वीजा मामला: अमेरिका के टेक्सास में एक भारतीय कर्मचारी ने अपने मालिक के खिलाफ कोर्ट में केस किया दर्ज

अमेरिका के टेक्सास में एक भारतीय कर्मचारी ने अपने मालिक के खिलाफ कोर्ट में केस किया दर्ज
भारतीय कर्मचारी की लीगल टीम ने अमेरिकी कंपनी पर मानव तस्करी और जबरन मजदूरी जैसे गंभीर आरोप लगाए हैं।

डिजिटल डेस्क, भोपाल। अमेरिका के टेक्सास में रह रहे एक भारतीय कर्मचारी ऋषिकेश राज मीसाला ने अपने कंपनी मालिक के खिलाफ कोर्ट में केस दर्ज किया है। अब ऋषिकेश की लीगल टीम ने कंपनी पर मानव तस्करी और जबरन मजदूरी जैसे गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि कंपनी को ऋषिकेश के रुके हुए मानदेय और जबरन लिए गए पैसों के बदले करीब 97,248 डॉलर चुकाने चाहिए।

ये केस ऐसे टाइम पर आया है जब अमेरिका में H-1B वीजा को लेकर काफी चर्चा हो रही है, भारत के लोग वीजा का सबसे ज्यादा लाभ उठाते हैं। साल 2024 के आंकड़ों के अनुसार, अमेरिका में मंजूर होने वाले कुल H-1B वीजा में से 71 परसेंट भारतीय नागरिकों को मिले हैं। यह प्रोग्राम तकनीक और इंजीनियरिंग फील्ड़ की कंपनियों के लिए बहुत अहम माने जाते है

आपको बता दें कर्मचारी ने मालिक पर आरोप लगाया है कि उसके मालिक ने नौकरी और वीजा बचाने के एवज में उससे करीब 94 लाख रुपये (एक लाख डॉलर) की मांग की। भारतीय कर्मचारी का कहना है कि उनके भारतीय-अमेरिकी मालिक साई जितेंद्र कलागरा ने उन पर रकम देने के लिए भारी मानसिक दबाव बनाया। कर्मचारी ने अपनी शिकायत में ये भी बताया है कि कंपनी ने वेतन से जुड़े दस्तावेज भी रोक लिए। जो कि नौकरी बदलने या वीजा रिन्यू कराने के लिए बहुत जरूरी होते हैं। बताया जा रहा है कि वीजा खोने के डर से 8,800 डॉलर नकद भी दिए थे।

शिकायत में जैसा मीसाला ने बताया है कि उसने मालिक के खिलाफ जैसे ही रकम को लेकर सवाल उठाए तो उन्हें डराया गया, धमकाया गया। मालिक ने उन्हें धमकी दी कि वह उनकी शिकायत अमेरिकी इमिग्रेशन विभाग (ICE) से कर देगा। मीसाला ने अपनी शिकायत में ये भी कहा है कि मालिक उनके पिता को भी नुकसान पहुंचाने की धमकी दी है। हालांकि अभी तक कोर्ट में ये आरोप प्रूफ नहीं हुए हैं।

आपको बता दें ऋषिकेश साल 2023 में अपनी स्नातकोत्तर डिग्री पूरी करने के बाद स्टूडेंट वीजा पर यूएस आए थे। बाद में उन्हें एक ऐसी कंपनी में नौकरी मिली जो H-1B वीजा देती है। यह वीजा US कंपनियों को विदेशी पेशेवरों को काम पर रखने की अनुमति देता है। ऋषिकेश को उम्मीद थी कि इस नौकरी से उन्हें US में पक्की नागरिकता मिल जाएगी। कंपनी में शामिल होने के बाद उन्हें बेंच पर रख दिया गया। इसका मतलब है कि कर्मचारी के पास कोई सक्रिय प्रोजेक्ट नहीं है। मीसाला से मोटी रकम इसलिए मांगी जा रही थी, ताकि कागजों पर उनकी नौकरी चलती रहे और उनका वीजा सुरक्षित रहे।

Created On :   17 Jun 2026 9:49 AM IST

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