरान के साथ एक समझौता किया, जिससे वे सभी लक्ष्य पूरे हुए जिन्हें हम हासिल करना चाहते थे। संघर्ष खत्म करना, स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को फिर से खोलना और ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने से रोकना, यही इस समझौते का मकसद था।"

ट्रंप ने कहा कि इस समझौते में सबसे खास बात ईरान का परमाणु हथियार न बनाने का दावा करना है। ईरान ने सहमति दी है कि वह न तो परमाणु हथियार बनाएगा और न ही उसे हासिल करेगा। उन्होंने कहा कि यह समझौता परमाणु हथियार न बनाने और न खरीदने, दोनों पर लागू होता है। इस दौरान ट्रंप ने चेतावनी दी कि अगर ईरान इस समझौते का पालन नहीं करता है तो फिर से सैन्य कार्रवाई हो सकती है।

ट्रंप ने कहा, 'अगर वे इस समझौते का सम्मान नहीं करते या कुछ ऐसी बातें हैं जो इसमें शामिल नहीं हैं तो यह एक समझौता ज्ञापन है। अगर वे इसे नहीं मानते तो शायद हमें फिर से उन पर बमबारी करनी पड़ेगी, जब तक वे इसे नहीं मानते।'

Created On :   18 Jun 2026 6:04 PM IST

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