Abhyanga Snan Benefits: नरक चतुर्दशी पर क्यों किया जाता है अभ्यंग स्नान, जानें सेहत के लिए इसके फायदे, सही तरीका और जरूरी सावधानियां

नरक चतुर्दशी पर क्यों किया जाता है अभ्यंग स्नान, जानें सेहत के लिए इसके फायदे, सही तरीका और जरूरी सावधानियां
दिवाली का त्योहार पांच दिनों तक मनाया जाता है। इसकी शुरुआत धनतेरस से होती है और समापन भाई दूज के साथ होता है। इस दौरान नरक चतुर्दशी यानी छोटी दिवाली का विशेष महत्व है। इसे रूप चौदस और काली चौदस के नाम से भी जाना जाता है।

डिजिटल डेस्क, भोपाल। दिवाली का त्योहार पांच दिनों तक मनाया जाता है। इसकी शुरुआत धनतेरस से होती है और समापन भाई दूज के साथ होता है। इस दौरान नरक चतुर्दशी यानी छोटी दिवाली का विशेष महत्व है। इसे रूप चौदस और काली चौदस के नाम से भी जाना जाता है। इस दिन सुबह सूर्योदय से पहले अभ्यंग स्नान करने की परंपरा है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन अभ्यंग स्नान करने से व्यक्ति को पापों से मुक्ति मिलती है।

अभ्यंग स्नान का मतलब शरीर पर तेल लगाकर स्नान करना है। इसमें नहाने से पहले पूरे शरीर की हल्के हाथों से तेल मालिश की जाती है। आयुर्वेद में भी तेल मालिश यानी अभ्यंग को शरीर की देखभाल का एक अच्छा तरीका माना गया है। आइए जानते हैं अभ्यंग स्नान का महत्व, इसके फायदे और इसे करने का सही तरीका।

अभ्यंग स्नान के सेहत के लिए फायदे

त्वचा को रखता है मुलायम

तेल मालिश करने से त्वचा में नमी बनाए रखने में मदद मिलती है। इससे रूखापन कम हो सकता है और त्वचा मुलायम महसूस होती है।

मांसपेशियों को मिलती है राहत

हल्के हाथों से तेल मालिश करने से शरीर की मांसपेशियों को आराम मिल सकता है। खासतौर पर थकान महसूस होने पर यह फायदेमंद हो सकता है।

तनाव कम करने में मददगार

मालिश के दौरान शरीर को आराम मिलता है। इससे तनाव कम करने और मन को शांत महसूस कराने में मदद मिल सकती है।

बेहतर नींद में सहायक

आरामदायक तेल मालिश से शरीर रिलैक्स महसूस करता है। इससे कुछ लोगों को अच्छी नींद लेने में मदद मिल सकती है।

त्वचा का रूखापन कम करे

सर्दियों की शुरुआत में त्वचा अक्सर रूखी होने लगती है। ऐसे में तेल मालिश त्वचा की नमी बनाए रखने में मदद कर सकती है।

अभ्यंग स्नान करने का सही तरीका

सही तेल चुनें- अभ्यंग स्नान के लिए तिल का तेल, नारियल तेल या सरसों के तेल का इस्तेमाल किया जा सकता है। अपनी त्वचा के अनुसार तेल चुनें।

तेल को हल्का गुनगुना करें- मालिश के लिए तेल को थोड़ा गर्म कर लें। ध्यान रखें कि तेल बहुत ज्यादा गर्म न हो।

पूरे शरीर पर लगाएं- हाथ-पैर, गर्दन, कंधे और शरीर के अन्य हिस्सों पर हल्के हाथों से तेल लगाएं।

कुछ देर इंतजार करें- तेल लगाने के बाद करीब 10 से 15 मिनट तक इंतजार करें, ताकि त्वचा को तेल सोखने का समय मिल सके।

गुनगुने पानी से नहाएं- इसके बाद हल्के गुनगुने पानी से स्नान करें। तेल हटाने के लिए माइल्ड साबुन या उबटन का इस्तेमाल कर सकते हैं।

अभ्यंग स्नान करते समय रखें ये सावधानियां

- बहुत गर्म तेल का इस्तेमाल न करें।

- त्वचा पर खुजली, एलर्जी या घाव होने पर तेल लगाने से बचें।

- फिसलन से बचने के लिए बाथरूम में सावधानी रखें।

- बहुत ज्यादा दबाव डालकर मालिश न करें।

- स्नान के लिए बहुत गर्म पानी का इस्तेमाल न करें।

- अगर किसी तेल से एलर्जी है तो उसका इस्तेमाल न करें।

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