F-1 Visa: US में पढ़ने वाले भारतीयों को बड़ी राहत! अमेरिका की अदालत ने वीजा में बदलाव से किया इनकार, ट्रंप के प्रस्तावित नियम के लिए बड़ा झटका

US में पढ़ने वाले भारतीयों को बड़ी राहत! अमेरिका की अदालत ने वीजा में बदलाव से किया इनकार, ट्रंप के प्रस्तावित नियम के लिए बड़ा झटका
काफी समय से एफ-1 वीजा धारकों को 'ड्यूरेशन ऑफ स्टेटस' के आधार पर अमेरिका में रहने की इजाजत थी लेकिन ट्रंप ने नियम में बदलावों का प्रस्ताव रखा था। जिसको कोर्ट से बड़ा झटका मिला है।

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। अमेरिका में पढ़ाई करने वाले भारतीय छात्रों के लिए एक बड़ी राहत की खबर सामने आई है। अमेरिका की अदालत ने ट्रंप प्रशासन के उस नए नियम पर रोक लगाई है, जिसमें विदेशी छात्रों के अमेरिका में रहने की समय सीमा तय की जानी थी। इस नियम के बाद एफ-1 वीजा पर पढ़ने वाले छात्रों को ज्यादा से ज्यादा चार साल तक ही अमेरिका में रहने की अनुमति मिल सकती थी। अब उन छात्रों को परेशानी नहीं होगी, जिनकी पढ़ाई या रिसर्च चार साल से ज्यादा चलती है। कोर्ट के फैसले के बाद अभी पुराना नियम ही जारी रहने वाला है। इससे हजारों भारतीय छात्रों को राहत मिलने वाली है।

क्या था ट्रंप प्रशासन का नया नियम?

ट्रंप प्रशासन विदेशी छात्रों के लिए अमेरिका में रहने के मौजूदा नियम में बदलाव करना चाहता था। जिसके तहत F-1 वीजा वाले छात्रों को अमेरिका में ज्यादा से ज्यादा चार साल तक रहने की अनुमति मिल सकती थी। वहीं, J-1 वीजा वाले एक्सचेंज प्रोग्राम के लोगों पर भी समय की सीमा लगाई जानी थी। विदेशी पत्रकारों के लिए भी 240 दिनों की सीमा तय करने की योजना थी लेकिन नियम लागू होने से ठीक एक दिन पहले ही अमेरिकी अदालत ने इस पर रोक लगा दी थी।

भारतीय छात्रों के लिए बड़ी राहत

इस फैसले से भारत के उन छात्रों को खास फायदा हुआ है, जो अमेरिका में लंबी पढ़ाई कर रहे हैं। कई भारतीय छात्र अमेरिका में PhD, रिसर्च और दूसरे लंबे कोर्स करने गए हैं और ऐसे प्रोग्राम अक्सर चार साल से ज्यादा समय ले सकते हैं। रिसर्च में देरी, थीसिस, लैब का काम या किसी दूसरे कारण से पढ़ाई पूरी होने में तय समय सीमा से ज्यादा समय भी लग सकता है। चार साल की पक्की सीमा होने पर ऐसे छात्रों को बड़ी परेशानी हो सकती थी। अगर नया नियम लागू हो जाता, तो कुछ छात्रों को तय समय खत्म होने के बाद अमेरिका में रहने के लिए अलग प्रोसेस से गुजरना पड़ता। ऐसी स्थिति में पढ़ाई पूरी करना और भी मुश्किल हो सकता था। अब फिलहाल ऐसा खतरा नहीं है। सभी छात्र अपने मौजूदा नियमों के अनुसार अपनी पढ़ाई जारी रख सकते हैं।

परिवारों पर भी कम होगा दबाव

नए नियम से छात्रों के साथ उनके परिवारों की चिंता भी बढ़ सकती थी। अमेरिका में पढ़ाई पहले ही काफी महंगी होती है और अगर बार-बार वीजा या रहने की अनुमति से जुड़ा प्रोसेस करना हो तो काफी ज्यादा मेहनत, पैसा और डॉक्यूमेंटेशन बढ़ जाता है। लेकिन अदालत के फैसले से अभी छात्रों को इस परेशानी से राहत मिली है। फिलहाल अमेरिका में पुराना 'ड्यूरेशन ऑफ स्टेटस' सिस्टम ही जारी है। आसान भाषा में इसका मतलब है कि छात्र पढ़ाई से जुड़े नियमों का पालन करके अमेरिका में रह सकता है।

अदालत ने क्या कहा?

अदालत ने नए नियम को लेकर सरकार के तर्कों पर सवाल उठाए हैं। जज एफ. डेनिस सेलॉर ने कहा है कि सरकार ने यह ठीक से नहीं सोचा कि इस बदलाव का अमेरिकी कॉलेजों और यूनिवर्सिटीज पर क्या असर पड़ सकता है। उनके अनुसार, ऐसे नियमों से विदेशी छात्रों की संख्या कम हो सकती और इसका असर अमेरिकी शिक्षा संस्थानों की कमाई पर भी पड़ सकता है।

क्या आगे फिर बदल सकता है नियम?

यह मामला अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। ट्रंप प्रशासन इस फैसले को ऊपरी अदालत में चुनौती दे सकता है और इसलिए आने वाले समय में नियमों में फिर बदलाव की संभावना बनी हुई है। भारतीय छात्रों को फिलहाल अपनी पढ़ाई और वीजा से जुड़े सभी नियमों का सही तरीके से पालन करना चाहिए। अमेरिका में पढ़ रहे छात्रों के लिए अपनी यूनिवर्सिटी के इंटरनेशनल स्टूडेंट ऑफिस से जानकारी लेते रहना भी जरूरी है। जो छात्र अमेरिका जाने की तैयारी कर रहे हैं, उन्हें पढ़ाई और फीस के साथ वहां के नए इमिग्रेशन नियमों पर भी नजर रखनी चाहिए।

Created On :   15 Sept 2026 4:34 PM IST

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