Gen Z Movement: इन देशों में Gen Z ने बदल दिया इतिहास और भूगोल, जानिए युवाओं के ऐतिहासिक आंदोलन के बारे में

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। भारत में इन दिनों Gen Z मतदाता सूची विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) और CEC ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर बड़े स्तर पर प्रदर्शन कर रहे हैं। यह प्रदर्शन दिन-प्रतिदिन बढ़ता ही जा रहा है। देशव्यापी विरोध प्रदर्शन धीरे-धीरे करते जन आंदोलन का रूप ले चुका है। सत्तापक्ष इस प्रोटेस्ट को लेकर थोड़ी घबराई हुई है क्योंकि दुनिया में ऐसे कई देश है जहां Gen Z ने सत्ता को उखाड़ फेंकने में बड़ी भूमिका निभाई है। इनके विरोध प्रदर्शन का तरीका बाकी प्रदर्शनों से अलग है। आइए जानते हैं कि अब तक किन-किन देशों में जेन जी ने सरकार को सत्ता से बदखल करने में बड़ी भूमिका निभाई है।
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इन देशों में युवाओं का चल रहा है प्रदर्शन
दुनिया के अलग-अलग देशों में युवाओं और छात्रों का विरोध प्रदर्शन जारी है। भारत में 10 अक्टूबर से कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे को लेकर आंदोलन करने का ऐलान किया है। फ्रांस में शिक्षा व्यवस्था की बदहाली को लेकर वहां के युवा और छात्र सड़क पर उतर चुके हैं। पेरिस में भी युवाओं ने आंदोलन की नई मुहिम छेड़ दी है। दुनिया भर में हो रहे ये विरोध प्रदर्शन युवाओं की राजनीतिक सक्रियता को दिखा रहे हैं। पिछले कुछ सालों में युवाओं के आंदोलन ने दुनिया के कई देशों की सरकार बदल दी है। बंग्लादेश से लेकर नेपाल और श्रीलंका तक युवाओं ने सरकारों को चुनौती देने के लिए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल किया है। आइए जानते है कि Gen Z अब तक कितने देशों की सरकार हिल चुके हैं और उनके आंदोलन किस मॉडल पर करता है काम?
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Gen Z प्रदर्शन मॉडल
जेन जी आमतौर पर 1997 से 2012 के बीच पैदा हुए लोगों को कहा जाता है। बीते कुछ सालों में इस पीढ़ी ने तेजी से अपनी राजनीतिक सक्रियता दिखाई है। इस जेनरेशन के समर्थन जुटाने का तरीका काफी अलग है। जेन जी डीजिटल प्लेटफॉर्म, मीम, रील, वायरल हैशटैग के जरिए प्रोटेस्ट में शामिल होने की अपील करते हैं। ये नो लीडर मॉडल पर काम करते है यानी विरोध प्रदर्शन का कोई एक चेहरा नेतृत्व नहीं करता। Gen Z के अनुसार, इनके विरोध प्रदर्शन का कारण करप्शन, अनेम्प्लॉयमेंट, इकॉनोमिक प्रेशर, खराब पब्लिक सर्विस और आजादी पर रोक हैं। उदाहरण के तौर पर, कॉकरोच जनता पार्टी शुरूआत में सिर्फ एक सोशल मीडिया हैंडल थी। लेकिन युवाओं ने सोशल मीडिया के जरिए उसे विरोध की मुहिम में बदल दिया। जिसने जंतर मंतर पर करीब एक महीने आंदोलन किया और सरकार को झुकना पड़ा।
ऐसे देश जहां Gen Z के आंदोलन ने सरकारें हिला दी
बांग्लादेश
2024 में बंग्लादेश के युवाओं ने अपनी सरकार के खिलाफ एक बड़ा विद्रोह किया। शुरूआत में उनका आंदोलन सरकारी नौकरी में कोटा सिस्टम और रोजगार में निष्पक्ष अवसरों की मांग को लेकर था। लेकिन बाद में उन्होंने सरकार के उपर तानाशाही करने का भी आरोप लगाया। जनता के बढ़ते गुस्से और देश भर में चल रहे विरोध प्रदर्शन ने अगस्त 2024 में बंग्लादेश की तत्कालिन प्रधानमंत्री शेख हसीना को इस्तीफा देने और देश छोड़ने के लिए मजबूर कर दिया।
नेपाल
नेपाल के युवाओं ने 2025 में भ्रष्टाचार, राजनीतिक विशेषाधिकारों और सोशल मीडिया पर पाबंदियों को लेकर देश भर में विरोध प्रदर्शन किया। युवाओं का गुस्सा नेपोटिज्म और भ्रष्टाचार को लेकर था। जैसे ही सरकार ने सोशल मीडिया के इस्तेमाल को लेकर कड़े निमय बनाने की चर्चा की तो इससे एक बड़ा राजनीतिक आंदोलन शुरू हो गया। इस कारण देश के कई सरकारी बिल्डिंग में तोड़फोड़ और आगजनी की घटना हुई। आंदोलन के बाद हुए चुनाव में युवाओं की नेतृत्व वाली नई सरकार बनी।
श्रीलंका
श्रीलंका साल 2022 में आर्थिक संकट का सामना कर रहा था। इसके कारण नागरीकों को बढ़ती कीमतों, ईंधन की कमी और जरूरी सामान ना मिल पाने जैसी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा था। इससे परेशान होकर वहां के युवाओं ने बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने राष्ट्रपति भवन समेत कई जरूरी सरकारी इमारत पर कब्जा कर लिया। सरकार पर दबाव बढ़ने की वजह से राष्ट्रपति गोटाबाया राजपक्षे देश छोड़कर भाग गए और इस्तीफा दे दिया।
इन देशों के अलावा मेडगास्कर और पेरू में भी जेन जी के प्रोटेस्ट ने सरकार पर दबाव डाला। मेडगास्कर में युवाओं ने बिजली और पानी की लगातार कमी और भ्रष्टाचार के खिलाफ विरोध किया। पेरू के प्रदर्शन में भी ऐसी ही स्थिति देखने को मिली। केन्या में 2024 के फाइनेंस बिल के खिलाफ जब देशव्यापी विरोध प्रदर्शन हुआ तो राष्ट्रपति विलियम रुटो को विवादास्पद कानून वापस लेना पड़ा।
Created On :   9 Oct 2026 8:37 PM IST












