US Israel Iran Strike: स्ट्रेट ऑफ होर्मुज बना डेंजर! करोड़ों बैरल तेल की होती है यहीं से सप्लाई, जानें भारत और ड्रैगन को क्या होगा नुकसान?

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज बना डेंजर! करोड़ों बैरल तेल की होती है यहीं से सप्लाई, जानें भारत और ड्रैगन को क्या होगा नुकसान?
मिडिल ईस्ट में हो रहे युद्ध के चलते दिन पर दिन तनाव बढ़ रहा है। इसी बीच होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों की आवाजाही भी कम हो गई है। ऐसे में चलिए जानते हैं कि इसके बंद होने से भारत और चीन को क्या नुकसान होगा।

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। मिडिल ईस्ट में तनाव लगातार बढ़ रहा है। इसका सीधा असर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज यानि होर्मुज जलडमरूमध्य में साफ देखने को मिल रहा है। दुनिया का यह अहम समुद्री रास्ता, जो कभी सुरक्षित और व्यस्त व्यापारिक मार्ग माना जाता था, अब हाई-रिस्क जोन बनता जा रहा है। हाल के दिनों में यहां कई जहाजों पर ड्रोन और मिसाइल से हमले होने की खबर सुनाई दी थी। कुछ तेल टैंकरों को नुकसान पहुंचा भी था और एक क्रू मेंबर की मौत की भी जानकारी मिली थी।

क्यों अहम है होर्मुज जलडमरूमध्य?

होर्मुज जलडमरूमध्य ईरान की दक्षिणी सीमा के पास स्थित एक संकरा समुद्री रास्ता है, जो फारस की खाड़ी को ओमान की खाड़ी और अरब सागर से जोड़ता है। दुनिया की कुल तेल सप्लाई का करीब 20 प्रतिशत हिस्सा और बड़ी मात्रा में एलएनजी (तरलीकृत प्राकृतिक गैस) इसी रास्ते से होकर गुजरती है। हर दिन लगभग 1.5 करोड़ बैरल तेल इसी रास्ते से एक्सपोर्ट होता है। इसमें सऊदी अरब की हिस्सेदारी सबसे ज्यादा 38 प्रतिशत है। इसके अलावा इराक (22%), यूएई (15%), ईरान (11%), कुवैत (9%) और कतर (5%) भी इसी रास्ते पर निर्भर हैं। वहीं, कच्चे तेल के इंपोर्ट की बात करें तो चीन (33%), भारत (13%), दक्षिण कोरिया (12%) और जापान (11%) जैसे बड़े एशियाई देश इसी रास्ते पर निर्भर हैं।

जहाजों के आने-जाने में गिरावट

शिपिंग रिपोर्ट्स के मुताबिक, आम तौर पर रोज करीब 107 जहाज इस रास्ते से गुजरते हैं। लेकिन 1 मार्च को सिर्फ 19 जहाजों की आवाजाही दर्ज की गई है। एक दिन पहले जहां 22 सुपरटैंकर गुजरे थे, वहीं 1 मार्च को यह संख्या घटकर सिर्फ 4 रह गई थी। जो जहाज गुजर रहे हैं, वे भी धीमी रफ्तार से चल रहे हैं। जिसके चलते माल पहुंचने में ज्यादा समय लग रहा है और सप्लाई चेन पर दबाव बढ़ रहा है। ऐसे हालात में माल ढुलाई की लागत और बीमा प्रीमियम बढ़ जाते हैं, जिसका असर सीधे तेल की कीमतों पर पड़ सकता है।

भारत और चीन पर क्या असर?

भारत खाड़ी देशों से बड़ी मात्रा में कच्चा तेल और गैस आयात करता है, जो इसी जलमार्ग से होकर आता है। अगर सप्लाई में रुकावट आती है तो देश में पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ सकते हैं, रुपए पर दबाव आ सकता है और महंगाई बढ़ने की भी संभावनाएं हैं। चीन भी खाड़ी क्षेत्र पर निर्भर है, लेकिन उसके पास रूस और मिडिल एशिया से पाइपलाइन कनेक्शन का ऑप्शन है और उसके पास बड़ा भंडार भी है। ऐसे में उसे कुछ हद तक राहत मिल सकती है।

Created On :   3 March 2026 5:37 PM IST

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