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MP Crisis: सुप्रीम कोर्ट ने स्पीकर से पूछा- विधायकों के इस्तीफे पर अब तक क्यों नहीं लिया फैसला

MP Crisis: सुप्रीम कोर्ट ने स्पीकर से पूछा- विधायकों के इस्तीफे पर अब तक क्यों नहीं लिया फैसला

हाईलाइट

  • फ्लोर टेस्ट की मांग को लेकर बीजेपी की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई
  • बागी विधायकों से मिलने बेंगलुरु पहुंचे दिग्विजय सिंह, धरने के बाद हिरासत में

डिजिटल डेस्क, भोपाल। मध्यप्रदेश का सियासी बवाल लगातार तेज होता जा रहा है। यह मामला भोपाल से लेकर बेंगलुरू और सर्वोच्च न्यायालय तक पहुंच चुका है। कांग्रेस के बागी विधायकों से मिलने बेंगलुरू पहुंचे पार्टी के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह बुधवार को धरने पर बैठ गए, जिसके बाद पुलिस ने उन्हें हिरासत में ले लिया। भूख हड़ताल का ऐलान कर दिग्विजय सिंह हिरासत में अनशन पर बैठ गए हैं। वहीं मध्य प्रदेश विधानसभा में जल्द फ्लोर टेस्ट कराने की मांग को लेकर बीजेपी की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई की। एमपी कांग्रेस की तरफ से दुष्यंत दवे ने पक्ष रखा। कांग्रेस के वकील की ओर से दलील दी गई कि, पूरी दुनिया कोरोनावायरस के संटक से जूझ रही है, ऐसे में क्या इस वक्त बहुमत परीक्षण कराना जरूरी है।

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SC ने स्पीकर से किए सवाल
मध्य प्रदेश के सिसायी संकट पर सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने विधानसभा स्पीकर से सवाल किया। कोर्ट ने पूछा, आखिर आपने विधायकों के इस्तीफे पर अभी तक फैसला क्यों नहीं लिया? क्या ये विधायक अपने आप अयोग्य नहीं हो जाएंगे? अगर संतुष्ट नहीं हैं, तो विधायकों के इस्तीफे अस्वीकार कर सकते हैं। आपने 16 मार्च को बजट सत्र को टाल दिया। अगर बजट पास नहीं करेंगे, तो राज्य सरकार का कामकाज कैसे चलेगा?

बीजेपी की ओर से मुकुल रोहतगी ने कहा, अगर अदालत कहे तो वह 16 बागी विधायकों को जज के सामने पेश कर सकते हैं। हालांकि जज ने इसके लिए मना करते हुए कहा कि वो ऐसा आदेश जारी नहीं कर सकते हैं।

कांग्रेस के वकील दुष्यंत दवे ने कहा,आसमान नहीं गिर रहा है कि कांग्रेस सरकार को तुरंत चले जाना चाहिए और शिवराज सिंह चौहान की सरकार को लोगों पर धावा बोल देना चाहिए।

दिग्विजय सिंह ने बीजेपी और सिंधिया पर निशाना साधते हुए कहा, बीजेपी चुनी हुई सरकारों को गिराने में व्यस्त है। हमने मध्य प्रदेश में सरकार गिराने के प्लान को असफल कर दिया है, लेकिन ज्योतिरादित्य सिंधिया ने हमें शर्मिंदा किया, कांग्रेस में उनका शानदार करियर था। हमें कभी नहीं लगा था कि वह धोखा देकर बीजेपी जॉइन करेंगे।

बेंगलुरू में हुई दिग्विजय सिंह की गिरफ्तारी को लेकर मध्य प्रदेश के कांग्रेस नेता भोपाल के मिंटो हॉल में गांधी मूर्ति के सामने विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। उनकी मध्य प्रदेश के राज्यपाल से मांग है कि वो इस मामले में हस्तक्षेप कर उनके मंत्री और 16 विधायकों को वहां से छुड़वाएं।

बागी विधायकों ने कर्नाटक के पुलिस महानिदेशक को पत्र लिखकर सुरक्षा की मांग की है। इस पर सीएम कमलनाथ ने कहा, दिग्विजय सिंह हमारे राज्यसभा के उम्मीदवार हैं। वह विधायकों से मिलना चाहते हैं लेकिन उनको कहा गया है वह सुरक्षा के लिए खतरा हैं। क्या वह 500 कर्नाटक पुलिस की मौजूदगी में सुरक्षा के लिए खतरा हैं? इससे पता चलता है विधायकों को बंधक बनाया गया है। बीजेपी सरकार को हाईजैक करना चाहती है।

बेंगलुरु में कांग्रेस के 22 बागी विधायकों ने कर्नाटक डीजीपी को पत्र लिखकर कहा है कि, किसी कांग्रेस नेता को उनसे मिलने की इजाजत न दी जाए। बागी विधायकों ने बेंगलुरु से वीडियो संदेश जारी कर दिग्विजय सिंह और अन्य कांग्रेस नेताओं से मुलाकात करने से इनकार कर दिया है। साथ ही कहा कि, वे अपनी मर्जी से बेंगलुरु में हैं। सूत्रों का कहना है, बागी विधायकों ने यह वीडियो संदेश दिग्विजय सिंह और अन्य नेताओं को बेंगलुरु पुलिस द्वारा हिरासत में लिए जाने के बाद जारी किया है। विधायकों ने वीडियो संदेश में कहा है, वे अपनी मर्जी से बेंगलुरु आए हैं। बीते एक साल से हमारा कोई काम नहीं हुआ है, यहां हम लोग अपनी इच्छा से आए हैं। मेरा दिग्विजय सिंह व अन्य नेताओं से अनुरोध है कि, वे वापस लौट जाएं क्योंकि हम उनसे मुलाकात नहीं करना चाहते।

भाजपा नेता शिवराज सिंह चौहान और अन्य नेताओं द्वारा फ्लोर टेस्ट कराने की याचिका पर वकील दुष्यंत दवे ने कहा, विधायकों को एक बार फिर मतदाताओं के पास जाना चाहिए और चुनाव जीतना चाहिए। इस पर सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस हेमंत गुप्ता ने कहा, यही तो वे लोग कर रहे हैं। वे अपनी सदस्यता छोड़ रहे हैं और फिर से मतदाताओं के पास जा सकते हैं।

कांग्रेस विधायकों का एक प्रतिनिधमंडल दोपहर आज राज्यपाल लालजी टंडन से मुलाकात करेगा।

दुष्यंत दवे ने सुप्रीम कोर्ट में कहा, जब तक कांग्रेस के बागी विधायक वापस भोपाल नहीं आ जाते तब तक फ्लोर टेस्ट कैसे होगा। कांग्रेस के वकील ने सुप्रीम कोर्ट में तर्क दिया कि इस मामले को संवैधानिक पीठ के पास भेजा जाना चाहिए, क्योंकि मध्य प्रदेश जैसी स्थिति इससे पहले कर्नाटक और गुजरात में भी आ चुकी है। वकील दुष्यंत दवे ने गुजरात में हुए राज्यसभा चुनाव का हवाला दिया।

कांग्रेस विधायकों से मिलने बेंगलुरु जाने के सवाल पर सीएम कमलनाथ ने कहा- अगर जरूरत पड़ी तो जरूर जाऊंगा।

डीके शिवकुमार ने कहा, भाजपा कार्यकर्ता होते कौन हैं उन्हें सुरक्षा देने वाले। हमने डीजी को कहा है भाजपा नेता और कार्यकर्ताओं को वहां से हटाया जाए। अगर उन्हें वहां से नहीं हटाया तो हम खुद जाकर हटाएंगे। पहले हम उन्हें पत्र लिखेंगे उसके बाद कोई कदम उठाएंगे।

दिग्विजय सिंह को बेंगलुरु के अमृताहल्ली पुलिस स्टेशन में हिरासत में रखा गया है। उनके साथ डीके शिवकुमार, मध्य प्रदेश कांग्रेस के नेता सज्जन सिंह वर्मा और कांतिलाल भूरिया भी हैं।

दिग्विजय सिंह को बेंगलुरु के अमृताहल्ली पुलिस स्टेशन ले जाया गया। सिंह का कहना है कि वह अब भूख हड़ताल पर हैं।

बेंगलुरू में होटल के बाहर दिग्विजय सिंह का धरना
सियासी उठापटक के बीच दिग्विजय सिंह मध्य प्रदेश कांग्रेस के बागी विधायकों को मनाने बेंगलुरु के रामदा होटल पहुंचे थे, लेकिन विधायकों से मिलने की अनुमति न मिलने से नाराज दिग्विजय सिंह होटल के बाहर धरने पर बैठ गए।हालांकि बाद में दिग्विजय सिंह को ऐहतियातन हिरासत में ले लिया गया। सिंह के साथ डीके शिवकुमार, सज्जन सिंह वर्मा और कांतिलाल भूरिया को भी हिरासत में लिया गया है।

हिरासत में लिए जाने के बाद दिग्विजय सिंह ने कहा, हम उनके वापस आने की उम्मीद कर रहे थे, लेकिन जब हमने देखा कि उन्हें वापस ले जा रहे हैं तो उनके परिवारों से संदेश आए। मैंने व्यक्तिगत रूप से पांच विधायकों से बात की, उन्होंने कहा वे बंदी हैं, फोन छीन लिए गए हैं, हर कमरे के सामने पुलिस है।

बागियों के होटल के बाहर धरने के दौरान दिग्विजय सिंह ने कहा, मैं मध्य प्रदेश से राज्यसभा का उम्मीदवार हूं, 26 मार्च को मतदान होना है। मेरे विधायकों को यहां रखा गया है, वे मुझसे बात करना चाहते हैं लेकिन उनके फोन छीन लिए गए हैं, विधायकों की सुरक्षा को खतरा का हवाला देते हुए पुलिस मुझे उनसे बात भी नहीं करने दे रही है। दिग्विजय सिंह के साथ कांतिलाल भूरिया और तरुण भनोत सहित कर्नाटक प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष डीके शिवकुमार भी हैं। 

कर्नाटक कांग्रेस अध्यक्ष डीके शिवकुमार ने कहा, राज्य की बीजेपी सरकार सत्ता का दुरुपयोग कर रही है। हमारी अपनी राजनीतिक रणनीति है, हम जानते हैं स्थिति को कैसे संभालना है। वह यहां अकेले नहीं हैं, मैं यहां हूं। मुझे पता है उनको कैसे सपोर्ट करना है, लेकिन मैं कर्नाटक में कानून-व्यवस्था खराब नहीं करना चाहता।

दिग्विजय सिंह ने ट्वीट कर कहा, विधायक निजी नागरिक नहीं हैं। वो लाखों जनता के प्रतिनिधि हैं। विधायक को अगर कोई संकट है तो संवैधानिक व्यवस्था है कि वे स्पीकर को मिलें या सदन पटल पर बोलें। अन्य कोई भी तरीका लोकतंत्र का अपहरण है।

वहीं मध्य प्रदेश में फ्लोर टेस्ट को लेकर बुधवार को सुप्रीम कोर्ट में भी सुनवाई हुई। दरअसल, 16 मार्च को फ्लोर टेस्ट टलने से नाराज बीजेपी ने इस मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट पहुंची थी और याचिका दायर कर जल्द फ्लोर टेस्ट कराने की मांग की थी। सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को बीजेपी की याचिका पर मध्य प्रदेश विधानसभा के स्पीकर को नोटिस जारी कर आज जवाब मांगा है। कोर्ट ने इस मामले में कमलनाथ सरकार, विधानसभा अध्यक्ष और सचिव को नोटिस देकर जवाब मांगा है। सभी की निगाहें इसी तरफ है कि आज मध्य प्रदेश सरकार द्वारा क्या पक्ष रखा जाता है। इसके बाद फ्लोर टेस्ट को लेकर क्या निर्णय लिया जाता है।

मध्य प्रदेश कांग्रेस ने भी सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की है। कांग्रेस ने याचिका में कहा है कि उन्हें बेंगलुरु में बीजेपी सरकार की ओर से बंदी बनाकर रखे गए विधायकों से संपर्क करने दिया जाए। इस याचिका पर भी आज सुनवाई होनी है। विधानसभा स्पीकर ने बेंगलुरु में मौजूद बागी विधायकों की सुरक्षा पर चिंता जताते हुए राज्यपाल लालजी टंडन को पत्र लिखा है। पत्र के जरिए स्पीकर ने कहा, लापता विधायकों को लेकर चिंतित हूं, सारे घटनाक्रम को देखकर लगता है कि उनके इस्तीफे दबाव में लिखवाए गए हैं। उन्होंने यह भी कहा है कि कुछ विधायकों के परिजनों ने उनकी सुरक्षा के संबंध में चिंता भी जताई है। राज्यपाल ने भी स्पीकर को जवाबी चिट्ठी लिखी। उन्होंने विधायकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के आग्रह पर कहा, यह जिम्मेदारी कार्यपालिका की है। राज्यपाल ने कमलनाथ सरकार द्वारा किए जा रहे नियुक्तिों और तबादलों की फाइल भी रोक दी है। भाजपा द्वारा इस मामले में राज्यपाल को ज्ञापन सौंपकर कहा गया था कि सरकार अल्पमत में हैं, ऐसे में यह नियुक्तियां अवैध हैं।

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मंगलवार को कमलनाथ ने राज्यपाल को लिखा था खत
मुख्यमंत्री कमलनाथ ने मंगलवार को दूसरी बार राज्यपाल लालजी टंडन को खत लिखकर नाराजगी जाहिर की थी। उन्होंने 16 कांग्रेसी विधायकों को रिहा कराने की मांग करते हुए कहा था कि, पहले बेंगलुरू में कैद किए गए हमारे 16 विधायकों को आजाद होने दें और कुछ दिन बिना दबाव के घर में रहने दें ताकि वे स्वतंत्र मन से फैसला ले सकें। 

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डिजिटल डेस्क, जबलपुर। किसी के लिए भी प्रॉपर्टी खरीदना जीवन के महत्वपूर्ण कामों में से एक होता है। आप सारी जमा पूंजी और कर्ज लेकर अपने सपनों के घर को खरीदते हैं। इसलिए यह जरूरी है कि इसमें इतनी ही सावधानी बरती जाय जिससे कि आपकी मेहनत की कमाई को कोई चट ना कर सके। प्रॉपर्टी की कोई भी डील करने से पहले पूरा रिसर्च वर्क होना चाहिए। हर कागजात को सावधानी से चेक करने के बाद ही डील पर आगे बढ़ना चाहिए। हालांकि कई बार हमें मालूम नहीं होता कि सही और सटीक जानकारी कहा से मिलेगी। इसमें bhaskarproperty.com आपकी मदद कर सकता  है। 

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