Cockroach Janata Party: अगर सारे कॉकरोच एक साथ आ जाएं तो... इस एक लाइन ने कैसे खींचा युवा नेटिजन्स का ध्यान, चार दिन में जुड़े एक मिलियन से ज्यादा फॉलोअर्स, ‘आलसी-बेरोजगारों’ की बनी आवाज

अगर सारे कॉकरोच एक साथ आ जाएं तो... इस एक लाइन ने कैसे खींचा युवा नेटिजन्स का ध्यान, चार दिन में जुड़े एक मिलियन से ज्यादा फॉलोअर्स, ‘आलसी-बेरोजगारों’ की बनी आवाज
सोशल मीडिया पर इन दिनों 'कॉकरोच जनता पार्टी' को लेकर जबरदस्त चर्चा जारी है। मीम्स से लेकर राजनीतिक बहस और युवाओं के गुस्से के बीच इस डिजिटल पार्टी ने बहुत ही कम समय में अपनी एक अलग पहचान बना ली है।

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। बीते कुछ दिनों से सोशल मीडिया पर एक नाम हर जगह तेजी से वायरल हो रहा है "कॉकरोच जनता पार्टी"। पहले लोगों को लगा कि यह सिर्फ मजाक या मीम वाला कोई ट्रेंड है, लेकिन देखते ही देखते लाखों लोग इससे जुड़ने लगे। इंस्टाग्राम और एक्स पर इस नाम से वीडियो, पोस्ट और मीम्स की बाढ़ आ गई। सबसे ज्यादा हैरानी की बात यह रही कि सिर्फ 72 घंटों के अंदर लाखों युवाओं ने इस डिजिटल आंदोलन में इंट्रेस्ट दिखाना शुरू कर दिया था। साथ ही फॉलो भी करना शुरू किया। यह पूरा मामला सिर्फ हंसी-मजाक तक सीमित नहीं रहा, बल्कि बेरोजगारी, पेपर लीक, सिस्टम से नाराजगी और युवाओं के गुस्से की आवाज बनता चला गया। इस पूरे अभियान के पीछे 30 साल के अभिजीत दीपके का नाम सामने आया है। ऐसे में चलिए इस पार्टी से संबंधित कई अहम बातों के बारे में जानते हैं।

कौन हैं अभिजीत दीपके?

अभिजीत दीपके महाराष्ट्र के औरंगाबाद यानी छत्रपति संभाजीनगर के रहने वाले हैं। उन्होंने पुणे से पत्रकारिता की पढ़ाई की और बाद में आगे की पढ़ाई के लिए अमेरिका चले गए। वहां उन्होंने बॉस्टन यूनिवर्सिटी से पब्लिक रिलेशन में मास्टर्स की पढ़ाई पूरी की। और अभिजीत लंबे समय से सोशल मीडिया और राजनीतिक कैंपेन से जुड़े रहे हैं। जानकारी के मुताबिक, वह पहले आम आदमी पार्टी की सोशल मीडिया टीम के साथ भी काम कर चुके हैं। दिल्ली चुनाव के दौरान वायरल हुए कई मीम्स और ऑनलाइन कैंपेन में भी उनकी भूमिका मानी जाती है। इसके अलावा वह दिल्ली के शिक्षा विभाग में कम्युनिकेशन सलाहकार के तौर पर भी काम कर चुके हैं।

कैसे शुरू हुई 'कॉकरोच जनता पार्टी'?

इस पूरे मामले की शुरुआत एक अदालत की टिप्पणी के बाद हुई। सोशल मीडिया पर यह बात तेजी से फैली कि सीजेआई सूर्यकांत ने कुछ युवाओं को लेकर ‘कॉकरोच’ शब्द का इस्तेमाल किया है। उन्होंने कहा था 'कुछ युवा कॉकरोच की तरह हैं… नौकरी नहीं मिलती तो मीडिया, सोशल मीडिया या RTI एक्टिविस्ट बनकर सब पर हमला करने लगते हैं।' हालांकि बाद में सफाई भी दी गई थी, लेकिन तब तक इंटरनेट पर बहस शुरू हो चुकी थी। इसके बाद अभिजीत दीपके ने मजाकिया अंदाज में एक पोस्ट डाली कि 'अगर सारे कॉकरोच एक साथ आ जाएं तो?' बस यहीं से कहानी में एक दिलचस्प मोड़ आया। उन्होंने एक वेबसाइट और फॉर्म बनाकर लोगों को जोड़ना शुरू किया और काफी कम समय में ही हजारों लोग इससे जुड़ गए। लोगों को इस पार्टी की बातें इसलिए भी पसंद आईं क्योंकि इसका अंदाज काफी ज्यादा अलग था। इस पार्टी की बातों में इंटरनेट वाली आसान, मजेदार और सार्कास्टिक बातें थीं। साथ ही एलिजिबिलिटी क्राइटेरिया भी शेयर किया है।

क्यों कहा जा रहा 'आलसी और बेरोजगारों की आवाज'?

इस डिजिटल अभियान की टैगलाइन रखी गई, "आलसी और बेरोजगारों की आवाज।" पार्टी की सदस्यता के लिए जो बातें लिखी गईं, उन्होंने सोशल मीडिया पर तहलका मचा दिया। इसमें कहा गया कि सिर्फ वही लोग शामिल हो सकते हैं जो बेरोजगार हों, हर समय इंटरनेट पर रहते हों और प्रोफेशनल तरीके से अपना दुखड़ा रो सकते हों। नेटिजंस को यह अंदाज इसलिए पसंद आया क्योंकि इसमें बहुत ही आसान बातें थीं जो मीम्स और सोशल मीडिया पर रोज देखने और पढ़ने को मिलती हैं। नौकरी की टेंशन, एग्जाम में गड़बड़ी, सिस्टम से नाराजगी और फ्यूचर प्रेशर तक सब कुछ बहुत ही सार्कास्टिक अंदाज में सामने आने लगा।

मजाक से शुरू हुआ, लेकिन मुद्दे असली निकले

इस पेज की शुरुआत तो हंसी-मजाक से ही हुई थी लेकिन धीरे-धीरे इसमें गंभीर मुद्दे भी उठने लग गए। पार्टी के नाम पर जो बातें सामने आईं, उनमें पेपर लीक, बेरोजगारी, राजनीति में दल-बदल, महिलाओं की भागीदारी और न्याय व्यवस्था जैसे मुद्दे शामिल थे। इनके मेनिफेस्टो में भी महिलाओं को 50 फीसदी आरक्षण देने की बात कही गई, वो भी मौजूदा सीटों पर। साथ ही पार्टी बदलने वाले नेताओं पर लंबे समय तक चुनाव लड़ने पर रोक लगाने की मांग भी उठाई गई। इसके अलावा युवाओं से जुड़े कई मुद्दों को भी सोशल मीडिया पर लगातार उठाया जाने लगा। इन्हीं सब वजहों से ये मीम पेज बनने की जगह ऑनलाइन बहस का हिस्सा बन गया, जहां लोग अपनी बातें रख पा रहे हैं।

'कॉकरोच' नाम ही क्यों चुना गया?

कॉकरोच नाम सुनकर ही घिनौना लगता है, जिसके चलते इस पार्टी के नाम पर भी काफी सवाल उठे। इस पर अभिजीत दीपके ने कहा कि यह नाम जानबूझकर चुना गया। उनके मुताबिक अगर सिस्टम युवाओं को बेकार, परेशान या दबा हुआ समझता है, तो वही पहचान अब विरोध की ताकत बनकर उठेगी। उन्होंने कहा कि कॉकरोच मुश्किल से मुश्किल हालात में भी जिंदा रहता है। इसी सोच के साथ यह नाम चुना गया, ताकि यह दिखाया जा सके कि आज का युवा हर परेशानी के बाद भी हार मानने के लिए बिल्कुल भी तैयार नहीं है।

क्या आगे सचमुच बन सकती है पार्टी?

फिलहाल यह साफ नहीं है कि 'कॉकरोच जनता पार्टी' सच में राजनीतिक पार्टी बनेगी या नहीं। आमतौर पर ऐसे टॉपिक सोशल मीडिया पर शुरू होते हैं। और, ऐसे ही प्लेटफॉर्म्स तक सिमट कर रह जाते हैं। ये इससे जुड़े लोगों की आगे की प्लानिंग पर निर्भर करेगा कि ये सोशल मीडिया शगूफा आगे किसी मिशन में तब्दील हो सकता है या नहीं। लेकिन इतना जरूर है कि इसने दिखा दिया कि आज की पीढ़ी अपने गुस्से और निराशा को अब सिर्फ भाषणों से नहीं, बल्कि मीम्स और सोशल मीडिया के जरिए भी सामने ला रही है। यह ट्रेंड इस बात का बड़ा उदाहरण बन गया है कि इंटरनेट पर शुरू हुई छोटी चीज भी कुछ ही घंटों में देशभर की चर्चा बन सकती है।

Created On :   20 May 2026 8:04 PM IST

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