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बीते साल 292 पुलिसवालों में सबसे ज्यादा 67 जवान सीआरपीएफ के हुए थे शहीद

October 21st, 2019 19:30 IST
 बीते साल 292 पुलिसवालों में सबसे ज्यादा 67 जवान सीआरपीएफ के हुए थे शहीद

हाईलाइट

  • बीते साल 292 पुलिसवालों में सबसे ज्यादा 67 जवान सीआरपीएफ के हुए थे शहीद

नई दिल्ली, 21 अक्टूबर (आईएएनएस)। आज ही के दिन 21 अक्टूबर सन् 1959 को लद्दाख में चीनी सैनिकों के हाथों शहीद हुए 10 पुलिसकर्मियों की याद में दिल्ली में एक स्मरणोत्सव परेड (शोक-परेड) आयोजित की गई। आज का दिन केंद्रीय पुलिस संगठनों और राज्यों की पुलिस शहीदी-दिवस के रूप में मनाती है। शहीदी-दिवस के इस मौके पर हर साल उन पुलिसकर्मियों को याद किया जाता है जो, बीते साल शहीद हो चुके हों।

सोमवार को दिल्ली की नई पुलिस लाइन में आयोजित इस शोक परेड में दिल्ली के पूर्व पुलिस कमिश्नर डॉ. के.के. पॉल, तिलक राज कक्कड़ ने भी हिस्सा लिया। दोनों ही पूर्व आईपीएस अधिकारियों ने शहीदी-स्मारक स्थल पर मौजूद शहीदी-पुस्तिका पर भी पुष्प अर्पित किए।

शोक-परेड के दौरान दो मिनट का मौन रखकर शहीद पुलिसकर्मियों को श्रद्धांजलि दी गई। शोक-परेड आयोजन के उपरांत दिल्ली पुलिस के विशेष आयुक्त राजेश मलिक ने बीते साल राष्ट्र की रक्षा में खुद की जान न्योछावर कर देने वाले शहीद पुलिसकर्मियों की संख्या बताते हुए उनके बारे में विशेष वक्तव्य दिया।

विशेष पुलिस आयुक्त राजेश मलिक ने कहा, बीते साल 1 सितंबर 2018 से 31 अगस्त 2019 के बीच की अवधि में पुलिस संगठनों और पुलिस बलों के 292 अधिकारियों और जवानों ने खुद के प्राण राष्ट्र हित में न्योछावर कर दिए।

इन 292 शहीद हुए जवानों में 10 दिल्ली पुलिस के थे। बीते एक साल की अवधि में आंध्र प्रदेश में 2, अरुणाचल प्रदेश में 3, बिहार में 7, छत्तीसगढ़ में 14, हिमाचल प्रदेश में 1, हरियाणा में 3, जम्मू एवं कश्मीर में 24, झारखंड में 5, कर्नाटक में 12, मध्य प्रदेश में 2, महाराष्ट्र में 20, मणिपुर में 2, ओड़िशा में 2, राजस्थान में 10, सिक्किम में 1, त्रिपुरा में 1, उत्तर प्रदेश में 5, असम राइफल्स के 3, बंगाल में 7, सीमा सुरक्षा बल में 41, केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल में 6, केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल में 67, भारत-तिब्बत सीमा पुलिस में 23, रेलवे सुरक्षा बल में 11, सशस्त्र सीमा बल (एसएसबी ) के 5, उत्तराखंड में 1 और एनडीआरएफ के 4 जवान कर्तव्य की वेदी पर शहीद हो गए।

दिल्ली पुलिस के जिन 10 जवानों ने देशहित में प्राण न्योछावर किए, उनमें सहायक उप-निरीक्षक सुरेंद्र कुमार, जितेंद्र सिंह, ओमवीर सिंह (तीनों ट्रैफिक ब्रांच), हवलदार महावीर सिंह (रोहिणी जिला), हवलदार गुलजारी लाल और सिपाही प्रदीप यादव (द्वारका जिला), हवलदार राजपाल सिंह कसाना (दिल्ली पुलिस स्पेशल सेल), सिपाही कुलदीप सिंह (दिल्ली पुलिस तृतीय वाहनी) और सिपाही सन्नी दिल्ली पुलिस के पश्चिमी जिले में तैनात थे।

अपने आप में विशिष्ट इस शोक-परेड के अवसर पर वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों ने पुलिस के उन सभी 10 जवानों को नम आंखों से याद किया, जो आज से 58 साल पहले (21 अक्टूबर, 1959) चीन की सेना के हाथों लद्दाख में एक ऊंची पहाड़ी पर घिरकर शहीद हो गए थे। तब से दिल्ली में उन्हीं 10 शहीद जवानों की याद में हर साल दिल्ली पुलिस द्वारा स्थानीय पुलिस लाइन में इस तरही की शोक-परेड का आयोजन किया जा रहा है।

उधर, उत्तराखंड राज्य की राजधानी देहरादून पुलिस लाइन में शहीद स्मारक स्थल पर ऐसी ही शोकसभा का आयोजन किया गया। इस शोकसभा में भी बीते एक वर्ष में शहीद हुए पुलिसकर्मियों को याद किया गया।

पुलिस स्मृति दिवस समारोह में बतौर मुख्य अतिथि, मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने कहा, पुलिस स्मृति दिवस देशभर में मनाया जाता है। इस मौके पर कम के कम हम सब पुलिस और अर्धसैनिक पुलिस संगठनों के शहीद हुए जवानों की शहादत को दिल-मन-आत्मा से याद तो करते हैं। उनके प्रति हम सबकी यही सच्ची श्रद्धांजलि होनी चाहिए।

इस अवसर पर देशभर में शहीद पुलिसकर्मियों सहित बीते वर्ष उत्तराखंड पुलिस के शहीद एक जवान के प्रति श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए राज्य के पुलिस महानिदेशक अनिल कुमार रतूड़ी, पुलिस महानिदेशक कानून एवं व्यवस्था अशोक कुमार ने भी उद्गार व्यक्त किए।

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छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद का खात्मा ठोस रणनीति से संभव - अभय तिवारी

छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद का खात्मा ठोस रणनीति से संभव - अभय तिवारी

डिजिटल डेस्क, भोपाल। 21वीं सदी में भारत की राजनीति में तेजी से बदल रही हैं। देश की राजनीति में युवाओं की बढ़ती रूचि और अपनी मौलिक प्रतिभा से कई आमूलचूल परिवर्तन देखने को मिल रहे हैं। बदलते और सशक्त होते भारत के लिए यह राजनीतिक बदलाव बेहद महत्वपूर्ण साबित होगा ऐसी उम्मीद हैं।

अलबत्ता हमारी खबरों की दुनिया लगातार कई चहरों से निरंतर संवाद करती हैं। जो सियासत में तरह तरह से काम करते हैं। उनको सार्वजनिक जीवन में हमेशा कसौटी पर कसने की कोशिश में मीडिया रहती हैं।

आज हम बात करने वाले हैं मध्यप्रदेश युवा कांग्रेस (सोशल मीडिया) प्रभारी व राष्ट्रीय समन्वयक, भारतीय युवा कांग्रेस अभय तिवारी से जो अपने गृह राज्य छत्तीसगढ़ से जुड़े मुद्दों पर बेबाकी से अपनी राय रखते हैं और छत्तीसगढ़ को बेहतर बनाने के प्रयास के लिए लामबंद हैं।

जैसे क्रिकेट की दुनिया में जो खिलाड़ी बॉलिंग फील्डिंग और बल्लेबाजी में बेहतर होता हैं। उसे ऑलराउंडर कहते हैं अभय तिवारी भी युवा तुर्क होने के साथ साथ अपने संगठन व राजनीती  के ऑल राउंडर हैं। अब आप यूं समझिए कि अभय तिवारी देश और प्रदेश के हर उस मुद्दे प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से लगातार अपना योगदान देते हैं। जिससे प्रदेश और देश में सकारात्मक बदलाव और विकास हो सके।

छत्तीसगढ़ में नक्सल समस्या बहुत पुरानी है. लाल आतंक को खत्म करने के लिए लगातार कोशिशें की जा रही है. बावजूद इसके नक्सल समस्या बरकरार है।  यह भी देखने आया की पूर्व की सरकार की कोशिशों से नक्सलवाद नहीं ख़त्म हुआ परन्तु कांग्रेस पार्टी की भूपेश सरकार के कदम का समर्थन करते हुए भारतीय युवा कांग्रेस के राष्ट्रीय कोऑर्डिनेटर अभय तिवारी ने विश्वास जताया है कि कांग्रेस पार्टी की सरकार एक संवेदनशील सरकार है जो लड़ाई में नहीं विश्वास जीतने में भरोसा करती है।  श्री तिवारी ने आगे कहा कि जितने हमारे फोर्स हैं, उसके 10 प्रतिशत से भी कम नक्सली हैं. उनसे लड़ लेना कोई बड़ी बात नहीं है, लेकिन विश्वास जीतना बहुत कठिन है. हम लोगों ने 2 साल में बहुत विश्वास जीता है और मुख्यमंत्री के दावों पर विश्वास जताया है कि नक्सलवाद को यही सरकार खत्म कर सकती है।  

बरहाल अभय तिवारी छत्तीसगढ़ मुख्यमंत्री बघेल के नक्सलवाद के खात्मे और छत्तीसगढ़ के विकास के संबंध में चलाई जा रही योजनाओं को जन-जन तक पहुंचाने के लिए निरंतर काम कर रहे हैं. ज्ञात हो कि छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री ने यह कई बार कहा है कि अगर हथियार छोड़ते हैं नक्सली तो किसी भी मंच पर बातचीत के लिए तैयार है सरकार। वहीं अभय तिवारी  सर्कार के समर्थन में कहा कि नक्सली भारत के संविधान पर विश्वास करें और हथियार छोड़कर संवैधानिक तरीके से बात करें।  कांग्रेस सरकार संवेदनशीलता का परिचय देते हुए हर संभव नक्सलियों को सामाजिक  देने का प्रयास करेगी।  

बीते 6 महीने से ज्यादा लंबे चल रहे किसान आंदोलन में भी प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से अभय तिवारी की खासी महत्वपूर्ण भूमिका हैं। युवा कांग्रेस के बैनर तले वे लगातार किसानों की मदद के लिए लगे हुए हैं। वहीं मौजूदा वक्त में कोरोना की दूसरी लहर के बाद बिगड़ी स्थितियों में मरीजों को ऑक्सीजन और जरूरी दवाऐं निशुल्क उपलब्ध करवाने से लेकर जरूरतमंद लोगों को राशन की व्यवस्था करना। राजनीति से इतर बेहद जरूरी और मानव जीवन की रक्षा के लिए प्रयासरत हैं।

बहरहाल उम्मीद है कि देश जल्दी करोना से मुक्त होगा और छत्तीसगढ़ जैसा राज्य नक्सलवाद को जड़ से उखाड़ देगा। देश के बाकी संपन्न और विकासशील राज्यों की सूची में जल्द शामिल होगा। लेकिन ऐसा तभी संभव होगा जब अभय तिवारी जैसे युवा और विजनरी नेता निरंतर रणनीति के साथ काम करेंगे तो जल्द ही छत्तीसगढ़ भी देश के संपन्न राज्यों की सूची में शामिल होगा।