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इंदिरा बनर्जी, विनीत सरन और केएम जोसेफ ने ली SC जज की शपथ

August 07th, 2018 15:45 IST

हाईलाइट

  • केएम जोसेफ आज सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस के तौर पर शपथ लेंगे।
  • तीन जजों की लिस्ट में जस्टिस जोसेफ का नाम तीसरे नंबर पर है।
  • वरिष्ठता के इसी क्रम में जस्टिस जोसेफ तीसरे नंबर पर ही शपथ लेंगे।
  • जस्टिस जोसेफ की वरिष्ठता को लेकर विवाद भी हो रहा।
  • सरकार पर जस्टिस जोसेफ की वरिष्ठता को कम करने का आरोप।


डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। तमाम विवादों के बाद उत्तराखंड हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस केएम जोसेफ ने सुप्रीम कोर्ट के जज के रूप में शपथ ले ली। जोसेफ के अलावा इंदिरा बनर्जी और विनीत सरन ने भी SC के जज के रूप में शपथ ली। चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा ने जस्टिस जोसेफ, जस्टिस इंदिरा बनर्जी और जस्टिस विनीत सरन को शपथ दिलाई। 

सबसे पहले इंदिरा बनर्जी ने ली शपथ

वरिष्ठता के क्रम के अनुसार सबसे पहले इंदिरा बनर्जी ने शपथ ली। इसके बाद विनीत सरन ने शपथ ग्रहण की। सबसे आखिरी यानी तीसरे नंबर पर जस्टिस जोसेफ ने सुप्रीम कोर्ट के जज के रूप में शपथ ली। इससे पहले जस्टिस जोसेफ की वरिष्ठता को लेकर काफी विवाद भी हुआ था। सरकार पर जस्टिस जोसेफ की वरिष्ठता कम करने के आरोप लगाए गए थे। 

जस्टिस जोसेफ की वरिष्ठता कम की गई

दरअसल एक ही दिन शपथ लेने वाले जजों में जो जज पहले शपथ लेता है वो सीनियर हो जाता है। इस तरह में जस्टिस जोसेफ वरिष्ठता के क्रम में सबसे आखिरी यानी तीसरे नंबर पर रहे। जस्टिस जोसफ का नाम तीसरे नंबर पर रखने को लेकर जजों का मानना था कि केंद्र सरकार ने पदोन्नति में उनकी वरिष्ठता को कम किया है।

SC के जजों ने जताया था विरोध

इसको लेकर SC के जजों ने सोमवार को चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा से मिलकर विरोध जताया था। हालांकि चीफ जस्टिस ने जजों को भरोसा दिलाया था कि वो दूसरे सबसे सीनियर जज जस्टिस रंजन गोगोई से बात करके इस मामले को केंद्र के सामने उठाएंगे। दूसरी ओर चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा ने सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में होने वाले शपथ ग्रहण कार्यक्रम की अधिसूचना जारी कर दी। इसमें जस्टिस जोसेफ का नाम जस्टिस इंदिरा बनर्जी और जस्टिस विनीत सरन के बाद था। 

कांग्रेस ने भी सरकार पर लगाया आरोप

इस मु्द्दे को लेकर कांग्रेस ने भी सोमवार को लोकसभा में हंगामा किया था। सरकार पर मनमाने ढंग से जजों की नियुक्ति का आरोप लगाया। केरल से कांग्रेस सांसद केसी वेणुगोपाल ने शून्य काल में कहा सरकार कोलेजियम की सिफारिशों की अनेदखी कर अपने तरीके से काम करना चाहती है। 

जस्टिस जोसेफ के फैसले के बाद आई थी हरीश रावत की सरकार

दूसरी ओर जस्टिस जोसेफ के नाम पर केंद्र सरकार की आपत्ति को उनके उत्तराखंड चीफ जस्टिस के तौर पर सूबे में राष्ट्रपति शासन लगाने के फैसले को खारिज करने से जोड़ कर देखा जा रहा था। जस्टिस जोसेफ की बेंच के फैसले के बाद SC ने उत्तराखंड में फ्लोर टेस्ट कराने का आदेश दिया था। जिसके बाद उत्तराखंड में हरीश रावत की सरकार की वापसी हुई थी। 
 

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