Asaduddin Owaisi News: 'अगर पुराने कागज नहीं हैं तो...', SIR को लेकर ओवैसी ने दिखाए तीखे तेवर, चुनाव आयोग पर उठाए सवाल

अगर पुराने कागज नहीं हैं तो..., SIR को लेकर ओवैसी ने दिखाए तीखे तेवर, चुनाव आयोग पर उठाए सवाल
SIR विवाद के बीच AIMIM संसद असदुद्दीन ओवैसी ने अपनी राय रखी है। उन्होंने पुराने रिकॉर्ड से नए मतदाताओं की मैपिंग को लेकर कई अहम सवाल किए हैं।

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। हैदराबाद के सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने एसआईआर को लेकर चुनाव आयोग पर कई सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने कहा है कि वह पहले से ही इस प्रक्रिया के खिलाफ विरोध करते आ रहे हैं। उनके मुताबिक, एसआईआर के कारण गरीब औऱ आम लोगों को पुराने कागज जुटाने में दिक्कत हो रही है। ओवैसी ने यह भी सवाल खड़े किए हैं कि जिन लोगों का नाम अंतिम मतदाता सूची में नहीं है, उनके बच्चों को आगे चलकर अपना नाम जुड़वाने में परेशानी हो सकती है। उन्होंने चुनाव आयोग से उसके फैसलों की प्रक्रिया साफ करने की मांग की है। ओवैसी ने आयोग के अंदर अधिकारियों की सामने आ रही अलग-अलग राय और फैसलों में बहुमत के इस्तेमाल पर भी सवाल उठाया है।

SIR को लेकर ओवैसी ने जताई चिंता

ओवैसी ने कहा है कि पुराने दस्तावेज निकालना हर व्यक्ति के लिए आसान नहीं है। उन्होंने खासकर गरीब परिवारों की परेशानी का मुद्दा उठाया है। उनका कहना है कि कई लोगों के पास पुराने रिकॉर्ड नहीं हो सकते हैं और उन्होंने बच्चों के भविष्य पर भी सवाल किया है। अगर माता-पिता का नाम अंतिम सूची में नहीं है, तो उनके 18 साल के होने पर मतदाता सूची में नाम जोड़ने के समय पुराने रिकॉर्ड से जोड़ना मुश्किल हो सकता है।

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चुनाव आयोग के फैसलों पर मांगी जानकारी

ओवैसी ने कहा है कि सुप्रीम कोर्ट ने SIR को सही माना है, लेकिन चुनाव आयोग को अपने फैसलों की प्रक्रिया के बारे में जानकारी देनी चाहिए। उन्होंने पूछा कि आयोग में बड़े फैसले सभी की सहमति से लिए गए या बहुमत के आधार पर। उन्होंने दो चुनाव आयुक्तों की ओर से जताई गई असहमति का भी जिक्र किया और कहा कि इस बारे में लोगों को जानकारी मिलनी चाहिए।

बहुमत से फैसला लेने का क्या नियम है?

चुनाव आयोग में मुख्य चुनाव आयुक्त के साथ दो चुनाव आयुक्त होते हैं। कानून के अनुसार, कोशिश होनी चाहिए कि आयोग के फैसले सभी की सहमति से लिए जाएं। अगर अधिकारियों की राय अलग हो जाती है, तो बहुमत के आधार पर फैसला लिया जा सकता है। ओवैसी का सवाल है कि अगर किसी मामले में मत अलग थे, तो किन फैसलों में बहुमत का सहारा लिया गया और इसकी जानकारी सार्वजनिक क्यों नहीं की गई।

Created On :   27 Sept 2026 11:44 AM IST

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