मणिपुर जातीय हिंसा: भारत सरकार ने 5 वीं बार बढ़ाया जांच आयोग का कार्यकाल, जानिए अब- कब तक सौंपनी होगी रिपोर्ट

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। भारत सरकार के गृह मंत्रालय ने करीब तीन साल पहले मणिपुर में हुई जातीय हिंसा की जांच कर रह आयोग को रिपोर्ट जमा करने के लिए समयसीमा को बढ़ा दिया है। केंद्र सरकार ने आयोग को अब 6 महीने को और अतिरिक्त समय दिया है। इससे पहले सितंबर 2024, दिसंबर 2024, मई 2025 और दिसंबर 2025 में भी इसकी समयसीमा बढ़ाई गई थी। अब पांचवीं बार आयोग को नई टाइमलाइन मिली है। इससे साफ हो गया है कि अब जांच आयोग जातीय हिंसा की रिपोर्ट को 20 नवंबर 2026 तक सौंप सकेगा। गृह मंत्रालय की ओर से जारी सरकारी अधिसूचना में इसकी जानकारी दी गई है।
आपको बता दें केंद्र सरकार ने मणिपुर सरकार की सिफारिश पर मई 2023 से शुरू हुई जातीय हिंसा की जांच के लिए 4 जून 2023 को जांच आयोग गठित किया था। मणिपुर हिंसा ने पूरे राज्य के साथ देश को हिला दिया था। हिंसा में 260 से अधिक लोगों की मौत हो गई थी, हजारों लोग बेघर हो गए थे। उग्र भीड़ ने कई घरों, दुकानों और संपत्तियों को आग के हवाले कर दिया गया था।
शुरुआत में तीन सदस्यीय आयोग की अध्यक्षता पूर्व गुवाहाटी हाईकोर्ट के सीजे अजय लांबा कर रहे थे। उन्होंने 28 फरवरी 2026 से इस्तीफा दे दिया। इसके बाद 1 मार्च 2026 को शीर्ष कोर्ट के पूर्व जस्टिस बलबीर सिंह चौहान ने आयोग की कमान संभाली। आयोग यह जांच कर रहा है कि 3 मई 2023 को शुरू हुई हिंसा आखिर किन परिस्थितियों में फैली और इसके पीछे क्या कारण थे।
क्या हुआ था उस दिन?
पहले से ही तनावग्रस्त मणिपुर में मैतेई समुदाय को अनुसूचित जनजाति का दर्जा देने की मांग के विरोध में कुकी समुदाय ने पहाड़ी जिलों में जनजातीय एकजुटता मार्च निकाला। इसके बाद राज्य में बड़े पैमाने पर हिंसा हुई।
आयोग जांच कर रहा है कि प्रशासन की ओर से हिंसा रोकने और हालात संभालने में कोई लापरवाही हुई थी या नहीं। साथ ही यह देखा जा रहा है कि सरकारी कदम कितने प्रभावी थे और लोगों की शिकायतों में कितनी सच्चाई है।
Created On :   15 May 2026 1:47 PM IST












